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    गंडक में उफान: सारण के दर्जनों गांवों की बढ़ी धड़कनें, 3000 परिवारों पर मंडराया खतरा

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 02:07 PM (GMT+05:30)

    वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़े जाने के बाद सारण जिले में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया है, जिससे तटीय क्षेत्रों में पानी फैल गया है और कई जगहों पर कटाव श ...और पढ़ें

    गंडक में उफान: सारण के दर्जनों गांवों की बढ़ी धड़कनें, 3000 परिवारों पर मंडराया खतरा

    गंडक में उफान: सारण के दर्जनों गांवों की बढ़ी धड़कनें, 3000 परिवारों पर मंडराया खतरा

    HighLights

    1. वाल्मीकिनगर बराज से पानी छोड़ने से गंडक का जलस्तर बढ़ा।

    2. सारण के तटीय इलाकों में नदी का पानी फैला, कटाव शुरू।

    3. जमींदारी बांध की मरम्मत और मनरेगा कार्यों पर उठे सवाल।

    संवाद सूत्र, तरैया (सारण)। वाल्मीकिनगर बराज से छोड़े गए पानी का प्रभाव अब सारण जिले के गंडक तटीय क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। मंगलवार की शाम बराज से 2.24 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद करीब दो से ढाई दिनों में इसका प्रवाह चंचलिया दियारा क्षेत्र तक पहुंच गया।

    नदी का जलस्तर बढ़ने से कई निचले इलाकों में पानी तट के समीप तक फैल गया है, जबकि कुछ स्थानों पर नदी किनारे कटाव भी शुरू हो गया है। हालांकि, प्रशासन ने फिलहाल किसी बड़े खतरे से इनकार किया है।

    गुरुवार सुबह तक वाल्मीकिनगर बराज से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा घटकर 1.39 लाख क्यूसेक रह गई, लेकिन नदी का बहाव अब भी तेज बना हुआ है। बढ़े जलस्तर का असर क्षेत्र में चल रहे पुल निर्माण कार्यों पर भी पड़ा है, जिससे निर्माण गतिविधियां आंशिक रूप से प्रभावित हुई हैं।

    सारण तटबंध के पूर्वी हिस्से में स्थित सगुनी, अरदेवा, जिमदहा, माधोपुर बड़ा, बनिया हसनपुर, फरीदनपुर, हरपुर फरीदन, शीतलपुर, भलुआ शंकरडीह, चंचलिया, संग्रामपुर, भटगाई और मोलनापुर समेत दर्जनों गांवों के लगभग तीन हजार परिवारों की निगाहें गंडक नदी के जलस्तर पर टिकी हुई हैं।

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    स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बराज से अधिक पानी छोड़े जाने पर सबसे अधिक परेशानी तटीय गांवों के लोगों को झेलनी पड़ती है।

    वहीं, किसानों का मानना है कि अल्प अवधि तक खेतों में पहुंचने वाला नदी का पानी भूमि की उर्वरता बढ़ाने में मदद करता है, लेकिन यदि जलभराव लंबे समय तक बना रहे तो फसलों को नुकसान हो सकता है।

    इधर, माधोपुर, बनिया हसनपुर, भलुआ शंकरडीह, चंचलिया, राजधानी और आकुचक गांवों से होकर गुजरने वाले जमींदारी बांध की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। चंचलिया धर्मशाला के दक्षिणी हिस्से में बांध के कई हिस्से क्षतिग्रस्त बताए जा रहे हैं।

    हाल के दिनों में बांध पर मिट्टीकरण कार्य कराया गया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। कटाव प्रभावित स्थानों पर लगाए गए सैंड बैग भी प्रभावी सुरक्षा देने के बजाय केवल औपचारिकता साबित हो रहे हैं।

    ग्रामीण विकास कुमार, प्रवीण कुमार और बबलू कुमार ने आरोप लगाया कि मनरेगा के तहत एक ही जमींदारी बांध पर पांच योजनाएं स्वीकृत की गईं, लेकिन अधिकांश कार्य अधूरे हैं और निर्माण की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं है।

    उन्होंने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2009 में सारण तटबंध की सुरक्षा के उद्देश्य से इस जमींदारी बांध का निर्माण कराया गया था।

    मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी संजीत कुमार ने कहा कि ग्रामीणों द्वारा उठाए गए मुद्दों की जांच कराई जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं, बाढ़ नियंत्रण एवं जल निस्तरण विभाग के कनीय अभियंता चंदेश्वर कुमार ने बताया कि बराज से छोड़े जा रहे पानी में कमी आई है तथा वर्तमान में किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की आशंका नहीं है। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और स्थिति पर प्रशासन की नजर बने रहने की बात कही।

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