जीविका ने बदली गांवों की तस्वीर, समस्तीपुर में महिलाओं को मिला रोजगार और छाई खुशहाली
Bihar Rural Economy News: समस्तीपुर में जीविका ने महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में रिकॉर्ड सफलता हासिल की है। बैंक लिंकेज, स् ...और पढ़ें

स्वरोजगार के क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्यों को पीछे छोड़ते हुए रिकॉर्ड सफलता हासिल की है। फाइल फोटो

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जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। Jeeveeka Didi Samastipur: बिहार के समस्तीपुर जिले में महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में 'जीविका' ने नया इतिहास रचा है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 और चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जीविका ने बैंकिंग से लेकर स्वरोजगार के क्षेत्र में अपने निर्धारित लक्ष्यों को पीछे छोड़ते हुए रिकॉर्ड सफलता हासिल की है।
बैंक लिंकेज में रिकॉर्ड उपलब्धि
विभागीय आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में 1,600 स्वयं सहायता समूह बनाने का लक्ष्य था, जिसके मुकाबले 1,658 समूहों का गठन किया गया।
इसी तरह 13,500 समूहों के बैंक लिंकेज के लक्ष्य के विपरीत 14,730 समूहों को बैंकों से जोड़ा गया, जो 109 प्रतिशत की बड़ी उपलब्धि है।
लाखों महिलाओं को मिला फंड
ग्रामीण महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने के लिए 2,322 समूह बचत खाते खोले गए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 7,14,553 लाभार्थियों को 10-10 हजार रुपये की प्राथमिक निवेश निधि दी गई, जिससे ग्रामीण महिलाएं अपना खुद का स्वरोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
बीमा और पर्यावरण का संदेश
सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करते हुए 3,43,700 जीविका दीदियों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना से जोड़ा गया है। वहीं जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत 3,83,490 पौधे लगाकर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया, जबकि चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में भी 3,76,508 पौधे रोपे जा चुके हैं।
रोजगार और दीदी की रसोई
जिले में संचालित 46 सिलाई केंद्रों में करीब 1,700 जीविका दीदियां आंगनबाड़ी बच्चों के लिए पोशाक तैयार कर रही हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं जनजाति विद्यालयों में ‘दीदी की रसोई’ का सफल संचालन किया जा रहा है। वहीं यूथ मोबिलाइजेशन के तहत 65 युवाओं को प्रतिष्ठित निजी कंपनियों में रोजगार दिलाया गया है।
बैंकिंग सेवाओं का हुआ विस्तार
गांवों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सुलभ बनाने के लिए 277 ग्राहक सेवा केंद्रों के माध्यम से 3.35 करोड़ रुपये का वित्तीय लेन-देन किया गया।
वहीं सतत जीविकोपार्जन योजना के जरिए 325 अत्यंत निर्धन परिवारों को आजीविका के नए साधनों से जोड़कर उनके जीवनस्तर को बेहतर बनाने का काम लगातार जारी है।