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    मां के 'कलेजे' को सहेज रही सरकार, बाल हृदय योजना से मिल रही नई जिंदगी

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 02:40 PM (GMT+05:30)

    समस्तीपुर में बाल हृदय योजना के तहत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क इलाज हो रहा है। इस योजना से अब तक 167 बच्चों को उपचार के लिए भेजा गय ...और पढ़ें

    मां के "कलेजे" को सहेज रही सरकार, बाल हृदय योजना से मिल रही नई जिंदगी (AI Generated Image)

    मां के "कलेजे" को सहेज रही सरकार, बाल हृदय योजना से मिल रही नई जिंदगी (AI Generated Image)

    HighLights

    1. जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क इलाज।

    2. समस्तीपुर से 167 बच्चों को उपचार के लिए भेजा गया।

    3. योजना के तहत 106 बच्चों की सफल सर्जरी हुई।

    जागरण संवाददाता, समस्तीपुर। जन्मजात हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों के लिए बाल हृदय योजना उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। वर्ष 2021 में शुरू की गई इस योजना के तहत हृदय में छेद समेत जन्मजात हृदय संबंधी गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों का निशुल्क इलाज कराया जा रहा है।

    जांच से लेकर सर्जरी, विशेषज्ञ परामर्श, दवा और अन्य सभी उपचार का खर्च सरकार वहन कर रही है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को समय पर बेहतर इलाज मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला स्तर पर स्क्रीनिंग शिविर आयोजित कर जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की पहचान की जाती है।

    जांच में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि होने पर उन्हें पटना के आईजीआईसी, आईजीआईएमएस, मेदांता अस्पताल तथा अहमदाबाद स्थित श्री सत्य साईं हार्ट हॉस्पिटल भेजा जाता है। अप्रैल 2021 से जुलाई 2026 तक जिले से कुल 167 बच्चों को उपचार के लिए भेजा गया है।

    इनमें आईजीआईसी में 26, आईजीआईएमएस में सात, मेदांता में 22 तथा श्री सत्य साईं हार्ट हास्पिटल, अहमदाबाद में 51 बच्चों की सफल सर्जरी की जा चुकी है। अन्य बच्चों का उपचार विभिन्न चरणों में जारी है।

    स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि समय पर पहचान और उपचार से अधिकांश जन्मजात हृदय रोगों का सफल इलाज संभव है, इसलिए अभिभावकों को बच्चों में ऐसे लक्षण दिखने पर बिना देर किए सरकारी अस्पताल में जांच करानी चाहिए।

    आर्थिक चिंता दूर हुई, बेटे को मिला नया जीवन

    उजियारपुर प्रखंड के रायपुर पंचायत निवासी राजेश पासवान बताते हैं कि उनके पुत्र आदर्श कुमार का जन्म के कुछ माह बाद ही चिकित्सक ने हृदय में छेद होने की जानकारी दी। निजी अस्पतालों में इलाज का खर्च सुनकर पूरा परिवार परेशान था।

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    बाल हृदय योजना के तहत बच्चे को अहमदाबाद भेजा गया, जहां सफल सर्जरी हुई। अब वह सामान्य बच्चों की तरह पढ़ाई और खेलकूद कर रहा है। राजेश ने बताया कि वह पेशे से राजमिस्त्री का काम करते है। ऐसे में सरकार की इस योजना ने उनके बेटे को नया जीवन दिया है।

    स्वस्थ हुआ आदित्य व श्रेयांश:

    सरायरंजन निवासी हरिंदर चौरसिया का पुत्र आदित्य राज को ह्दय में तकलीफ थी। जिला में उसकी पहली स्क्रीनिंग हुई। इसके बाद पटना के इंदिरा गांधी ह्दय रोग संस्थान में अहमदाबाद के एक्सपर्ट की टीम ने दूसरी स्क्रीनिंग की। यहां से आपरेशन के लिए चिह्नित होने पर इलाज हुआ।

    पिता ने कहा कि इतने बड़े इलाज कराने में किसी भी तरह की फीस नहीं देनी पड़ी। आदित्य अब ठीक है। इसी तरह वारिसनगर निवासी विनेश पासवान का पुत्र श्रेयांश राज को हर्ट में तकलीफ थी।

    उसके पिता बताते हैं कि स्वास्थ्य विभाग की टीम से जांच के दौरान योजना की जानकारी मिली। जांच के बाद उनके पुत्र को अहमदाबाद ले जाकर आपरेशन कराया गया। सब कुछ मुफ्त में हुआ। बच्चा अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं। वह सरकार की इस योजना को गरीबों के हित में बताते हैं।

    38 रोगों के निशुल्क इलाज का प्रावधान:

    राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के तहत शून्य से 18 साल के बच्चों में होने वाले कुल 38 रोगों के निशुल्क इलाज का प्रावधान है। इसमें चर्म रोग, दांत व आंख संबंधी रोग, टीबी, एनीमिया, हृदय संबंधी रोग, श्वसन संबंधी रोग, जन्मजात विकलांगता, बच्चे के कटे होंठ व तालू संबंधी रोग शामिल हैं।

    बीमार बच्चों को चिह्नित करने के लिए आरबीएसके टीम द्वारा जरूरी स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। शून्य से छह साल तक के बच्चों में रोग का पता लगाने के लिए आंगनबाड़ी स्तर व छह से 18 साल तक के बच्चों में रोग का पता लगाने के लिए विद्यालय स्तर पर स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन नियमित अंतराल पर किया जाता है।

    जिले में बाल हृदय योजना के तहत स्क्रीनिंग के क्रम में 167 बच्चों का चयन किया गया है। इसमें 106 का आपरेशन कराया गया है। आपरेशन के उपरांत सभी बच्चे स्वस्थ हैं। योजना के तहत 38 तरह की बीमारियों का इलाज होता है। जो बिल्कुल ही निशुल्क है। - डॉ. राजीव कुमार, सिविल सर्जन, समस्तीपुर