खूनी होने लगा SH 77 का सफर, कटिहार-फारबिसगंज पथ पर झाड़ियों में छिपे संकेतक और तीखे मोड़
कटिहार के कुरसेला से अररिया के फारबिसगंज को जोड़ने वाली एसएच 77 सड़क खूनी होती जा रही है, जहां झाड़ियों में छिपे संकेतक और तीखे मोड़ हादसों का कारण बन ...और पढ़ें

झाड़ियों में छिपे संकेतक और तीखे मोड़
HighLights
एसएच 77 पर सड़क हादसों में लगातार वृद्धि।
झाड़ियों में छिपे संकेतक और तीखे मोड़।
कटिहार-फारबिसगंज मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव।
जागरण संवाददाता, पूर्णिया। कटिहार के कुरसेला से अररिया के फारबिसगंज को जोड़ने वाली एस एच 77 का चेहरा खूनी होने लगा है। इस पथ पर सड़क हादसों की बढ़ी रफ्तार के चलते हर गुजरने वालों का मन विभिन्न आशंकाओं से भरा रहता है। एक साथ तीन से चार जान भी हादसे में जाती रही है। यह स्थिति बेजा भी नहीं है। इस पथ पर लगे संकेतकों का अता-पता भी नहीं चल पाता है।
संकेतकों को झाड़ियां निगल चुकी है। इन झाड़ियों के बीच ही सड़क किनारे बस्तियां भी छुपी हुई है। तीखे मोड़ तक का पता भी वाहन चालकों को वहां पहुंचकर ही हो पाता है।
दस किलोमीटर लंबाई में खूब होते हैं हादसे
खासकर जिले में मीरगंज से सरसी के बीच लगभग दस किलोमीटर लंबाई में यह पथ अक्सर लोगों के खून से लाल होता है। इस बीच में सड़क पर अच्छी हरियाली भी है और लोगों को सफर में काफी आनंद भी मिलता है। देखरेख के अभाव में यह हरियाली भी कुरुप होने लगा है।
वृक्षों की डालियों पर लताओं का बोझ बढ़ चुका है। झाड़ियां पसर चुकी है। वाहन चालकों को सजग करने वाला संकेतक इन झाड़ियों में गुम हो चुका है। और तो और तीखे मोड़ तक का एहसास लोगों को वहां पहुंचकर हो पाता है।
तीन दिन पहले 4 लोगों की मौत
इसी तरह सड़क किनारे अवैध रुप से बसे टोले भी दूर से नहीं दिखाई देते हैं। इस चलते वाहनों की रफ्तार के बीच अचानक बच्चे, मवेशी या फिर अन्य किसी व्यक्ति के आ जाने से अक्सर दुर्घटनाएं होती है और लोगों की जान भी जाती है।
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तीन दिन पूर्व ही एक साथ तीन लोगों की मौत व उसी रात एक मासूम की मौत भी इस दूरी के बीच ही हुई थी। इसके अलावा गत एक साल में सरसी व मीरगंज के बीच लगभग दो दर्जन लोगों की जान जा चुकी है।
वाहनों का रहता है भारी दबाव
इस पथ पर वाहनों का भारी दबाव रहता है। नेपाल से आयात व फिर निर्यात होने वाली सामग्रियों से लदे अधिकांश मालवाहक वाहनों का आवागमन भी इसी पथ से होता है। इसके अलावा पूर्णिया के पश्चिमी इलाकों के साथ-साथ कोसी के जिलों में बालू व गिट्टी लदे वाहन भी इसी रास्ते से जाते हैं।
यह इलाके के लिए भी अति महत्वपूर्ण सड़क बन चुका है। इससे प्रखंड मुख्यालय सहित जिला मुख्यालय आने-जाने वाले वाहनों का अलग दबाव है। स्थानीय स्तर पर भी हाट-बाजार सड़क के किनारे होने से लोगों की आवाजाही ज्यादा होती है।