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    Chaitra Navratri 2026: नौ दिन की होगी चैत्र नवरात्रि, जानें तिथि और कलश स्थापना मुहूर्त

    Updated: Sat, 14 Mar 2026 03:15 PM (IST)

    Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 19 मार्च को कलश स्थापना के साथ शुरू होगी, जो 28 मार्च को विजयादशमी पर समाप्त होगी। इसी दिन नवसंवत्सर 2083 और हिं ...और पढ़ें

    कलश स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र का शुभारंभ

    कलश स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र का शुभारंभ 

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    राम अवतार चौधरी, डेहरी-ऑन-सोन(रोहतास)। Kalash Sthapana Muhurat & Hindu New Year चैत्र माह में आने वाला वासंती पर्व श्रद्धालुओं के लिए खास महत्व रखता है। इस वर्ष 19 मार्च को कलश स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र का शुभारंभ होगा। इसी दिन से सनातन परंपरा के अनुसार नवसंवत्सर 2083 यानी हिंदू नववर्ष की भी शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार नवरात्र शुभ योग और नक्षत्र में प्रारंभ हो रहा है। नौ दिनों तक श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर उपवास और पूजा-अर्चना करेंगे। नवरात्र का समापन 28 मार्च को विजयादशमी के साथ होगा।

    नवसंवत्सर 2083 के राजा बृहस्पति, मंत्री मंगल

    जागृति फाउंडेशन कटार के ज्योतिष आचार्य अनुज मिश्रा ने पंचांगों के हवाले से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष नवसंवत्सर 2083 के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल होंगे।

    चैत्र नवरात्र उत्तर भाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग में शुरू होगा। नवरात्र को सकारात्मक ऊर्जा और आत्मशुद्धि का पर्व माना जाता है।

    श्रद्धालु इस दौरान दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और बीज मंत्र का पाठ करेंगे। पूरे नौ दिन देवी के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी।

    27 मार्च को महानवमी, रामनवमी भी उसी दिन

    चैत्र शुक्ल नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन पुनर्वसु के बाद पुष्य नक्षत्र के सुयोग में महानवमी का पर्व होगा।

    श्रद्धालु मां दुर्गा के नौवें स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा करेंगे। इसी दिन रामनवमी का व्रत, ध्वज पूजन और शोभायात्रा निकलेगी।

    मंदिरों और घरों में भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना की जाएगी। पुष्य नक्षत्र में भूमि, वाहन और आभूषण खरीदना भी शुभ माना गया है।

    22 मार्च से शुरू होगा चैती छठ का महापर्व

    चैत्र शुक्ल चतुर्थी 22 मार्च से चैती छठ का पर्व शुरू होगा। इस दिन व्रती नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय व्रत का संकल्प लेंगी।

    23 मार्च को खरना के साथ 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होगा। 24 मार्च को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

    25 मार्च को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होगा। इस पर्व में सूर्य उपासना और छठी मैया की आराधना की जाती है।

    नौ दिनों में नौ रूपों की विशेष पूजा

    चैत्र नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। माता शैलपुत्री को पीले रंग से, ब्रह्मचारिणी को हरे रंग से पूजा जाता है।

    देवी चंद्रघंटा, कुष्मांडा और स्कंदमाता की विशेष आराधना होती है। इसके बाद कात्यायनी, कालरात्रि और महागौरी की पूजा की जाती है।

    अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री को बैंगनी रंग के वस्त्र और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु इस दौरान हवन, कन्या पूजन और दुर्गा पाठ भी करते हैं।

    डेहरी के मंदिरों में होंगे विशेष आयोजन

    चैत्र नवरात्र के दौरान शहर और गांवों के मंदिरों में विशेष पूजा होगी। स्टेशन रोड दुर्गा मंदिर, काली कला मंदिर पाली और बारह पत्थर मंदिर में कार्यक्रम होंगे।

    इसके अलावा अप्सरा रोड दुर्गा मंदिर और मानिकपुर काली मंदिर में भी आयोजन होगा। मंदिरों में कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ और सामूहिक हवन होगा।

    कन्या पूजन और हनुमत ध्वज की स्थापना भी विधि-विधान से की जाएगी। नवरात्र को लेकर मंदिर समितियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त

    प्रतिपदा तिथि 19 मार्च सुबह 06:51 बजे से प्रारंभ होगी। गुली काल मुहूर्त सुबह 09:06 से 10:33 बजे तक रहेगा।

    अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:38 से 12:24 बजे तक रहेगा। चर, लाभ और अमृत मुहूर्त सुबह 10:33 से दोपहर 02:57 बजे तक रहेगा।

    इन शुभ मुहूर्तों में कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसी के साथ पूरे देश में चैत्र नवरात्र और हिंदू नववर्ष का उत्सव शुरू हो जाएगा।

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