बिहार के सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पर बवाल: जमीन अधिग्रहण से पहले भड़के किसान, सरकार को चेतावनी
Dariyapur Airport Protest: दरियापुर चंवर क्षेत्र में प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सैकड़ों किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। किसानो ...और पढ़ें

सोनपुर में बनेगा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा। (AI Generated Image)
HighLights
किसानों ने उपजाऊ जमीन छीने जाने पर गहरा विरोध जताया।
अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर गंभीर सवाल उठाए।
जलभराव और बाढ़ की समस्या बढ़ने का डर सता रहा।
संवाद सूत्र, जागरण दरियापुर (सारण)। दरियापुर चंवर क्षेत्र में प्रस्तावित एयरपोर्ट को लेकर तनाव बढ़ गया है। दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसान विरोध में उतर आए हैं। स्थानीय नेतृत्व के साथ आंदोलन को गति मिल रही है।
किसानों ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई है। प्रशासन के खिलाफ आक्रोश बढ़ता दिख रहा है। विरोध अब व्यापक रूप लेता जा रहा है।
इन गांवों की जमीन पर मंडरा रहा खतरा
मनसाचक, करनपुर, लक्ष्मणचक, सरैया समेत कई गांव प्रभावित हैं। मुरारचक और भोवनचक के किसान भी आंदोलन में शामिल हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी उपजाऊ जमीन छीनी जा रही है। इससे रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। किसानों ने इसे जीवन-मरण का सवाल बताया। भूमि अधिग्रहण को लेकर गहरी नाराजगी है।
जलभराव और बाढ़ को लेकर बड़ा डर
किसानों का दावा है कि क्षेत्र पहले से ही जलभराव वाला है। एयरपोर्ट बनने से जल निकासी बाधित हो जाएगी। इससे बाढ़ की समस्या और गंभीर हो सकती है।
खेती योग्य जमीन डूबने का खतरा बढ़ेगा। पर्यावरणीय प्रभाव पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यह मुद्दा विरोध का बड़ा कारण बन चुका है।
अधिग्रहण प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
किसानों ने प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी बताई है। 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के पालन पर सवाल हैं। ग्रामीणों से आपत्तियां नहीं मांगी गईं।
सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट साझा नहीं हुई। स्थानीय भाषा में जानकारी नहीं देने का आरोप है। इससे प्रशासन पर अविश्वास बढ़ा है।
सरकार तक पहुंची शिकायत, बढ़ सकता है आंदोलन
किसानों ने जिला से लेकर केंद्र सरकार तक ज्ञापन भेजा है। अपनी मांगों को लेकर सामूहिक आवाज उठाई गई है। निष्पक्ष जांच और सुनवाई की मांग की गई है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी। जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। मामला अब बड़ा रूप ले सकता है।
समाधान की राह पर टिकी उम्मीदें
किसान चाहते हैं कि उनकी बात गंभीरता से सुनी जाए। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पारदर्शी बनाई जाए। पर्यावरण और जल निकासी पर ठोस योजना बने।
प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था हो। सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद है। अब सभी की नजर अगले कदम पर टिकी है।