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    'सीपिया' आम चखने को भी नहीं मिलेगा! बिहार के किसान ने बताया बागवानी से कैसे कमा रहा हर साल लाखों रुपये

    Updated: Wed, 20 May 2026 02:55 PM (IST)

    बिहार में आम के बगीचे किसानों के लिए लाखों की आय का स्रोत बन रहे हैं, लेकिन पारंपरिक 'सीपिया' जैसी किस्में विलुप्त होने के कगार पर हैं। ...और पढ़ें

    आम की बागवानी से हर साल कमा रहा लाखों रुपये

    आम की बागवानी से हर साल कमा रहा लाखों रुपये

    HighLights

    1. आम की वैज्ञानिक खेती से लाखों की आय संभव।

    2. पारंपरिक 'सीपिया' आम की किस्में हो रही विलुप्त।

    3. जुलाई-सितंबर आम पौधारोपण का उपयुक्त समय।

    नागेंद्र सिंह, जलालपुर (सारण)। कभी गांवों की पहचान माने जाने वाले आम के बगीचे अब किसानों के लिए बेहतर आमदनी का माध्यम बनते जा रहे हैं। गर्मी के मौसम में पेड़ों पर आए बौर और कच्चे आम की खुशबू ग्रामीण परिवेश को महका रही है। 

    भोजपुरी की पुरानी कहावत- “तुरुक ताड़ी, बैल खेसारी, आम आवे त सबके पारी” आज भी आम की लोकप्रियता और उपयोगिता को दर्शाती है। बदलते समय में स्वाद के साथ-साथ आम की वैज्ञानिक बागवानी किसानों के आर्थिक विकास का मजबूत आधार बन रही है।

    जुलाई से सितंबर तक पौधारोपण का उपयुक्त समय 

    कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी के उद्यान वैज्ञानिक डॉ.जितेंद्र चंद्र चंदोला ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से आम की खेती करने पर किसान वर्षों तक बेहतर आय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जुलाई से सितंबर तक पौधारोपण का उपयुक्त समय माना जाता है। 

    बलुआ दोमट और दोमट मिट्टी आम की खेती के लिए सबसे बेहतर होती है। सामान्य बागवानी में पौधों को 10×10 मीटर की दूरी पर लगाने की सलाह दी जाती है, जबकि सघन बागवानी में 5×5 मीटर की दूरी पर्याप्त मानी जाती है।

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    डेढ़ लाख से तीन लाख रुपये तक की आय संभव

    उन्होंने बताया कि पौधरोपण से पहले एक मीटर लंबा, चौड़ा और गहरा गड्ढा तैयार कर उसमें गोबर की खाद, नीम खली तथा फास्फेट मिलाने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है।

    वैज्ञानिक देखभाल और उचित प्रबंधन अपनाने पर एक एकड़ आम के बाग से प्रति वर्ष डेढ़ लाख से तीन लाख रुपये तक की आय संभव है।

    डॉ. चंदोला ने चिंता जताई कि सीपिया जैसी पारंपरिक आम की किस्में तेजी से समाप्त होती जा रही हैं। पुराने बगीचों की कटाई और व्यावसायिक प्रजातियों की बढ़ती मांग इसके प्रमुख कारण हैं। उन्होंने किसानों से स्थानीय और पारंपरिक किस्मों को संरक्षित करने की अपील की।

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    सीपिया आम के पौधे में निकले नये पत्तों को निहारता किसान। फोटो- जागरण

    बीजू आम स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

    कृषि विशेषज्ञ डॉ. उमाशंकर विश्वकर्मा ने बताया कि बीजू आम स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी माना जाता है। इसमें प्राकृतिक रेशा अधिक होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत करता है। सीमित मात्रा में सेवन करने पर यह शुगर नियंत्रण में भी सहायक माना जाता है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

    सम्होता निवासी किसान उमानाथ सिंह ने बताया कि काफी प्रयासों के बाद उनके बगीचे में सीपिया आम का पौधा बच पाया है। वहीं मंझवलिया निवासी संतोष कुमार सिंह ने कहा कि सीपिया और बीजू आम आज भी बचपन की मिठास की याद दिलाते हैं। 

    माड़ीपुर कला गांव के पूर्व मुखिया जयप्रकाश सिंह ने कहा कि सीपीया आम अब दुर्लभ होता जा रहा है और इसके संरक्षण के लिए किसानों के साथ सरकार को भी आगे आने की जरूरत है।

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