टेंडर घोटाले की जांच सहरसा नगर निगम तक, निगरानी टीम ने खंगाले दस्तावेज, रिशुश्री से जुड़ी कंपनियों की सप्लाई पर जांच
राज्य में चर्चित टेंडर घोटाले की जांच अब सहरसा नगर निगम तक पहुंच गई है, जहां विशेष निगरानी विभाग की टीम ने 2023-24 की खरीद प्रक्रियाओं से जुड़े दस्ताव ...और पढ़ें

वर्ष 2023-24 में हुई खरीद प्रक्रियाओं और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच के लिए पटना से पहुंची टीम, कई कंपनियों की भूमिका की हो रही पड़ताल।
HighLights
विशेष निगरानी टीम ने सहरसा नगर निगम की जांच की।
2023-24 की खरीद प्रक्रियाओं के दस्तावेज खंगाले गए।
टेंडर घोटाले से जुड़ी कंपनियों की भूमिका जांची जा रही।
जागरण संवाददाता, सहरसा। राज्य में चर्चित टेंडर घोटाले की जांच का दायरा अब सहरसा नगर निगम तक पहुंच गया है। मंगलवार को विशेष निगरानी विभाग की एक टीम नगर निगम कार्यालय पहुंची और वर्ष 2023 एवं 2024 के दौरान हुई विभिन्न खरीद प्रक्रियाओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। टीम ने उन कंपनियों से संबंधित अभिलेख जुटाए, जिनका नाम हाल के दिनों में चर्चा में रहे टेंडर प्रकरण से जोड़ा जा रहा है।
पटना से पहुंची विशेष निगरानी टीम के अधिकारियों की नगर निगम में मौजूदगी से पूरे दिन हलचल का माहौल बना रहा। अधिकारियों ने नगर निगम प्रशासन से टेंडर प्रक्रिया, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड, कैश बुक और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी ली। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि खरीद प्रक्रिया निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप हुई थी या नहीं।
वर्ष 2023-24 की खरीद प्रक्रियाएं जांच के दायरे में
जानकारी के अनुसार विशेष निगरानी टीम की जांच का केंद्र वर्ष 2023 और 2024 के दौरान नगर निगम में हुई विभिन्न सामग्रियों की खरीद है। उस अवधि में नगर निगम द्वारा हाईमास्ट लाइट, ट्राइसाइकिल, डस्टबिन, वेस्ट कंटेनर समेत कई उपयोगी सामग्रियों की खरीदारी की गई थी।
बताया जा रहा है कि इन खरीद प्रक्रियाओं में कुछ ऐसी कंपनियों ने भाग लिया था, जिनके नाम वर्तमान में राज्य स्तर पर चर्चा में चल रहे टेंडर मामले से जुड़े बताए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी या नहीं।
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नगर निगम से लिए गए कई महत्वपूर्ण अभिलेख
विशेष निगरानी टीम ने नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा से संबंधित फाइलें, भुगतान अभिलेख, टेंडर दस्तावेज और कैश बुक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। अधिकारियों ने इन दस्तावेजों को जांच के लिए अपने साथ लिया है।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसी यह देखना चाहती है कि निविदा प्रक्रिया के दौरान सभी नियमों का पालन किया गया था या किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई। दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जेम पोर्टल के माध्यम से हुई थी खरीदारी
नगर निगम सूत्रों के अनुसार संबंधित खरीदारी की प्रक्रिया सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से पूरी की गई थी। यह पोर्टल सरकारी खरीद में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
हालांकि राज्य स्तर पर सामने आए टेंडर मामले के बाद अब यह जांच की जा रही है कि पोर्टल के माध्यम से हुई खरीद में कहीं किसी प्रकार की तकनीकी या प्रक्रियागत अनियमितता तो नहीं हुई। जांच एजेंसी इसी पहलू को भी गंभीरता से देख रही है।
करोड़ों रुपये की खरीदारी पर केंद्रित है जांच
जानकारी के अनुसार नगर निगम में उस अवधि के दौरान 125 हाईमास्ट लाइट, 200 ट्राइसाइकिल, 330 लीटर क्षमता वाले डस्टबिन और वेस्ट कंटेनर जैसी सामग्रियों की खरीदारी की गई थी। इन योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे।
बताया जाता है कि हाईमास्ट लाइट की आपूर्ति एक कंपनी द्वारा लगभग 14 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत से की गई थी। इसके अलावा अन्य कंपनियों ने भी विभिन्न सामग्रियों की आपूर्ति की थी। इन्हीं खरीद प्रक्रियाओं और भुगतान से जुड़े तथ्यों की जांच अब निगरानी विभाग कर रहा है।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
नगर निगम में हुई खरीदारी और टेंडर प्रक्रिया को लेकर पहले भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। उस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की ओर से सामानों की कीमत और गुणवत्ता को लेकर चर्चा होती रही थी।
कई लोगों का कहना था कि कुछ सामग्रियों की खरीद अपेक्षाकृत अधिक कीमत पर की गई है। हालांकि उस समय नगर निगम प्रशासन ने सभी प्रक्रियाओं को नियमसम्मत बताया था। अब विशेष निगरानी टीम की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता हुई थी या नहीं।
पूर्व नगर आयुक्त के कार्यकाल की भी हो रही पड़ताल
जांच की कड़ी पूर्व नगर आयुक्त मुमूक्ष चौधरी के कार्यकाल तक भी पहुंचती दिख रही है। वह जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक सहरसा नगर निगम में पदस्थापित रहे थे। इसी दौरान कई महत्वपूर्ण खरीद प्रक्रियाएं संपन्न हुई थीं।
सूत्रों का कहना है कि जांच एजेंसी उस अवधि के निर्णयों, निविदाओं और भुगतान प्रक्रिया का भी अध्ययन कर रही है। हालांकि अभी तक किसी अधिकारी या कंपनी के खिलाफ कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी स्थिति स्पष्ट
विशेष निगरानी टीम द्वारा जुटाए गए दस्तावेजों की जांच पटना स्तर पर की जाएगी। इसके बाद यह तय होगा कि संबंधित टेंडर प्रक्रियाओं में कोई गड़बड़ी हुई थी या सभी कार्य निर्धारित नियमों के अनुरूप किए गए थे।
फिलहाल जांच जारी है और नगर निगम प्रशासन की ओर से जांच एजेंसी को हर संभव सहयोग दिए जाने की बात कही जा रही है। अब सबकी नजरें निगरानी विभाग की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।