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    बिहार में शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लागू, स्कूलों में जींस-टीशर्ट पहनकर आने पर रोक

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 04:12 PM (IST)

    बिहार के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मियों के लिए अब औपचारिक वेशभूषा अनिवार्य कर दी गई है। शिक्षा विभाग ने अनुशासन और सकारात्मक श ...और पढ़ें

    एआई जनरेटेड फोटो

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    HighLights

    1. शिक्षकों को ड्यूटी के दौरान औपचारिक वेशभूषा में रहना होगा।

    2. जींस, टी-शर्ट जैसे अनौपचारिक परिधानों पर प्रतिबंध लगाया गया।

    3. अनुशासन और सकारात्मक शैक्षणिक माहौल बनाने का उद्देश्य है।

    संवाददाता, सुपौल। सरकारी विद्यालयों में अब शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मियों को ड्यूटी के दौरान औपचारिक वेशभूषा (फार्मल ड्रेस) में ही उपस्थित होना होगा। विद्यालयों की गरिमा, अनुशासन और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने यह व्यवस्था लागू की है।

    इसके तहत विद्यालय और कार्यालय अवधि में जींस, टी-शर्ट तथा अन्य अनौपचारिक परिधानों के उपयोग से परहेज करना होगा। इस संबंध में शिक्षा विभाग के निदेशक ने सुपौल समेत सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।

    ड्रेस कोड सख्ती से लागू करने की मांग 

    निर्देश के आलोक में जिला शिक्षा पदाधिकारी संग्राम सिंह ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों और विद्यालय प्रधानों को इसका सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है।

    जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी विद्यालय और कार्यालय अवधि में गरिमापूर्ण औपचारिक वेशभूषा में ही उपस्थित हों। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार की अमर्यादित अथवा शैक्षणिक गरिमा के प्रतिकूल गतिविधि संचालित न हो।

    छात्रों पर पड़ता है शिक्षकों का प्रभाव

    शिक्षा विभाग के इस निर्णय को जिले में सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। अभिभावकों और आम लोगों का कहना है कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार निर्माण की भी पाठशाला है।

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    शिक्षक विद्यार्थियों के लिए आदर्श होते हैं। ऐसे में उनका पहनावा, व्यवहार और कार्यशैली बच्चों के व्यक्तित्व पर सीधा प्रभाव डालता है। औपचारिक वेशभूषा अनुशासन, जिम्मेदारी और पेशेवर कार्य संस्कृति का संदेश देता है, जिससे विद्यार्थियों में शिक्षकों के प्रति सम्मान और विश्वास भी बढ़ता है।

    गुरु परंपरा को पहुंचा नुकसान

    उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में जिले के कुछ विद्यालयों में शिक्षकों के बीच विवाद, मारपीट और अभद्र व्यवहार की घटनाएं भी सामने आई थीं। इन घटनाओं से विद्यालयों का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हुआ और विद्यार्थियों के बीच शिक्षकों की छवि पर भी असर पड़ा।

    ऐसे में विभाग की नई पहल को विद्यालयों में अनुशासन और गरिमा बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लोगों को उम्मीद है कि इससे गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को नया बल मिलेगा और विद्यालयों का शैक्षणिक वातावरण अधिक सकारात्मक बनेगा।

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