समस्तीपुर: रोसड़ा कबीर मठ की 13 एकड़ जमीन की जमाबंदी रद करने की मांग, SDO को सौंपा ज्ञापन
रोसड़ा के कबीर मठ लक्ष्मीपुर बगीचा की 13 एकड़ जमीन की जमाबंदी का मामला गरमा गया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने राजस्व अभिलेखों में हेरफ ...और पढ़ें

रोसड़ा कबीर मठ की 13 एकड़ जमीन की जमाबंदी रद करने की मांग
HighLights
कबीर मठ की 13 एकड़ जमीन की फर्जी जमाबंदी का विवाद।
राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर नाम बदलने का आरोप।
जनप्रतिनिधियों ने जमाबंदी रद्द कर दोषियों पर कार्रवाई मांगी।
संवाद सहयोगी, रोसड़ा। स्थानीय कबीर मठ लक्ष्मीपुर बगीचा का करीब 13 एकड़ जमीन की जमाबंदी का मामला तूल पकड़ने लगा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने राजस्व अभिलेखों में हेरफेर कर फर्जी जमाबंदी बनाने का आरोप लगाते हुए निरस्त करने की मांग की है।
पूर्व वार्ड पार्षद भाजपा नेता सुधीर प्रसाद की अगुआई में बुधवार को इससे संबंधित मांग पत्र अनुमंडलाधिकारी को सौंपा। इसमें मुखिया संघ के अध्यक्ष प्रवीण कुमार, जिला परिषद सदस्य राजेश यादव, वार्ड पार्षद लक्ष्मण पासवान, रामकल्याण दास, भाकपा जिला सचिव सुरेन्द्र कुमार सिंह मुन्ना एवं पार्टी नेता रामकुमार चौधरी आदि मुख्य रूप से शामिल रहे।
सौंपे गए ज्ञापन में उक्त जमीन को कई दशकों से मठ के महंतों के नाम पर केवाला एवं खतियान में दर्ज रहना तथा लीची बगान व पूर्व महंतो की समाधि स्थल रहना बताया है। भूमि से संबंधित राजस्व अभिलेख के पंजी दो में छेड़ छाड़ एवं पूर्व के नाम को काटकर नया नाम अंकित करने का आरोप लगाया है।
उक्त आधार पर दाखिल खारिज हेतु दिए गए आवेदन को पूर्व के अंचलाधिकारी द्वारा निरस्त करना तथा बिहार न्यास परिषद द्वारा भी फर्जी रूप से कायम जमाबंदी को निरस्त करने का आदेश पारित करना बताया है।
वर्ष 2022 में तत्कालीन डीसीएलआर द्वारा भी रजिस्टर में छेड़ छाड़ की पुष्टि करते हुए आरोप ह राजस्व अभिलेख के पंजी-दो में दर्ज कैलू मिस्त्री के नाम को काटकर उसकी जगह धीरज प्रसाद सिंह का नाम जोड़ दिया गया। इस आधार पर दाखिल-खारिज का आवेदन भी दिया गया, जिसे तत्कालीन अंचलाधिकारी ने फर्जी बताते हुए खारिज कर दिया था।
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मामले में धार्मिक न्यास परिषद, बिहार द्वारा वर्ष 2022 में ही इस जमीन को मठ की संपत्ति मानते हुए फर्जी जमाबंदी निरस्त करने का निर्देश दिया गया था।
साथ ही, भूमि सुधार उप समाहर्ता रोसड़ा की जांच में भी अभिलेखों में हेरफेर की पुष्टि होने तथा कार्रवाई का निर्देश के बावजूद अंचलाधिकारी द्वारा जमाबंदी निरस्त नहीं करने तथा 12 दिसंबर 2025 को विवादित व्यक्ति के नाम से राजस्व रसीद भी जारी करने का आरोप लगाया है।
जनप्रतिनिधि तथा राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फर्जी रूप से कायम जमाबंदी को निरस्त कर दोषी के विरुद्ध कारवाई की मांग की है। इससे पूर्व क्षेत्र के दर्जनों जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों ने राज्य के प्रधान सचिव, राजस्व विभाग को भी ज्ञापन सौंपकर उक्त मांग को दोहराया है।