बिहार: 680 करोड़ से संवरेगा बाबा हरिहरनाथ धाम, वर्ल्ड क्लास कॉरिडोर के लिए जमीन का सर्वे शुरू
बाबा हरिहरनाथ धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक केंद्र बनाने के लिए 680 करोड़ की हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना का भूमि सर्वेक्षण शुरू हो गया है। ...और पढ़ें

680 करोड़ से संवरेगा बाबा हरिहरनाथ धाम, वर्ल्ड क्लास कॉरिडोर के लिए जमीन का सर्वे शुरू
HighLights
हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना के लिए 680 करोड़ रुपये का बजट।
बाबा हरिहरनाथ धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक पर्यटन केंद्र बनाएंगे।
परियोजना हेतु मंदिर परिसर में भूमि सर्वेक्षण कार्य तेज।
संवाद सूत्र, नयागांव (सारण)। बाबा हरिहरनाथ धाम को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्य सरकार की 680 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी हरिहरनाथ कॉरिडोर परियोजना (प्रोजेक्ट) को मूर्त रूप देने के लिए अंचल प्रशासन ने मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भूमि सर्वेक्षण एवं सीमांकन का कार्य शुरू करा दिया है।
वर्तमान में छह अमीनों की टीम प्रस्तावित कॉरिडोर क्षेत्र में आने वाली जमीनों की पैमाइश, सीमांकन, अभिलेखों के सत्यापन और वास्तविक स्थिति के मिलान में जुटी हुई है। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया को गति मिलेगी।
कॉरिडोर परियोजना को लेकर मंदिर क्षेत्र में लगातार प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। भूमि से संबंधित अभिलेखों का मिलान, नक्शों की जांच तथा राजस्व रिकॉर्ड के सत्यापन का कार्य समानांतर रूप से चल रहा है।
प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित क्षेत्र का स्पष्ट नक्शा तैयार हो, जिससे आगे किसी प्रकार की कानूनी या तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो।
अधिकारियों के अनुसार, सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर ही परियोजना के अगले चरण, जैसे भूमि अधिग्रहण, मुआवजा निर्धारण और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
बाबा हरिहरनाथ मंदिर सोनपुर की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है। कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला विश्वविख्यात सोनपुर मेला देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
इसके बावजूद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में पार्किंग, चौड़ी पहुंच सड़क, सुचारु यातायात, पेयजल, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था, विश्राम स्थल और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर दर्शन व्यवस्था जैसी कई आधारभूत सुविधाओं की कमी लंबे समय से महसूस की जाती रही है।
कॉरिडोर परियोजना के माध्यम से इन सभी व्यवस्थाओं को आधुनिक स्वरूप देने की योजना है, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें और मंदिर परिसर का समग्र विकास हो सके।
हालांकि, भूमि सर्वेक्षण का कार्य प्रशासन के लिए आसान नहीं माना जा रहा है। मंदिर के आसपास का इलाका घनी आबादी, पुराने मकानों, छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों और निजी स्वामित्व वाली जमीनों से घिरा हुआ है।
कई स्थानों पर पुराने राजस्व अभिलेख और वर्तमान स्थिति में अंतर मिलने की संभावना भी बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन सर्वेक्षण प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराने पर जोर दे रहा है, ताकि किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो और स्थानीय लोगों का विश्वास बना रहे।
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कॉरिडोर परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह के साथ-साथ कुछ अपेक्षाएं भी हैं। लोगों का कहना है कि मंदिर क्षेत्र का विकास समय की आवश्यकता है, लेकिन इसके साथ वर्षों से यहां रह रहे परिवारों, छोटे दुकानदारों और व्यवसायियों के हितों की भी पूरी सुरक्षा होनी चाहिए।
यदि किसी को विस्थापित होना पड़े तो उचित मुआवजा, पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। प्रशासन भी सर्वेक्षण के दौरान इन पहलुओं पर विशेष ध्यान दे रहा है।