बिहार पंचायत चुनाव: रिजर्वेशन की आहट से राजनीति गरमायी, सहरसा के 8 पंचायतों में बदलेगा चुनावी समीकरण
सत्तरकटैया प्रखंड में 2026 पंचायत चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। ...और पढ़ें

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)
HighLights
सत्तरकटैया में 2026 पंचायत चुनाव की राजनीति गरमाई।
आठ पंचायतों में आरक्षण रोस्टर बदलने की चर्चा तेज।
संभावित उम्मीदवारों के राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ेगा।
संवाद सूत्र, सत्तरकटैया (सहरसा)। पंचायत चुनाव 2026 को लेकर सत्तरकटैया प्रखंड की राजनीति अभी से पूरी तरह गरमा गई है।
प्रखंड की आठ पंचायतों के आरक्षित होने की चर्चा ने संभावित उम्मीदवारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि इस बार कई पंचायतों का आरक्षण रोस्टर बदलने वाला है।
आरक्षण की संभावित सूची सामने आने की चर्चाओं के बीच कई दावेदारों के राजनीतिक सपनों पर पानी फिरने की आशंका जताई जा रही है।
असमंजस की स्थिति
वर्षों से चुनावी तैयारी में जुटे कई संभावित प्रत्याशी अब असमंजस की स्थिति में हैं। कुछ उम्मीदवार अपने वर्ग के लिए सीट आरक्षित होने की उम्मीद में उत्साहित नजर आ रहे हैं, तो कई दावेदार चुप्पी साधे अंदर ही अंदर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं।
गांव की चौपालों, चाय दुकानों और चौक-चौराहों पर इन दिनों सबसे अधिक चर्चा पंचायत चुनाव और आरक्षण रोस्टर को लेकर ही हो रही है। कौन सी पंचायत किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी, किसका टिकट कटेगा और किसकी राजनीतिक किस्मत चमकेगी। इन सवालों ने ग्रामीण राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरक्षण रोस्टर लागू होने के बाद कई पुराने चेहरे चुनावी मैदान से बाहर हो सकते हैं, जबकि नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
इसी कारण संभावित उम्मीदवार अभी से मतदाताओं के बीच सक्रियता बढ़ाने, सामाजिक समीकरण साधने और अपने समर्थन आधार को मजबूत करने में जुट गए हैं।
पंचायत चुनाव को लेकर बढ़ती सरगर्मी के बीच अब सभी की नजर प्रशासन द्वारा जारी होने वाली आधिकारिक आरक्षण सूची पर टिकी है। सूची जारी होते ही सत्तरकटैया की पंचायत राजनीति में कई नए समीकरण बनने और पुराने समीकरण टूटने की संभावना जताई जा रही है।