कोसी क्षेत्र में अब सीप से चमकेंगे मोती, मत्स्य विभाग की पहल; ट्रेनिंग व सब्सिडी से बदलेंगे बिहार के किसानों के दिन
सहरसा में मत्स्य विभाग ने कोसी क्षेत्र में सीप से मोती उत्पादन की नई योजना शुरू की है। किसानों को प्रशिक्षण और 60% सरकारी सब्सिडी मिलेगी, जिससे वे लाख ...और पढ़ें
-1782910369632_m.webp)
सहरसा में सीप से मोती उगाने की तैयारी, मत्स्य विभाग देगा 60 फीसदी अनुदान; ट्रेनिंग लेकर किसान कमाएंगे बंपर मुनाफा
HighLights
सहरसा में सीप से मोती उत्पादन की नई योजना शुरू।
किसानों को मोती उत्पादन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
योजना में 60 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी का प्रावधान है।
जागरण संवाददाता, सहरसा। बिहार के सहरसा जिले में मत्स्य विभाग ने पारंपरिक मत्स्य पालन से आगे बढ़कर एक नई और बेहद मुनाफेदार योजना पर काम शुरू किया है। कोसी क्षेत्र के मीठे पानी में अब सीप के जरिए कीमती मोतियों का उत्पादन किया जाएगा। इस वर्ष प्रायोगिक (ट्रायल) तौर पर जिले के दो प्रगतिशील लाभार्थियों का इस विशेष योजना के लिए चयन किया जा रहा है।
सीपों की सर्जरी के लिए किसानों को दिया प्रशिक्षण
मोती उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा सीपों की सर्जरी करने और उनकी देखभाल करने का विशेष प्रशिक्षण भी किसानों को दिया जा रहा है। सीप अपनी प्राकृतिक प्रक्रिया के तहत करीब 12 से 18 महीने के भीतर चमकीले मोती का निर्माण करती है। इस आधुनिक खेती को अपनाकर क्षेत्र के किसान लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।
लागत पर 60 प्रतिशत सरकारी सब्सिडी देगी सरकार
मत्स्य विभाग ने मोती उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कुल लागत मूल्य पर 60 प्रतिशत अनुदान (सब्सिडी) देने का प्रावधान किया है। जानकारों के अनुसार, एक हेक्टेयर तालाब में करीब 20 से 30 हजार सीपों का पालन आसानी से किया जा सकता है। यदि इसमें से 60 से 70 फीसदी सीप भी जीवित रह जाती हैं, तो आराम से 12 से 18 हजार मोतियों का उत्पादन होगा।

डिजाइनर और गोल मोती से होगी लाखों की कमाई
इस तकनीक में आकर्षक डिजाइनर मोती 12 से 13 महीने में और पूरी तरह गोल मोती 18 से 24 महीने में तैयार हो जाते हैं। इससे उत्पादक किसान एक हेक्टेयर के तालाब से सालाना 10 से 20 लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं। सहरसा मत्स्य विभाग ने इस साल आधा-आधा एकड़ के दो अलग-अलग तालाबों में मोती उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा है।
खबरें और भी
आधा एकड़ के प्रोजेक्ट के लिए तय हुआ इतना बजट
विभाग ने आधा एकड़ में मोती उत्पादन के लिए कुल 2 लाख 24 हजार 600 रुपये का लागत मूल्य निर्धारित किया है। इसपर प्रति यूनिट 60 प्रतिशत यानी करीब 1 लाख 32 हजार रुपये का सरकारी अनुदान दिया जाएगा। इस वर्ष मिलने वाली सफलता और नतीजों के आधार पर अगले साल इस योजना का बड़े पैमाने पर विस्तार करने की रणनीति बनाई जाएगी।
जिले में प्रायोगिक तौर पर इस वर्ष दो तालाबों में मोती का उत्पादन शुरू किया जा रहा है। इसके लिए चयनित किसानों को सरकारी अनुदान का लाभ मिलेगा। इसकी सफलता के आधार पर आने वाले दिनों में मोती उत्पादन का लक्ष्य और बढ़ाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिल सके।
जयप्रकाश सिंह, जिला मत्स्य पदाधिकारी, सहरसा