Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बिहार: KCC लोन में देरी करना बैंक मैनेजर को पड़ा भारी, उपभोक्ता फोरम ने लगाया ₹30 हजार का जुर्माना

    Updated: Tue, 21 Jul 2026 05:35 PM (GMT+05:30)

    सासाराम में जिला उपभोक्ता आयोग ने किसान क्रेडिट कार्ड ऋण में देरी के मामले में कॉरपोरेशन बैंक (वर्तमान यूनियन बैंक) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और जोनल म ...और पढ़ें

    सांकेतिक तस्वीर

    सांकेतिक तस्वीर

    HighLights

    1. उपभोक्ता आयोग ने बैंक मैनेजर पर ₹30,000 का जुर्माना लगाया।

    2. किसान क्रेडिट कार्ड लोन देने में देरी पर फैसला सुनाया।

    3. बैंक को सेवा में कमी का दोषी पाया गया।

    जागरण संवाददाता, सासाराम। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने केसीसी ऋण अस्वीकृति मामले में लगभग छह वर्ष बाद फैसला सुनाते हुए कॉरपोरेशन बैंक (वर्तमान यूनियन बैंक) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक कृष्णा कुमार व बैंक के जोनल महाप्रबंधक पर तीस हजार का जुर्माना लगाया है।

    आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि बैंक अधिकारी 60 दिनों के भीतर परिवादी को उक्त जुर्माना राशि अदा करें, अन्यथा वास्तविक भुगतान तिथि तक इस राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा।

    रिकॉर्ड जमा करने का बाद भी नहीं मिला लोन

    रोहतास जिले के करगहर थाना क्षेत्र अंतर्गत सोनी गांव निवासी शिव शंकर तिवारी द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड के लिए सासाराम के कचहरी स्थित कारपोरेशन बैंक (वर्तमान यूनियन बैंक) की शाखा में एक आवेदन दिया गया था।

    बैंक प्रबंधक के निर्देशानुसार किसान ने ऋण के लिए सभी जरूरी दस्तावेज बैंक में जमा किए तथा बैंक द्वारा विभिन्न शुल्कों के रूप में कुल 7560 रुपये की राशि भी जमा कराई गई, किसान को ऋण उपलब्ध नहीं कराया गया।

    खबरें और भी

    पीड़ित किसान का आरोप है कि जमीन जांच, दस्तावेज और शुल्क जमा होने के बावजूद तत्कालीन बैंक प्रबंधक ने ऋण स्वीकृत करने के एवज में 40 हजार रुपये अतिरिक्त राशि की मांग की थी।

    किसान ने जब उक्त राशि देने से इनकार किया, तो बैंक प्रबंधक ने दुर्भावनापूर्ण रवैया अपनाते हुए लगभग दो वर्षों तक मामले को लटकाए रखा। जिससे किसान को शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक रूप से परेशानी उठानी पड़ी।

    छह साल बाद आयोग का फैसला

    बैंक प्रबंधक के मनमाने रवैए से परेशान होकर किसान ने जब वर्ष 2019 में न्याय के लिए जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया तो लंबी सुनवाई और परिवादी की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य के आधार पर जिला उपभोक्ता फोरम ने बैंकिंग सेवा में कमी पाते हुए किसान के पक्ष में फैसला सुनाया है।

    आयोग ने परिवादी को हुई शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक क्षति के साथ-साथ वाद खर्च हेतु एकमुश्त 30 हजार अदा करने का आदेश दिया है।

    यह भी पढ़ें- फेसबुक पर डील, टेस्ट ड्राइव में चोरी: 24 घंटे में जमुई पुलिस ने दबोचा स्कॉर्पियो चुराने वाला शातिर

    यह भी पढ़ें- दरभंगा में दहेज के लिए मार डाला या 'जहर खुद खाया' दरभंगा में शाहीना की मौत पर सवाल