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    बसंत पंचमी/सरस्वती पूजा 2026: महासिद्ध और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग, नोट करें पूजा विधि और हवन मंत्र

    Updated: Thu, 22 Jan 2026 02:55 PM (IST)

    छपरा में माघ शुक्ल पंचमी पर शुक्रवार को मां सरस्वती की पूजा श्रद्धा और उल्लास से की जाएगी। स्कूलों, कॉलेजों में तैयारियां तेज हैं। इस दिन महासिद्ध और ...और पढ़ें

    मां सरस्वती की पूजा पर महासिद्ध व सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग

    मां सरस्वती की पूजा पर महासिद्ध व सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग

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    जागरण संवाददाता, छपरा। माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर शुक्रवार (23 जनवरी) को जिलेभर में विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ की जाएगी। पूजा को लेकर गुरुवार से ही स्कूल, कालेज और कोचिंग संस्थानों में तैयारियों का दौर तेज हो गया।

    छात्र-छात्राएं देर रात तक प्रतिमाओं को सजाने-संवारने में जुटे रहे। वहीं, प्रतिमा स्थापना के लिए थाना से लाइसेंस लेने को लेकर गुरुवार शाम तक संबंधित थानों में भीड़ लगी रही।

    सरस्वती पूजा के अवसर पर शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ विभिन्न मोहल्लों में पूजा पंडालों को अंतिम रूप दिया गया। आयोजन समितियों ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर भी विशेष तैयारी की।

    बसंत पंचमी से जुड़ी धार्मिक मान्यता:

    शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है। मान्यता है कि इसी तिथि को देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। यही कारण है कि इस दिन विद्या की प्राप्ति, बुद्धि-विकास और ज्ञान-वृद्धि के लिए विशेष पूजा की जाती है।

    बसंत पंचमी का महत्व केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। यह पर्व किसानों के लिए भी खास माना जाता है, क्योंकि इसी समय प्रकृति में बदलाव दिखने लगता है। ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है और मौसम में बसंत का असर साफ नजर आता है। खेतों में गेहूं-जौ की बालियां और सरसों के पीले फूल वातावरण को रंगीन बना देते हैं।

    विद्यारंभ के लिए सर्वोत्तम दिन:

    देवी सरस्वती को सत्वगुण संपन्न और विद्या की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में इस तिथि को छोटे बच्चों के विद्यारंभ के लिए श्रेष्ठ बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ती है और ज्ञान प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

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    कई परिवारों में बसंत पंचमी पर बच्चों को पहली बार अक्षर ज्ञान कराया जाता है। इस अवसर पर बच्चे किताब, कलम और स्लेट के साथ पूजा स्थल पर पहुंचते हैं और माता से आशीर्वाद लेते हैं।

    पूजा का शुभ मुहूर्त और विशेष योग:

    भरत मिश्र संस्कृत महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अम्बरीश कुमार मिश्रा एवं पंडित अनीत शुक्ल के अनुसार, मां सरस्वती कमल पर विराजमान हंसवाहिनी हैं। उनके एक हाथ में पुस्तक है, जो ज्ञान का प्रतीक है।

    उन्होंने बताया कि बसंत पंचमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:15 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। हालांकि, सूर्योदय से लेकर शाम तक पूजा की जा सकती है। इस बार महासिद्ध योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी बन रहा है, जिसे अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।

    बाजारों में उमड़ी भीड़, बेर की बढ़ी बिक्री:

    सरस्वती पूजा को लेकर गुरुवार को शहर के बाजारों में खासा उत्साह देखने को मिला। पूजा सामग्री, फूल, अगरबत्ती, दीप, धूप, माला, फल और मिठाइयों की दुकानों पर भीड़ लगी रही। पूजा में उपयोग होने वाले बेर की बिक्री भी बढ़ गई। कई स्थानों पर पूजा समितियों ने सजावट सामग्री और रंग-बिरंगे कपड़ों की खरीदारी की।

    पीले रंग का विशेष महत्व, अबीर-गुलाल से होती है शुरुआत:

    बसंत पंचमी को पीले रंग का खास महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां सरस्वती को पीला रंग प्रिय है। इस कारण कई श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण करते हैं और महिलाएं पीली साड़ी व चूड़ियां पहनकर पूजा करती हैं।

    इस दिन कुछ स्थानों पर लोग अबीर-गुलाल भी उड़ाते हैं, जिससे होली के आगमन का संकेत माना जाता है। बसंत पंचमी के साथ ही फागुन की रंगत धीरे-धीरे लोगों के मन में उतरने लगती है।

    सरस्वती पूजा की विधि:

    पूजा के दिन स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई कर माता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद गणेश पूजन और नवग्रह पूजन किया जाता है। फिर मां शारदा को गंगाजल से स्नान कराकर पीले पुष्प, अक्षत, दीप, धूप, पीला गुलाल और गंध अर्पित किया जाता है। माता को खीर, मालपुआ या सफेद मिठाई का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु सरस्वती वंदना कर मंत्र जाप भी करते हैं।

    हवन के लिए मंत्र:

    पूजा के बाद गणपति और नवग्रह के लिए हवन किया जाता है। इसके उपरांत ओम श्री सरस्वत्यै नमः स्वाहा मंत्र का 108 बार उच्चारण करते हुए माता का ध्यान कर हवन किया जाता है। हवन के बाद आरती कर विद्या, करियर में सफलता और बुद्धि-वृद्धि की कामना की जाती है।

    प्रतिमा स्थापना को लेकर 1078 पूजा समितियों को मिला लाइसेंस:

    सरस्वती पूजा के अवसर पर सारण जिले में प्रतिमा स्थापना के लिए प्रशासन की ओर से 1078 पूजा समितियों को लाइसेंस जारी किया गया है। लाइसेंस प्रक्रिया के दौरान समिति अध्यक्ष व सचिव का आधार कार्ड और मोबाइल नंबर भी दर्ज किया गया।

    प्रशासन ने पूजा के दौरान डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगाया है। संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस बल के साथ मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है।

    एसडीओ कार्यालय में जिला नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, ताकि किसी भी स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। वरीय पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार ने पूजा को लेकर संबंधित थानाध्यक्षों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।