Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    107 साल बाद बदहाली से बाहर निकला शीतलपुर विद्यालय, भूमिदान से खुला नए भवन का रास्ता

    Updated: Sat, 31 Jan 2026 03:21 PM (IST)

    सारण के तरैया स्थित 107 वर्षीय शीतलपुर प्राथमिक विद्यालय की बदहाली दैनिक जागरण की खबर से उजागर हुई। भूमि की अनुपलब्धता नए भवन निर्माण में बाधा थी। शिक ...और पढ़ें

    भूमिदान से खुला नए भवन का रास्ता

    भूमिदान से खुला नए भवन का रास्ता

    HighLights

    1. 107 साल से जर्जर शीतलपुर विद्यालय को मिली नई उम्मीद।

    2. दैनिक जागरण की खबर के बाद प्रशासन हुआ सक्रिय।

    3. चार ग्रामीणों ने 6.51 डिसमिल भूमि दान कर रास्ता खोला।

    राणा प्रताप सिंह, तरैया (सारण)। तरैया प्रखंड के डुमरी पंचायत अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय शीतलपुर की दशकों पुरानी बदहाली अब इतिहास बनने की कगार पर है। वर्षों से जर्जर भवन और टीन की छत के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चों की पीड़ा जब दैनिक जागरण के माध्यम से सामने आई, तो इसने प्रशासन और समाज दोनों को झकझोर कर रख दिया। अब 107 वर्ष पुराने इस विद्यालय को नई उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है।

    1918 से चला आ रहा संघर्ष, टीन के नीचे पढ़ते रहे बच्चे

    वर्ष 1918 में स्थापित प्राथमिक विद्यालय शीतलपुर लंबे समय से जर्जर अवस्था में संचालित हो रहा था। कक्षा एक से पांच तक के लगभग 153 बच्चे हर दिन असुरक्षित माहौल में पढ़ाई कर रहे थे। बरसात में टपकती छत और तेज हवा में उड़ते टीन बच्चों व शिक्षकों के लिए हमेशा खतरा बने रहते थे।

    दैनिक जागरण की खबर से टूटी प्रशासन की नींद

    04 अगस्त 2025 को दैनिक जागरण में “तरैया में 107 वर्ष बाद भी नहीं बदला विद्यालय का हाल, टीन के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे” शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई। खबर के प्रकाशन के महज दो दिन बाद 06 अगस्त 2025 को निवर्तमान प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ज्ञान रंजन विद्यालय पहुंचे और हालात का स्थलीय निरीक्षण किया।

    भवन निर्माण में सबसे बड़ी बाधा बनी जमीन

    निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि नए भवन निर्माण में सबसे बड़ी समस्या भूमि की अनुपलब्धता है। इसी कारण वर्षों से भवन निर्माण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी थी। इसके बाद समाधान की दिशा में विद्यालय परिवार ने समाज को साथ जोड़ने की पहल शुरू की।

    खबरें और भी

    शिक्षकों की पहल, समाज ने बढ़ाया हाथ

    प्रधानाध्यापक समूल रंजन के नेतृत्व में शिक्षक नग नारायण सिंह, सुधांशु कुमार, अजय कुमार साह और शशि शरण दास ने ग्रामीणों और रैयत परिवारों से संपर्क किया। बच्चों के सुरक्षित भविष्य का हवाला देते हुए शिक्षकों की अपील रंग लाई।

    चार रैयतों ने किया 6.51 डिसमिल भूमि दान

    रैयत संजय सिंह, नवल सिंह, केशव सिंह और शंकर सिंह ने विद्यालय भवन निर्माण के लिए कुल 6.51 डिसमिल भूमि दान करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। इस संबंध में 17 दिसंबर 2025 को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा), सारण को लिखित सूचना दी गई।

    शिक्षा विभाग ने दिखाई तत्परता

    भूमिदान की सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग हरकत में आया। 21 जनवरी 2026 को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (समग्र शिक्षा) ने तरैया अंचलाधिकारी को भूमि सीमांकन कर जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। प्रक्रिया पूरी होते ही भवन निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

    भूमिदान बना समाज के लिए मिसाल

    आज के स्वार्थपूर्ण दौर में बच्चों के नाम निजी भूमि दान करना समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है। इस पहल की शीतलपुर के ग्रामीणों के साथ-साथ प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि धनवीर कुमार सिंह विक्कु और मुखिया सुशील कुमार सिंह ने भी सराहना की है।

    107 साल बाद बदहाली से उम्मीद की ओर

    यह कहानी केवल एक विद्यालय के भवन निर्माण की नहीं, बल्कि उस सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल है, जहां पत्रकारिता, प्रशासन और समाज के सहयोग से 107 वर्षों पुरानी बदहाली अब विकास और उम्मीद में बदलती दिख रही है।