बिहार में जमीन रजिस्ट्री की व्यवस्था हुई पेपरलेस, निबंधन के बाद मोबाइल पर मिलेगी डिजिटल डीड
Land Registration Online: बिहार सरकार ने जमीन रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस कर दिया है! इसकी शुरुआत शिवहर निबंधन कार्यालय में भी हो गई है। अ ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, शिवहर। Bihar Paperless Land Registry: बिहार सरकार व राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार कार्य चल रहे हैं।
इसी क्रम में अब एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब व्यवस्था को पूरी तरह से पेपरलेस कर दिया गया है। शिवहर का निबंधन कार्यालय इसी राह पर चल पड़ा है।
हाईटेक हो गई व्यवस्था
सरकार के संकल्प के अनुरूप शिवहर निबंधन कार्यालय की व्यवस्था सोमवार से पूरी तरह डिजिटल हो गई। हालांकि इसका प्रभाव पहले दिन इस रूप में देखने को मिला कि केवल एक ही निबंधन कार्य को पूरा किया जा सका।
शिवहर जिला निबंधन कार्यालय के पेपरलेस होने के बाद रजिस्ट्री में कमी को जागरूकता के अभाव के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार की अपेक्षा की जा रही है।
कागजात की जगह डिजिटल प्रक्रिया
इस संबंध में जिला निबंधन पदाधिकारी नीरज कुमार ने कहा कि राज्य सरकार और विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार ही पूरी प्रक्रिया डिजिटलाइज्ड की गई है। देखा जाए तो कार्य पहले की तरह ही हो रहा है, लेकिन इसमें कागजात की जगह डिजिटल रूप से निबंधन हो रहा है।
सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद डीड भी डिजिटली ही दिए जाएंगे। व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह सबकुछ शुरू किया गया है। इससे एक ही जमीन का दो बार निबंधन या फिर विवादित जमीन किसी को बेच देने जैसी आम परेशानी पर रोक लगाना संभव हो सकेगा।
गलत तरीके से जमीन निबंधन पर रोक लगाया जा सकेगा। उन्होंने लोगों को किसी भी प्रकार की चिंता से दूर रहने को कहा है।
घर बैठे मिलेगी डीड
शिवहर के निबंधन कार्यालय के पेपरलेस होने के बाद से अब ऑफलाइन कागजात बंद हो गए हैं। खरीदार-विक्रेता को सीधे मोबाइल, ईमेल व वाट्सएप पर डिजिटल डीड का पीडीएफ लिंक मिल रहा है।
सबसे महत्वपूर्ण चीज बिचौलियों की भूमिका का खत्म होना है। अब जमीन के निबंधन के लिए अलग से विषय या डीड लिखवाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
जैसे ही कोई खरीदार और विक्रेता ऑनलाइन फार्म भरेंगे, पूरी डीड का ड्राफ्ट सॉफ्टवेयर के माध्यम से अपने आप तैयार हो जाएगा। वहीं रजिस्ट्री पूर्ण होने के बाद डीड का पीडीएफ लिंक रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर, ईमेल और वाट्सएप पर भेज दिया जाता है।
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अब खोने का भी डर नहीं
सभी जरूरी दस्तावेज हमेशा के लिए डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रखे जाते हैं। इस सिस्टम की एक और विशेषता है कि इससे कार्यालय में लंबी लाइन नहीं लगती है।
फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एक और व्यवस्था की गई है। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए पहचान आधारित सत्यापन प्रणाली का उपयोग शुरू किया गया है। इसमें खरीदार और विक्रेता की प्रामाणिकता डिजिटल रूप से तुरंत स्थापित होती है।
मोबाइल से सबकुछ
इस नई तकनीक ने जमीन के दस्तावेजों के रखरखाव और उनके खोने के डर को भी पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। जैसे ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया काउंटर पर पूरी होगी, मूल डीड की पीडीएफ कॉपी का एक सुरक्षित डाउनलोड लिंक सीधे खरीदार और विक्रेता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेज दिया जा रहा है।
आम नागरिक अब बिना निबंधन कार्यालय का चक्कर काटे घर में बैठकर ही इसे एक क्लिक में डाउनलोड कर सकेंगे। अब मूल रजिस्ट्री पेपर के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने या हफ्तों इंतजार करने की बाध्यता भी खत्म हो जाएगी।
बिचौलियों से मुक्ति
इस तरह से देखा जाए तो नई व्यवस्था से डरने की जगह इसे अपनाना लोगों के हित में है। इसके लाभ ही लाभ हैं।रजिस्ट्री आफिस का बार-बार चक्कर लगाने और बिचौलियों के चंगुल से फंसने से मुक्ति मिल रही है।
समय और पैसे की बचत हो रही है। पूरी प्रक्रिया के आनलाइन और डिजिटल मोड में आ जाने से जमीन की रजिस्ट्री में होने वाली धोखाधड़ी खत्म हो जाएगी।
यह एक तरह से बड़ी राहत की तरह है। ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं जब लोग जमीन माफिया के चंंगुल में फंसकर अपनी पूरी जिंदगी की कमाई खो देते हैं।