मां आरती के खामोश संघर्ष ने गढ़ा सूर्यवंशी का भविष्य, आज 'वैभव' देख रही दुनिया
Vaibhav Suryavanshi Inspirational Story: समस्तीपुर के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे उनकी मां आरती सूर्यवंशी का अथक संघर्ष और त्याग है। उन्ह ...और पढ़ें

Mother Aarti Suryavanshi Sacrifice: मां आरती के साथ क्रिकेट वैभव सूर्यवंशी। फोटो सौ. स्वजन।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
मुकेश कुमार, समस्तीपुर। Samastipur Cricketer: एक मां, हर रोज सूरज से पहले उठती रही। गर्मी, ठंड, बरसात...कभी अलार्म की जरूरत नहीं पड़ी।
दौड़ती-भागती, ताकि बेटा सूर्यवंशी हो सके और दुनिया उसका वैभव देख सके। वह न कभी थकी, न हारी। बेटे में इस कदर संस्कार भर दिया कि अब वह देश का लाडला है।
मां के संघर्ष से बेटा बना चैंपियन
एक मां की 'खामोश मेहनत और संघर्ष', जिसने अभावों और चुनौतियों के बीच चैंपियन को गढ़ दिया। यह कहानी है समस्तीपुर के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की मां आरती सूर्यवंशी के संघर्ष और त्यागमयी स्वरूप की।
मां के त्याग से सपना पूरा
वैभव के बल्ले की गूंज और स्ट्रोक के पीछे मातृशक्ति है। मैदान से बाहर गेंद को पहुंचाने के पीछे मां की ऊर्जा है। यह एक मां के त्याग की कपोल कल्पित कहानी नहीं, बल्कि हर उस सपने की पूर्णता है, जिसे मां के संघर्ष, त्याग और परिश्रम से पोषित-पल्लवित किया गया है।

बेटे ने जो सपना देखा, मां ने उसे उतारा। वैभव के बल्ले की चमक तो बचपन से ही स्वजन ने देखी थी। क्रिकेटर पिता को उसके बल्ले से पिटते बाल में भविष्य का क्रिकेटर दिखाई दिया, लेकिन मां के संघर्ष ने उसे क्रिकेट की पिच पर उतारा। बेटे को इंजीनियर-डाक्टर बनाने के दबाव के आगे बल्ला थमाया।
कमाल का समय प्रबंधन
वैभव मां के करीब हैं। ये उनके स्वजन मानते हैं। इसके पीछे उनकी मां का उनके सपने के पीछे लगातार-अनथक भागना, दौड़ना रहा। ट्रेनिंग और सपने के बीच कभी समय बाधा न बने, इसके लिए मां आरती अपनी सुख-सुविधाओं और सहूलियत पीछे छोड़ चुकी थीं।
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अपनी नींद की चिंता नहीं
वह बताती हैं कि वैभव को अभ्यास के लिए समय पर मैदान में पहुंचाना उनकी पहली प्राथमिकता रही। उन्होंने कभी अपनी नींद की चिंता नहीं की। देर रात तक घर के काम निपटाने के बाद भी वह कुछ घंटों की नींद लेकर तड़के उठ जाती थीं और आज भी जब वैभव मैदान से दूर घर में होते हैं तो उनकी दिनचर्या पहले जैसी ही होती है।
वैभव की दिनचर्या में भी वही समय प्रबंधन दिखता है। क्रिकेट की भाषा और समझ में उनकी टाइमिंग ही उनके शाट्स निर्धारित करती है।
पोषण और सेहत का रखा ध्यान
आरती, वैभव के लिए मां के साथ खानपान विशेषज्ञ रहीं। शुरुआती दिनों में एक न्यूट्रीशन एक्सपर्ट की तरह दैनिक क्रिया के साथ खानपान में पोषक तत्वों का ध्यान रखा। वह एक खिलाड़ी के लिए आहार का महत्व बेहतर समझती हैं।
भोजन का रखा खास ख्याल
उन्होंने सुनिश्चित किया कि वैभव को कभी बाहर का भोजन न करना पड़े। सूरज उगने से पहले उठकर वैभव के लिए पौष्टिक नाश्ता तैयार करना या बाहर जाने के दौरान हेल्दी टिफिन पैक करना, सभी का ख्याल रखा। उनके नाश्ते से लेकर खाने तक में बाजार का रेडीमेड आइटम नहीं होता था, वे स्वयं से तैयार करती थीं।
पटना की यात्रा और बढ़तीं चुनौतियां
जब वैभव के प्रशिक्षण का दायरा बढ़ा और उन्हें समस्तीपुर से पटना जाकर ट्रेनिंग लेनी पड़ी, तब आरती सूर्यवंशी की जिम्मेदारी और कठिन हो गई। संघर्ष का दायरा भी जिला से निकलकर राजधानी तक पहुंच गया। पटना की लंबी यात्रा के लिए उन्हें सामान्य दिनों से भी जल्दी उठना पड़ता था।
सफर की थकान के बावजूद, उनका पूरा ध्यान इस बात पर रहता था कि वैभव बिना किसी तनाव अपनी ट्रेनिंग पर ध्यान केंद्रित कर सके। आरती का कहना है कि एक मां का संघर्ष तब सफल हो जाता है, जब उसका बच्चा अपनी मंजिल पा लेता है।
उनके लिए वैभव की हर बाउंड्री और शतक उन जागती रातों का उजाला और चूल्हे की तपिश के बाद ठंडक का सुखद अनुभव है, जिसे उन्होंने शुरुआती दिनों में देखा है।
छोटे कस्बे से राष्ट्रीय पहचान तक
समस्तीपुर के एक छोटे से कस्बे ताजपुर से निकलकर क्रिकेट की दुनिया में चमक बिखेरने वाले वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे केवल उनकी मेहनत और पिता के संघर्ष से बढ़कर मां का समर्पण और तपस्या है।