Saharsa News: स्कूल के मिड-डे मील में सांप का बच्चा मिलने पर बड़ा एक्शन, प्रिंसिपल समेत 12 लोगों पर केस दर्ज
सहरसा के बलुआहा स्कूल में मध्याह्न भोजन में सांप का बच्चा मिलने और 250 बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में 12 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। ...और पढ़ें

स्कूल के मिड-डे मील में सांप का बच्चा मिलने पर बड़ा एक्शन (AI Generated Image)
HighLights
मध्याह्न भोजन में सांप का बच्चा मिलने से हड़कंप।
250 बच्चों के बीमार होने पर 12 पर केस।
प्रधानाध्यापक, शिक्षक, एनजीओ संचालक, रसोइये आरोपी।
जागरण टीम, सहरसा। जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देश पर बीईओ सह बीडीओ भरत कुमार द्वारा महिषी थाना में म.वि. बलुआहा मध्यान भोजन गड़बड़ी मामले 12 लोगों पर केस दर्ज करवाया गया।
मिली जानकारी के अनुसार. विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अनुपमा कुमारी व एक सहायक शिक्षक, एनजीओ संचालक अनूप मिश्र व विद्यालय में कार्यरत नौ रसोईयों पर केस दर्ज करवाया गया है।
हालांकि, प्रखंड के सभी विद्यालयों में मध्याह्न भोजन की देखरेख के लिए सरकार द्वारा प्रतिनियुक्त प्रखंड मध्याह्न भोजन प्रभारी पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर लोग सवाल उठा रहे हैं।
इस संबंध में थानाध्यक्ष प्रभाकर भारती ने बताया कि बीडीओ द्वारा प्राप्त आवेदन के आलोक में केस दर्ज कर अग्रेत्तर कार्रवाई की जा रही है।
250 बच्चे हो गए थे बीमार
ज्ञात हो कि गुरुवार को म.वि. बलुआहा में डॉ. भीमराव आंबेडकर दलित उत्थान संस्थान नामक एनजीओ द्वारा मध्यान भोजन के लिए जो खाना विद्यालय भेजा गया, उसमें सांप का बच्चा मरा हुआ पाया गया था, जिस विषाक्त भोजन को खाने के बाद विद्यालय के करीब 250 बच्चे बीमार हो गए थे।
एनजीओ के परोसे जाने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
विभागीय निर्देश के मुताबिक, एनजीओ द्वारा गुरुवार को स्कूली बच्चों को चावल और हरी सब्जी युक्त मिश्रित दाल देने का मैन्यू था। जब महिषी स्थित स्कूल के खाना का फोटो सामने आया और वहां देखा गया तो मिश्रित की जगह बिना मिश्रित दाल था। चावल और सिर्फ प्लेन दाल दिया गया था।
मिश्रित हरी सब्जी का कहीं नामो निशान तक बच्चों के प्लेट में नहीं दिख रहा था। वहीं, इसको लेकर स्कूल प्रधानाचार्य की निगरानी भी शक के दायरे में है। अगर मैन्यू के अनुसार खाना नहीं दिया जाता है तो इसकी शिकायत अधिकारियों तक क्यों नहीं की जाती है।
एनजीओ के द्वारा जगह-जगह पर बने किचन से स्कूल तक खाना पहुंचाने के लिए बंद गाड़ी का इस्तेमाल का नियम है, लेकिन यहां ऑटो पर प्लास्टिक से ढककर खाना को स्कूलों तक पहुंचाया जाता है जो नियम की अवहेलना है और इससे खाना में विषाक्त जीव या वस्तु जाने की आशंका बनी रहती है। कई बार इस तरह का मामला सामने आने के बाद भी बंद वाहन का प्रयोग नहीं किया जाता है।