ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण अमोनिया गैस महंगी: 75 से बढ़कर हुई 110 रुपये किलो, कोल्ड स्टोरेज का बढ़ा खर्च
ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष के कारण अमोनिया गैस की कीमतों में वृद्धि हुई है, जिससे समस्तीपुर के कोल्ड स्टोरेज संचालकों की चिंता बढ़ गई है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर
प्रकाश कुमार, समस्तीपुर। ईरान व इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध के कारण एलपीजी सिलिंडर की किल्लत के बीच अब कोल्ड स्टोरेज में इस्तेमाल होने वाली अमोनिया गैस की कीमत में बढ़ोतरी हो गई है। इससे कोल्ड स्टोरेज संचालकों की चिंता बढ़ गई है।
पहले अमोनिया गैस 75 रुपये किलो मिल रही थी, अब बढ़कर 110 रुपये प्रति किलो हो गई है। इसकी कीमत में 42 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। इससे कोल्ड स्टोरेज के संचालन खर्च में सीधा इजाफा हुआ है। समस्तीपुर में कुल 28 कोल्ड स्टोरेज का संचालन किया जा रहा है। कोल्ड स्टोरेज में तापमान नियंत्रित रखने के लिए अमोनिया गैस का उपयोग किया जाता है।
ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से लागत पर असर पड़ना स्वाभाविक है। कोल्ड स्टोरेज संचालक के अनुसार, आर्डर देने पर आपूर्ति भी दो दिनों में हो रही है। दिक्कत होने की स्थिति में आलू पर संकट गहराने लगेगा, क्योंकि आलू को सुरक्षित रखने के लिए ठंडक देने में अमोनिया का प्रयोग होता हे।
यदि 24 घंटे अमोनिया से ठंडक न दी जाए तो आलू खराब हो जाएगा। जिला उद्यान पदाधिकारी ने बताया कि कोल्ड स्टोरेज संचालक ने अमोनिया गैस की कीमत बढ़ने की जानकारी दी है। हालांकि, इसके भंडारण में किसी तरह की समस्या नहीं है।
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32 कोल्ड स्टोरेज में हो रही अमोनिया की खपत
दरअसल, मार्च से दिसंबर तक निर्धारित आलू भंडारण सीजन के लिए प्रत्येक कोल्ड स्टोरेज संचालक अमोनिया गैस का 20 से 30 सिलिंडर खरीदता है, ताकि गैस कम न पड़े। भंडारण में गैस रिसाव के खतरे के कारण ज्यादातर संचालक प्रत्येक दो महीने के हिसाब से खरीद करते हैं।
एक सिलिंडर में 60 किलो अमोनिया गैस आती है व रोजाना एक कोल्ड स्टोरेज में औसत पांच किलो की खपत होती है। इस तरह, जिले के 32 कोल्ड स्टोरेज में प्रतिदिन 160 किलो अमोनिया खर्च होती है। इस साल करीब 30 हजार हेक्टेयर में 7.50 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ है।
किसानों से किराए में नहीं की गई बढ़ोत्तरी
कोल्ड स्टोरेज संचालक अमरेन्द्र झा ने किसानों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने की बात कही है। उनका कहना है कि अभी आलू भंडारण के किराये में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं की गई है। किसानों से पहले की तरह ही शुल्क लिया जा रहा है।
कोल्ड स्टोर संचालक धर्मेंद्र साह ने बताया कि हर साल फरवरी में भंडारण दर तय की जाती है और इस वर्ष का रेट पहले ही निर्धारित हो चुका है। ऐसे में तत्काल किराया बढ़ाना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि मार्च से अक्टूबर तक आलू भंडारण का पीक सीजन रहता है। किसान अपनी उपज कोल्ड स्टोर में रखते हैं।