प्लेटफॉर्म बढ़े, सुविधाएं नहीं: छपरा जंक्शन पर नए निर्माण का यात्रियों को नहीं मिल रहा फायदा
छपरा जंक्शन पर नए प्लेटफॉर्म (6, 7, 8) बनने के बावजूद उनका उपयोग सीमित है, जिससे पुरानी भीड़भाड़ बनी हुई है। यात्री सुविधाओं और रनिंग ट्रेनों के संचाल ...और पढ़ें

छपरा जंक्शन
HighLights
नए प्लेटफॉर्म 6, 7, 8 का उपयोग अभी सीमित है।
रनिंग ट्रेनें अब भी पुराने प्लेटफॉर्मों से संचालित हो रही हैं।
नए प्लेटफॉर्मों पर खानपान व अन्य सुविधाओं का अभाव है।
जागरण संवाददाता, छपरा(सारण)। छपरा जंक्शन पर यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने प्लेटफॉर्मों का विस्तार करते हुए संख्या छह, सात और आठ तक पहुंचा दी है। उम्मीद थी कि इससे स्टेशन पर भीड़ कम होगी और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी।
हालांकि हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। नए प्लेटफॉर्म तैयार होने के बावजूद उनका इस्तेमाल अभी सीमित स्तर पर ही हो रहा है।
फिलहाल इन प्लेटफॉर्मों का उपयोग मुख्य रूप से छपरा से खुलने वाली या यहां आकर समाप्त होने वाली ट्रेनों के लिए किया जा रहा है। अधिकांश रनिंग ट्रेनें अब भी पुराने प्लेटफॉर्मों से ही संचालित हो रही हैं।
रनिंग ट्रेनों का इंतजार कर रहे नए प्लेटफॉर्म
यात्रियों का कहना है कि प्रमुख एक्सप्रेस और महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव अब भी पुराने प्लेटफॉर्मों पर ही होता है। इसके कारण वहां हमेशा भीड़भाड़ की स्थिति बनी रहती है।
नई सुविधाओं के बावजूद प्लेटफॉर्म संख्या छह, सात और आठ यात्रियों के लिए पूरी तरह उपयोगी साबित नहीं हो पा रहे हैं।
लोगों का मानना है कि यदि रनिंग ट्रेनों का परिचालन यहां से शुरू हो जाए तो स्टेशन पर दबाव कम हो सकता है। इससे यात्रियों को प्लेटफॉर्म बदलने की परेशानी से भी राहत मिलेगी।
बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
स्टेशन पर प्लेटफॉर्म बदलने और लंबी दूरी तय करने में सबसे अधिक परेशानी बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग यात्रियों को होती है।
कई यात्रियों का कहना है कि यदि नई ट्रेनों का संचालन नए प्लेटफॉर्मों से किया जाए तो उन्हें कम दूरी तय करनी पड़ेगी और यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी।
यात्रियों के अनुसार रेलवे को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि परिचालन व्यवस्था में भी बदलाव करना चाहिए।
सेकेंड एंट्री और यात्री शेड का काम जारी
रेलवे की ओर से स्टेशन के सेकेंड एंट्री निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही प्लेटफॉर्म संख्या छह, सात और आठ पर यात्री शेड भी बनाए जा रहे हैं।
निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यात्रियों को धूप और बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही स्टेशन की बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार होगा। रेलवे का मानना है कि इन कार्यों से भविष्य में यात्रियों को बेहतर अनुभव मिलेगा।
खानपान और जरूरी सुविधाओं का भी अभाव
नए प्लेटफॉर्मों पर यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी खानपान और दैनिक जरूरतों की सुविधाओं के अभाव के कारण हो रही है।
यहां अब तक चाय, नाश्ता, पेयजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की स्थायी दुकानें शुरू नहीं हो सकी हैं। यात्रियों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरे प्लेटफॉर्मों तक जाना पड़ता है।
फिलहाल सीमित ट्रेनों के संचालन के कारण रेलवे ने स्टॉल आवंटन की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ाई है।
सिर्फ निर्माण नहीं, संचालन से मिलेगा असली फायदा
यात्रियों का कहना है कि केवल नए प्लेटफॉर्म बना देना ही पर्याप्त नहीं है। उनका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब वहां से नियमित रूप से अधिक संख्या में ट्रेनों का परिचालन शुरू होगा।
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साथ ही खानपान, पेयजल और अन्य सुविधाओं की उपलब्धता भी सुनिश्चित करनी होगी। इससे स्टेशन पर भीड़ का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी।
अब यात्रियों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि रेलवे नए प्लेटफॉर्मों को कब पूरी तरह से परिचालन और सुविधाओं से जोड़ता है।