सारण में ₹2.69 करोड़ की लागत से बने पुल क्षतिग्रस्त, पहली बारिश में बहने लगी सड़क
बिहार के मढ़ौरा में गेहुआं नदी पर बना 2.69 करोड़ का पुल पहुंच पथ पहली बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे। ग्रामीणों ने उ ...और पढ़ें

क्रैश बैरियर उखड़ा। फोटो जागरण
HighLights
गेहुआं नदी पुल का पहुंच पथ पहली बारिश में क्षतिग्रस्त।
2.69 करोड़ के निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल।
ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की।
पंकज कुमार पाण्डेय, मढ़ौरा (सारण)। बिहार के मढ़ौरा प्रखंड के मिर्जापुर बाजिदभोरहां के बीच गेहुआं नदी पर लगभग 2.69 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुल का पहुंच पथ पहली ही वर्षा में क्षतिग्रस्त हो जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रविवार की रात हुई वर्षा के बाद सोमवार सुबह जब ग्रामीण पुल के पास पहुंचे तो देखा कि पुल से जुड़ी सड़क कई स्थानों पर टूटकर बह गई है। वहीं पुल के दोनों ओर लगाए गए क्रैश बैरियर भी मिट्टी की कमजोर पकड़ के कारण उखड़ गए हैं। इस स्थिति को देखकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
निर्माण कार्य में लापरवाही का आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि पुल का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग के माध्यम से करीब तीन वर्षों में पूरा कराया गया था। पुल निर्माण के बाद दोनों ओर पहुंच पथ और सुरक्षा व्यवस्था के निर्माण में संवेदक द्वारा भारी लापरवाही बरती गई।
सड़क के किनारों को सुरक्षित रखने के लिए लगाए गए पत्थर और मिट्टी का समुचित सुदृढ़ीकरण नहीं किया गया, जिसके कारण एक रात की बारिश में ही मिट्टी का कटाव शुरू हो गया और सड़क क्षतिग्रस्त हो गई।
कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई, तो अगली वर्षा में सड़क का बड़ा हिस्सा बह सकता है, जिससे पुल पर आवागमन पूरी तरह बाधित होने की आशंका है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई है, जिसका खामियाजा अब आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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ग्रामीण राजवर्द्धन, रामनाथ महतो, पप्पू जायसवाल, सुरेश साह, अजय साह, राजकुमार महतो, गणेश महतो और हर्षवर्धन ने निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी संवेदक और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि पहली ही बारिश में सड़क टूटने लगे तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत कराने, मिट्टी कटाव रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा उपाय करने तथा निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।