Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    समस्तीपुर में सांपों पर क्रूरता करने वालों पर शिकंजा, लवनी-घड़ों से मुक्त कराए गए 20 से अधिक सांप

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 03:07 PM (IST)

    वन विभाग और पुलिस ने समस्तीपुर में नागपंचमी से पहले सांपों पर होने वाली क्रूरता रोकने के लिए 20 से अधिक सांपों को बचाया। ...और पढ़ें

    सांपों पर क्रूरता करने वालों पर शिकंजा

    सांपों पर क्रूरता करने वालों पर शिकंजा

    HighLights

    1. नागपंचमी से पहले समस्तीपुर में 20 से अधिक सांप बचाए गए।

    2. वन विभाग और पुलिस ने क्रूरता रोकने को अभियान चलाया।

    3. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

    प्रकाश कुमार, समस्तीपुर। नागराज के साथ किसी प्रकार की क्रूरता हुई तो महंगा पड़ेगा। वन विभाग और पुलिस अधिकारी मिलकर कार्रवाई करेंगे। यह पूरी कवायद 17 अगस्त को नागपंचमी से पहले सांपों को पकड़ने और कैद में रखने के विरुद्ध है। 

    समस्तीपुर जिले में नागपंचमी के दिन सांपों की प्रदर्शनी होती है। इस दिन के लिए जिले के बूढ़ी गंडक नदी के तटीय समेत कई क्षेत्रों से सांप पकड़े जाते हैं। इनके विषैले दांत तोड़कर लार ग्रंथियों को हटा दिया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में मुंह को सिलने या टेप से चिपका देने जैसी क्रूरता भी दिखी है। 

    एक दर्जन से अधिक सांपों को मुक्त कराया

    मेलों में कोबरा को गले में डालकर स्टंट करने जैसी घटनाएं लोगों की जान के लिए खतरा बनती हैं। इस बार वन विभाग व पुलिस अधिकारी इसे लेकर सख्ती बरत रहे। रविवार को वन विभाग और पुलिस की टीम ने एक दर्जन से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर सांपों को मुक्त कराया। 

    गेहुअन, करैत जैसे विषैले सांपों के अलावा सैंड बोआ, धामन जैसी विभिन्न प्रजातियों के 20 से अधिक सांपों को मुक्त कराया गया। इन्हें मिट्टी के घड़े और ताड़ी स्टोर करने वाले पात्र (लवनी) में छुपाया गया था। सांपों को सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया। 

    खबरें और भी

    एक दर्जन लोगों को चिह्नित कर दोबारा ऐसा करने पर प्राथमिकी दर्ज करने की चेतावनी दी गई है। सोमवार को रोसड़ा अनुमंडल कार्यालय में जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर लोगों को जागरूक किया गया।

    इन इलाकों में होता रहा है सांपों का प्रदर्शन

    वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, जिले के सिंघियाघाट, नरहन, आलमपुर कोदरिया, माधोपुर, महावीर गाछी, मुरिया स्थान, मिश्रौलिया, खदियाही, गंगौली पुल और देसरी समेत बूढ़ी गंडक नदी के तटीय क्षेत्रों में नागपंचमी के अवसर पर वर्षों से सांपों के प्रदर्शन की परंपरा रही है। इसी को देखते हुए इस बार इन संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है।

    लवनी और घड़ों में कथित रूप से कैद रखे गए थे सांप

    वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का आरोप था कि नागपंचमी से कई दिन पहले कोबरा, करैत, धामन समेत अन्य प्रजातियों के सांपों को खेतों और झाड़ियों से पकड़ लिया जाता है। इसके बाद उन्हें लवनी, मिट्टी के घड़ों, टीन या प्लास्टिक के डिब्बों तथा बोरों में बंद कर रखा जाता है, ताकि नागपंचमी के दिन मेलों और धार्मिक आयोजनों में उनका प्रदर्शन किया जा सके।

    आस्था के नाम पर वन्यजीवों के शोषण को न दें बढ़ावा

    वन विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि नागपंचमी के अवसर पर सांपों के प्रदर्शन को बढ़ावा न दें और कहीं भी वन्यजीवों के अवैध पकड़ने या प्रदर्शन की सूचना तत्काल वन विभाग या स्थानीय पुलिस को दें। रेस्क्यू टीम सुरक्षित तरीके से सांप का बचाव कर सके।

    सपेरों की बस्तियों और मेला आयोजकों को चेतावनी दी गई है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम-1972 के तहत सांपों या कोई भी वन्य जीव को पकड़ना, कैद में रखना या उनका व्यावसायिक प्रदर्शन करना संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सीधे नामजद प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी। वन्यजीव संरक्षण और जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नागपंचमी तक यह विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। - राज कुमार शर्मा जिला वन पदाधिकारी, समस्तीपुर।