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    समस्तीपुर में सरकारी अस्पतालों में 24 घंटे पैथोलॉजी सेवा, PPP मॉडल पर होगा संचालन

    Updated: Sun, 31 May 2026 02:15 PM (GMT+05:30)

    समस्तीपुर के सरकारी अस्पतालों में अब पीपीपी मॉडल के तहत 24 घंटे पैथोलॉजी सेवाएं मिलेंगी, जिसमें डोर-स्टेप सैंपल कलेक्शन और केंद्रीकृत डेटा स्टोरेज की ...और पढ़ें

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    संक्षेप में पढ़ें

    प्रकाश कुमार, समस्तीपुर। समस्तीपुर के सभी सरकारी अस्पतालों में अब पीपीपी माडल के तहत 24 घंटे पैथोलाजी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मरीजों को डोर स्टेप सैंपल कलेक्शन की सुविधा मिलेगी। मरीजों के सभी जांच डाटा का केंद्रीकृत स्टोरेज किया जाएगा, जिससे रिपोर्ट तक पहुंच आसान होगी। योजना के तहत हब एंड स्पोक माडल अपनाया जाएगा।

    इसमें सदर अस्पतालों को हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां अत्याधुनिक लैब स्थापित होंगी। अनुमंडल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्पोक के रूप में काम करेंगे, जहां से नमूने एकत्र कर हब तक जांच के लिए भेजे जाएंगे।

    राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने योजना को लागू करने के लिए निर्देश जारी किया है। योजना के तहत जिले में हब एंड स्पोक मॉडल लागू किया जाएगा। सदर अस्पताल को हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित होगी।

    वहीं अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, रेफरल अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्पोक केंद्र के रूप में कार्य करेंगे। इन केंद्रों से मरीजों के नमूने एकत्र कर जांच के लिए सदर अस्पताल भेजे जाएंगे।

    परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी मेसर्स साइंस हाउस मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड (लीड पार्टनर) एवं मेसर्स सोडानी हॉस्पिटल्स एंड डायग्नोस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई है।

    प्रारंभिक तौर पर योजना पांच वर्षों के लिए लागू की गई है, जिसे बेहतर प्रदर्शन के आधार पर तीन वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है। सिविल सर्जन डा. राजीव कुमार ने बताया कि मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा दी जा रही है। इस सुविधा के शुरु होने से सुविधा और भी सुदृढ़ हो जाएगी।

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    64 प्रकार की जांच की होगी सुविधा

    सदर अस्पताल में 64 प्रकार की पैथोलाजी जांच की अनुशंसा की गई है। इसके लिए पूर्ण स्वचालित बायोकेमिस्ट्री विश्लेषक, हेमेटोलाजी विश्लेषक, स्वचालित जमावट विश्लेषक, इलेक्ट्रोलाइट विश्लेषक, एलिसा रीडर एवं वाशर, माइक्रोस्कोप तथा यूरिन एनालाइजर जैसी आधुनिक मशीनें स्थापित की जाएंगी। इन उपकरणों से जांच प्रक्रिया अधिक सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी। सभी जांच प्रमाणित डाक्टरों और प्रशिक्षित लैब टेक्नीशियन द्वारा की जाएंगी।

    अनावश्यक जांच लिखने पर रहेगी नजर

    योजना के तहत चिकित्सकों द्वारा केवल आवश्यक जांच ही लिखी जाएगी। सिविल सर्जन को इसकी नियमित मानिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि मरीजों के पर्चों पर केवल जरूरत के अनुरूप जांच ही अंकित की जाए। इसके अलावा मरीजों के पर्चों का सैंपल आधार पर कम से कम 10 प्रतिशत आडिट भी कराया जाएगा, ताकि अनावश्यक जांच की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके।

    रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित

    इस व्यवस्था में समयबद्ध रिपोर्टिंग के लिए लैब इंफार्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा, जिससे सभी जांचों का रिकार्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। साथ ही मरीजों के बैठने, नमूना संग्रह और प्रतीक्षा के लिए बेहतर सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी।

    4 लैब टेक्नीशियन के भरोसे सदर अस्पताल का रक्त जांच केंद्र

    सदर अस्पताल के ओपीडी भवन में स्थित रक्त जांच केंद्र तकनीकी स्टाफ की कमी झेल रहा है। रक्त जांच केंद्र में मात्र 4 टेक्नीशियन तैनात है। इनके जिम्मे 24 घंटा सेवा देनी है। मरीज को भी रिपोर्ट दिए जाने में विलंब हो रहा है। जबकि, विभागीय रिपोर्ट के अनुसार 12 लैब टेक्नीशियन का पद है।

    एक्सपर्ट की मानें तो एक लैब टेक्नीशियन पांच से छह घंटा में 15-20 ब्लड सैंपल की ही जांच ही कर सकते हैं। लेकिन सदर अस्पताल में स्थित रक्त जांच केंद्र में 130-150 जांच प्रतिदिन आ रहे हैं। इस कारण यहां हो रहे जांच की प्रमाणिकता भी सवालों के घेरे में है।

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