23 साल बाद सावन में बन रहा दुर्लभ संयोग, 30 जुलाई से शुरू होगा श्रावण मास
इस वर्ष 30 जुलाई से पावन श्रावण मास शुरू होगा, जिसमें चार सोमवारी और 23 साल बाद सोमवती नागपंचमी का दुर्लभ संयोग बन रहा है। छपरा के शिवालयों में तैयारि ...और पढ़ें

23 साल बाद सावन में बन रहा दुर्लभ संयोग, 30 जुलाई से शुरू होगा श्रावण मास
HighLights
30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगा पावन श्रावण मास।
23 साल बाद सोमवती नागपंचमी का दुर्लभ संयोग।
छपरा के प्रभुनाथ नगर में जलजमाव से श्रद्धालु परेशान।
जागरण संवाददाता, छपरा। भगवान शिव की उपासना के लिए सर्वाधिक पवित्र माने जाने वाले श्रावण (सावन) मास का शुभारंभ इस वर्ष 30 जुलाई से होगा, जो 28 अगस्त तक चलेगा। पूरे माह जिले के शिवालयों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, शिव नाम संकीर्तन, महामृत्युंजय मंत्र जाप और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होगा।
धार्मिक मान्यता है कि सावन में भगवान भोलेनाथ की श्रद्धापूर्वक आराधना और सोमवारी व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
इस वर्ष सावन में चार सोमवारी पड़ रही हैं, जबकि तीसरी सोमवारी पर 23 वर्ष बाद सोमवती नागपंचमी का दुर्लभ संयोग बनने से इस बार का श्रावण मास विशेष महत्व का माना जा रहा है।
भारत मिश्र संस्कृत महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डा. अंबरीश कुमार मिश्र ने बताया कि 30 जुलाई, गुरुवार को श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग के शुभ संयोग में सावन का आरंभ होगा।
इन शुभ योगों में भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
आचार्य अनित शुक्ल के अनुसार इस वर्ष पहली सोमवारी 3 अगस्त, दूसरी 10 अगस्त, तीसरी 17 अगस्त और चौथी एवं अंतिम सोमवारी 24 अगस्त को होगी। पहली सोमवारी से ही नवविवाहित महिलाओं का प्रसिद्ध मधुश्रावणी महापर्व भी प्रारंभ होगा।
अविवाहित युवतियां योग्य वर की कामना और विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य, परिवार की सुख-समृद्धि तथा पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखेंगी।
पंडित संपत कुमार मिश्र ने बताया कि 17 अगस्त को नागपंचमी सोमवार के दिन पड़ रही है। वर्ष 2003 के बाद पहली बार यह संयोग बन रहा है। भगवान शिव के प्रिय दिन सोमवार और नागपंचमी का एक साथ पड़ना इसे अत्यंत शुभ बना रहा है।
सावन में जलाभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले कालकूट विष का पान करने के बाद भगवान शिव की दाह शांत करने के लिए देवताओं ने जलाभिषेक किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।
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श्रावण मास शुरू होने से एक दिन पहले 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाई जाएगी। वहीं 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षा बंधन का संयोग रहेगा, जिसके साथ सावन मास का समापन होगा। सावन को लेकर जिले के प्रमुख शिवालयों में तैयारियां तेज हो गई हैं।
प्रभुनाथ नगर में बरसात के साथ जलजमाव, सावन से पहले बढ़ीं मुश्किलें
बरसात की शुरुआती वर्षा ने ही छपरा शहर से सटे प्रभुनाथ नगर मोहल्ले की बदहाल व्यवस्था की पोल खोल दी है। सड़क पर जल जमाव होने से लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।
सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है। कई जगह सड़क जर्जर हो जाने से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
मोहल्ले के प्रसिद्ध शिव मंदिर के आसपास भी पानी जमा रहने से श्रद्धालुओं को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। मंदिर पहुंचने के लिए लोगों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को विशेष परेशानी हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से हल्की बरसात में भी सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं।
इधर, 30 जुलाई से सावन माह शुरू होने वाला है। इस दौरान जलाभिषेक के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो श्रद्धालुओं की परेशानी और बढ़ सकती है।