‘एटीएम’ खीरा फेल, कद्दू ने संभाली कमाई; तेलडीहा सब्जी हब में भारी उलटफेर
पूर्णिया के रूपौली प्रखंड स्थित तेलडीहा गांव में खीरा की फसल से किसानों को भारी नुकसान हुआ, लेकिन कद्दू की खेती ने उन्हें आर्थिक रूप से सहारा दिया। सब ...और पढ़ें
HighLights
खीरा की फसल से किसानों को भारी नुकसान हुआ।
कद्दू की खेती ने किसानों को आर्थिक राहत दी।
तेलडीहा गांव सब्जी उत्पादन का प्रमुख केंद्र।
जागरण संवाददाता, रूपौली (पूर्णिया)। पूर्णिया जिले के रूपौली प्रखंड क्षेत्र का तेलडीहा गांव, जिसे सब्जी उत्पादन का हब माना जाता है, इस बार खीरा की फसल से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। वहीं कद्दू और अन्य सब्जियों ने किसानों को राहत देकर उनकी आर्थिक स्थिति को संभालने का काम किया है।
तेलडीहा गांव की खासियत यह है कि यहां से होकर गुजरने वाली एसएच-65 सड़क इसे दो हिस्सों में बांटती है। बेहतर सड़क संपर्क के कारण आसपास के दर्जनों गांवों के किसान यहां अपनी सब्जियां बेचते हैं। यही वजह है कि देश के विभिन्न राज्यों से व्यापारी यहां सब्जी खरीदने पहुंचते हैं।

खीरा की फसल ने दिया धोखा
इस बार खीरा की फसल ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। मार्च के पहले सप्ताह से निकलने वाली खीरा की शुरुआती कीमत करीब 24 रुपये प्रति किलो रही। इससे किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद जगी थी।
लेकिन रमजान के बाद बाजार में अचानक गिरावट आई और कीमतें तेजी से नीचे आने लगीं। रामनवमी तक खीरा किसी तरह 12 रुपये किलो तक बिकी, लेकिन उसके बाद एक सप्ताह के भीतर ही भाव गिरकर 2 रुपये किलो तक पहुंच गया। इससे किसानों को भारी आर्थिक झटका लगा।
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उत्पादन के चरम पर गिरा भाव
खीरा की सबसे ज्यादा उपज 15 अप्रैल तक होती है और इसके बाद धीरे-धीरे उत्पादन कम होता जाता है। इस साल जब उत्पादन चरम पर था, उसी समय कीमतों में भारी गिरावट आ गई, जिससे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो गया।

कद्दू ने दी राहत
जहां खीरा ने किसानों को निराश किया, वहीं कद्दू की फसल ने उन्हें सहारा दिया। इस बार कद्दू की कीमत 32 रुपये प्रति पीस से शुरू हुई और अभी भी 22 रुपये प्रति पीस तक बिक रही है, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर है। किसान बताते हैं कि कद्दू की खेती में भले ही बीमारी का खतरा रहता है, लेकिन इस बार यह फसल लाभदायक साबित हुई है।
सब्जी हब के रूप में पहचान
तेलडीहा के आसपास धूसर, शिशवा, गोडियर, आझोकोपा, छर्रापटी, डोभा, मेहदी, हरनाहा, श्रीमाता, टीकापटी और तीनटंगा जैसे गांवों के किसान बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती करते हैं। यहां की खेती किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है।
संतुलन बना रही खेती
किसानों का कहना है कि खीरा और कद्दू दोनों ही फसलें ‘एटीएम’ की तरह काम करती हैं, जो हर दूसरे दिन आमदनी देती हैं। हालांकि इस बार खीरा ने नुकसान पहुंचाया, लेकिन कद्दू ने उस नुकसान की भरपाई कर दी।कुल मिलाकर, इस बार खीरा ने किसानों को पीड़ा दी, लेकिन कद्दू ने उस पीड़ा पर मरहम लगाकर उन्हें आर्थिक रूप से संभालने का काम किया है।