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    50 साल पुराना है पूर्णिया के इस गांव का खूनी इतिहास, 3 हत्याकांडों में 9 को उम्रकैद

    Updated: Tue, 07 Jul 2026 07:38 PM (GMT+05:30)

    पूर्णिया के सरसी गांव में 50 साल से चले आ रहे खूनी संघर्ष में हाल ही में तीन हत्याकांडों में नौ लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। ...और पढ़ें

    50 साल पुराना है पूर्णिया के सरसी गांव का खूनी इतिहास (AI Generated Image)

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    प्रशांत चौधरी, पूर्णिया। आपसी वर्चस्व में खूनी खेल का बड़ा गवाह बन चुका जिले का सरसी गांव रह-रहकर सूर्खियों में आ जाता है। अब सात जुलाई 2020 को बेनी सिंह की हुई हत्या मामले में कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने को लेकर गांव सूर्खियों में है।

    गत दो साल के दौरान यहां पूर्व में हुई तीन हत्याकांडों में सजा सुनाई गई है। इसमें चर्चित मलय सिंह हत्याकांड व रिंटू सिंह हत्याकांड भी शामिल है। उक्त दोनों हत्या भी आपसी वर्चस्व में ही घटी थी। इन तीन हत्याकांड में कुल 9 लोगों को आजीवन कैद की सजा सुनाई गई है।

    सरसी गांव में वर्ष 1978 से आपसी वर्चस्व में खूनी धारा की शुरुआत हुई और इस अंतहीन हत्या के दौर में अब तक तीन दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

    सिंदूर धूलने व कोख उजड़ने का दर्द यहां कण-कण में बसा है। अस्सी के दशक से दो गुटों के बीच हत्या का सिलसिला शुरू हुआ, जो हाल के वर्षों से विराम की स्थिति में है।

    रिंटू सिंह व मलय सिंह हत्याकांड में भी हो चुकी है सजा

    सात जुलाई को न्यायालय ने सरसी के बेनी सिंह हत्या मामले में पुंकेश सिंह एवं कंगना सिंह को आजीवन कैद की सजा सुनाई। सात नवंबर 2020 को दिनदहाड़े सरसी गांव में बेनी सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।इस घटना से आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था।

    हमलावरों की गिरफ्तारी करने को लेकर मृतक के परिजनों ने शव को पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर रहे थे।तत्कालीन एसपी विशाल शर्मा के सरसी गांव पहुंचने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया था। मृतक के भाई के थाना में आवेदन देने के बाद हत्या मामले में कुल छह लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया था।

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    12 नवंबर 2021 को पूर्व जिला परिषद सदस्य रिंटू सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें उनकी पत्नी जिला परिषद सदस्य अनुलिका सिंह के बयान पर सुदेश सिंह और आशीष सिंह उर्फ अटिया एवं चार अन्य पर हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

    30 सितंबर 2024 को एडीजे द्वितीय कोर्ट ने इस हत्याकांड में सुदेश सिंह और आशीष सिंह उर्फ अटिया को दोषी करार दिया है।कोर्ट ने चार लोगों को निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया। इस मामले में मृतक की पत्नी ने राजनीतिक रंजिश के कारण हत्या की बात कही थी।

    जिला परिषद सदस्य अनुलिका सिंह ने सरसी थाने में कांड संख्या 158/21 के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी थी। पांच सितंबर 2008 फोर्ड कंपनी चौक के निकट दिन के तीन बजे दिनदहाड़े बाइक सवार मलय सिंह को रोककर उसके सिर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

    इस हत्या को लेकर मलय सिंह की मां प्रमिला देवी ने केहाट थाने में कांड सं. 352/08 के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी थी। चर्चित मलय सिंह हत्याकांड में अदालत ने पांच लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। न्यायालय ने अलग से दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

    इस मामले में 24 सितंबर 2024 को पूर्णिया कोर्ट के द्वितीय अपर जिला व सत्र न्यायाधीश ने सरसी निवासी बिट्टू सिंह उर्फ अनिकेत सिंह, बजरंगी सिंह, करकू सिंह, रमन सिंह और विक्की सिंह को हत्या का दोषी मानकर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

    मलय सिंह अपनी मां को मोटरसाइकिल पर लेकर इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहा था। अपराधियों द्वारा मां को मोटरसाइकिल से उतार कर किनारे कर दिया गया और मलय सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बेटे की हत्या की प्रत्यक्षदर्शी मां ने मामला दर्ज कराते हुए पांच लोगों को नामजद किया था।