सहरसा में मॉडल स्कूल की शिलापट्ट से जमीनदाता का नाम गायब: JDU ने किया विरोध, वंशजों ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी
सहरसा के सत्तरकटैया स्थित प्रियव्रत उच्च विद्यालय को मॉडल स्कूल का दर्जा मिलने के बाद उसके शिलापट्ट पर वास्तविक नाम न होने से विवाद खड़ा हो गया है। जम ...और पढ़ें

मॉडल स्कूल की शिलापट्ट। फोटो जागरण
HighLights
मॉडल स्कूल के शिलापट्ट पर वास्तविक नाम नहीं।
जमीनदाता परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश।
नाम न सुधरने पर आंदोलन व न्यायालय जाने की चेतावनी।
संवाद सूत्र, सत्तरकटैया (सहरसा)। प्रखंड मुख्यालय स्थित प्रियव्रत उच्च विद्यालय, पंचगछिया को मॉडल स्कूल का दर्जा मिलने से क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर थी, लेकिन उद्घाटन के साथ ही यह खुशी उस समय नाराजगी में बदल गई, जब विद्यालय परिसर में शिक्षा विभाग द्वारा लगाए गए शिलापट्ट पर विद्यालय का वास्तविक नाम ही अंकित नहीं मिला।
शिलापट्ट पर 'सरस्वती विद्या निकेतन आदर्श विद्यालय, सत्तरकटैया' अंकित है, जबकि कहीं भी प्रियव्रत उच्च विद्यालय, पंचगछिया का उल्लेख नहीं किया गया है। इसे लेकर जमीन दाता परिवार सहित स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
मामले की जानकारी मिलते ही जमीन दाता परिवार के वंशज प्रीतेश सिंह सोनू और ज्ञानेन्द्र नारायण सिंह के नेतृत्व में स्थानीय लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल विद्यालय पहुंचा।
प्रतिनिधिमंडल में जिला जदयू उपाध्यक्ष सह जिला प्रवक्ता भीम नारायण महतो, दिलीप सिंह, अनील सिंह, शंभू सिंह, शारदानंद सिंह, रत्न सिंह, मुखिया राजकुमार चौधरी , ब्रजेश महतो, लक्ष्मी राय सहित अन्य लोग शामिल थे। सभी ने विद्यालय के प्राचार्य विवेकानंद सिंह से मुलाकात कर इस संबंध में विस्तृत जानकारी ली।
अदालत जाने की चेतावनी
प्राचार्य ने बताया कि शिलापट्ट शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार लगाया गया है। हालांकि इस जवाब से स्थानीय लोग संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना है कि वर्षों पुराने विद्यालय की पहचान और उसके इतिहास की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
जमीन दाता परिवार और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही शिलापट्ट में आवश्यक संशोधन कर विद्यालय का वास्तविक नाम अंकित नहीं किया गया, तो वे व्यापक जनआंदोलन शुरु करेंगे।
साथ ही, न्यायालय की शरण लेने की भी बात कही है। इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज है और लोग शिक्षा विभाग से जल्द उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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