111 करोड़ का प्रोजेक्ट, 36 KM ट्रैक: डेहरी-बंजारी रेल लाइन को मिली नई रफ्तार; रेल मंत्रालय का बड़ा फैसला
चार दशक से बंद डेहरी-बंजारी रेलखंड पर ट्रेनें फिर से चलने की उम्मीद जगी है। रेलवे ने पहले चरण में 36.4 किलोमीटर रेल लाइन निर्माण को मंजूरी दी है, जिस ...और पढ़ें

डेहरी-बंजारी खंड पर फिर चलेगी ट्रेन। प्रतीकात्मक फोटो
प्रेम कुमार पाठक, डेहरी ऑन सोन (रोहतास)। करीब चार दशक से बंद पड़ी डेहरी-बंजारी रेलखंड पर एक बार फिर ट्रेन चलने की उम्मीद जगी है।
रेलवे ने इस परियोजना को पुनर्जीवित करते हुए पहले चरण में 36.4 किलोमीटर रेल लाइन निर्माण की योजना को मंजूरी दी है। इस पर लगभग 1 अरब 11 करोड़ 20 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
अब तक सर्वे और अन्य प्रारंभिक कार्यों पर 7 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। वहीं चालू वित्तीय वर्ष में पुनः सर्वे के लिए 0.06 करोड़ रुपये की स्वीकृति केंद्र सरकार के बजट में दी गई है।
कभी औद्योगिक लाइफलाइन थी यह रेल लाइन
चार दशक पहले डेहरी-रोहतास लाइट रेलवे लाइन पर ट्रामवे कंपनी द्वारा रेल परिचालन किया जाता था। यह कंपनी डालमियानगर स्थित रोहतास इंडस्ट्री की सहायक इकाई थी।
इस रेलमार्ग का निर्माण मुख्य रूप से उद्योगों के लिए किया गया था, जिसके जरिए कच्चा माल, सीमेंट फैक्ट्री के लिए चूना पत्थर और कागज उद्योग हेतु जंगलों से बांस चुटिया-पिपरडीह तक लाया जाता था।
बाद में ट्रामवे कंपनी का नाम बदलकर रोहतास लाइट रेलवे कंपनी कर दिया गया। कर्मचारियों की सुविधा के लिए यात्री गाड़ियों का भी संचालन शुरू किया गया था।
लंबे समय तक ठंडे बस्ते में रही योजना
रेल मंत्रालय ने 2008 में इस रेलखंड को फिर से शुरू करने की घोषणा की थी और बजट में इसका प्रावधान भी किया गया।
मार्च 2016 तक 3.66 करोड़ रुपये, वर्ष 2016-17 में 3.56 करोड़ और 2017-18 में 1.50 करोड़ रुपये सर्वे कार्य पर खर्च किए गए।
इसके बाद योजना की गति धीमी पड़ गई और कई वर्षों तक बजट में केवल प्रतीकात्मक राशि (एक हजार रुपये) ही रखी जाती रही।
वर्ष 2024 में “टीम डेहरियांस” के अध्यक्ष चंदन कुमार ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रेल मंत्री को ज्ञापन भेजकर इस परियोजना को फिर से गति देने की मांग की, जिसके बाद अब इसे मंजूरी मिली है।
1911 में हुई थी शुरुआत
डेहरी-रोहतास लाइट रेलवे (DRLR) की शुरुआत वर्ष 1911 में हुई थी। 1913-14 तक इस रेलमार्ग पर 50 हजार से अधिक यात्री सफर कर रहे थे और 90 हजार टन से ज्यादा माल की ढुलाई होती थी।
वर्ष 1927 में इस लाइन का विस्तार रोहतास से रोहतासगढ़ किला तक किया गया, जबकि बाद में इसे 25 किलोमीटर आगे पिपरडीह तक बढ़ाया गया।
पर्यटन और उद्योग को मिलेगा नया जीवन
इस रेल लाइन के दोबारा शुरू होने से न केवल खनिज संसाधनों की ढुलाई आसान होगी, बल्कि क्षेत्र के पर्यटन को भी नया आयाम मिलेगा।
इससे रोहतासगढ़ किला, रोहितेश्वर मंदिर, तुतला भवानी, कशिश वाटर फॉल, महादेव खोह और दशशीशानाथ महादेव मंदिर जैसे ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी।
इस परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में रोजगार, व्यापार और पर्यटन—तीनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।