Saharsa Tender Scam : रिशुश्री से जुड़ी चार कंपनियों को नगर निगम से मिले 29.63 करोड़ के टेंडर
बिहार में चर्चित रिशुश्री टेंडर घोटाले की जांच अब सहरसा नगर निगम तक पहुंच गई है। विशेष निगरानी इकाई ने निगम से 29.63 करोड़ रुपये के टेंडरों से जुड़े द ...और पढ़ें

रिशुश्री टेंडर घोटाले की आंच सहरसा तक, निगरानी विभाग ने खंगाले नगर निगम के रिकॉर्ड
HighLights
रिशुश्री टेंडर घोटाले की जांच सहरसा नगर निगम तक पहुंची।
विशेष निगरानी इकाई ने 29.63 करोड़ के टेंडर दस्तावेज जब्त किए।
हाईमास्ट लाइट, डस्टबिन खरीद में अनियमितताओं की पड़ताल।
जागरण संवाददाता, सहरसा। बिहार में चर्चित रिशुश्री टेंडर घोटाले की जांच अब सहरसा नगर निगम तक पहुंच गई है। घोटाले से जुड़े मामलों की जांच कर रही विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) की टीम ने मंगलवार को नगर निगम पहुंचकर विभिन्न टेंडरों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नगर निगम में हुए टेंडरों के आवंटन, सामग्री की खरीद और भुगतान प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता तो नहीं हुई।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि रिशुश्री से जुड़ी चार कंपनियों को सहरसा नगर निगम में करीब 29 करोड़ 63 लाख 13 हजार रुपये के विभिन्न कार्यों और सामग्री आपूर्ति से संबंधित टेंडर मिले थे। इनमें हाईमास्ट लाइट लगाने, डस्टबिन उपलब्ध कराने, ट्राई साइकिल रिक्शा की खरीद और शहरी क्षेत्र में लगाए गए लाइट व कैमरों के रखरखाव जैसे कार्य शामिल हैं।
निगरानी विभाग ने मांगे टेंडर से जुड़े रिकॉर्ड
सूत्रों के अनुसार पटना से पहुंची विशेष निगरानी विभाग की टीम ने नगर निगम कार्यालय में संबंधित फाइलों और दस्तावेजों की जांच की। अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया, कार्य आवंटन, भुगतान और सामग्री आपूर्ति से जुड़े अभिलेखों को खंगाला।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि संबंधित कंपनियों को किस प्रक्रिया के तहत काम आवंटित किया गया और क्या टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया गया था। साथ ही जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से हुए आवंटन की भी पड़ताल की जा रही है।
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चार कंपनियों को मिले थे करोड़ों के काम
जानकारी के मुताबिक पैंथर यूनिट इंटरप्राइजेज, अरबन सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, रीताश्री इंटरप्राइजेज और रिलाइवल इंटरप्राइजेज को नगर निगम की विभिन्न योजनाओं के तहत काम मिला था।
इन कंपनियों को हाईमास्ट लाइट लगाने, अलग-अलग क्षमता के डस्टबिन उपलब्ध कराने, ट्राई साइकिल रिक्शा की आपूर्ति तथा शहरी क्षेत्र में स्थापित लाइट और कैमरों के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई थी।
हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि दस्तावेजों के विस्तृत परीक्षण के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है या नहीं।
हाईमास्ट लाइट लगाने में करोड़ों का खर्च
नगर निगम क्षेत्र में हाईमास्ट लाइट लगाने का बड़ा काम पैंथर यूनिट इंटरप्राइजेज को मिला था। कंपनी को 16 मीटर ऊंचाई वाली 50 हाईमास्ट लाइट लगाने का कार्य सौंपा गया था। इसके लिए प्रति यूनिट 7 लाख 94 हजार 900 रुपये की दर निर्धारित की गई थी।
इस मद में कुल 3 करोड़ 97 लाख 45 हजार रुपये का टेंडर स्वीकृत हुआ था। वहीं 12 मीटर ऊंचाई वाली 75 हाईमास्ट लाइट लगाने का काम भी इसी कंपनी को दिया गया था। इसके लिए प्रति यूनिट 6 लाख 94 हजार 800 रुपये की दर तय की गई थी।
इस कार्य पर कुल 5 करोड़ 21 लाख 10 हजार रुपये खर्च किए गए थे। अब जांच एजेंसियां इन दरों और कार्य की गुणवत्ता का भी परीक्षण कर सकती हैं।
डस्टबिन खरीद में भी करोड़ों का टेंडर
नगर निगम द्वारा अलग-अलग क्षमता वाले डस्टबिन और कंटेनर की खरीद के लिए भी करोड़ों रुपये के टेंडर जारी किए गए थे। 330 लीटर क्षमता वाले 1125 कंटेनरों की आपूर्ति का काम रिलाइवल इंटरप्राइजेज, पटना को दिया गया था।
प्रति कंटेनर 18 हजार 200 रुपये की दर से कुल 2 करोड़ 4 लाख 75 हजार रुपये का टेंडर स्वीकृत किया गया। वहीं 240 लीटर क्षमता वाले 1125 कंटेनरों की खरीद का कार्य रीताश्री इंटरप्राइजेज को मिला था। इस मद में 1 करोड़ 28 लाख 25 हजार रुपये का टेंडर हुआ।
छोटे और स्टील डस्टबिन की भी हुई खरीद
अरबन सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड को 10 लीटर क्षमता वाले 40 हजार डस्टबिन उपलब्ध कराने का कार्य मिला था। प्रति डस्टबिन 164.80 रुपये की दर से कुल 65 लाख 92 हजार रुपये का टेंडर स्वीकृत किया गया।
इसी कंपनी को 500 स्टेनलेस स्टील डस्टबिन की आपूर्ति का भी काम मिला था। प्रति डस्टबिन 26 हजार 675 रुपये की दर से कुल 1 करोड़ 33 लाख रुपये के करीब का टेंडर जारी किया गया था। जांच एजेंसियां अब खरीद दर, बाजार मूल्य और आपूर्ति की गुणवत्ता का मिलान कर रही हैं।
ट्राई साइकिल रिक्शा खरीद भी जांच के दायरे में
नगर निगम ने सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 200 ट्राई साइकिल रिक्शा की खरीद की थी। यह कार्य रीताश्री इंटरप्राइजेज को दिया गया था।
रिक्शा की खरीद प्रति यूनिट 48 हजार 100 रुपये की दर से की गई थी। कुल मिलाकर इस मद में 96 लाख 20 हजार रुपये का टेंडर स्वीकृत किया गया था। अब इसकी खरीद प्रक्रिया और दरों की भी जांच की जा रही है।
तीन साल के मेंटेनेंस पर 14 करोड़ से अधिक खर्च
नगर निगम क्षेत्र में लगाए गए स्ट्रीट लाइट, कैमरा और अन्य उपकरणों के रखरखाव का कार्य भी पैंथर यूनिट इंटरप्राइजेज को दिया गया था। यह अनुबंध 15 फरवरी 2025 से 14 फरवरी 2028 तक तीन वर्षों के लिए किया गया।
मेंटेनेंस कार्य के लिए कुल 14 करोड़ 21 लाख 64 हजार रुपये का टेंडर स्वीकृत किया गया था। यह राशि पूरे मामले में सबसे बड़ी मदों में शामिल है।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
रिशुश्री टेंडर घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे विभिन्न नगर निकायों में हुए टेंडरों की परतें खुल रही हैं। सहरसा नगर निगम में मिले इन टेंडरों को लेकर भी अब जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।
फिलहाल सभी की निगाहें विशेष निगरानी विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। दस्तावेजों और भुगतान रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार हुई थी या कहीं किसी स्तर पर अनियमितता बरती गई थी।