यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 24, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Bihar Jamin Survey: भूमि सर्वे में जमीन मालिकों को हो रही थी परेशानी, इस जिले के डीएम ने निकाला गजब का उपाय
Bihar Land Survey शिवहर जिले में जमीन मालिकों को भूमि सर्वे से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था लेकिन जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने इसके ...और पढ़ें

HighLights
- समाहरणालय में आयोजित बैठक में जिलाधिकारी ने दिए निर्देश
- जनता दरबार से संबंधित आवेदन पर त्वरित कार्रवाई का निर्देश
प्राथमिकता के आधार पर भूमि विवाद के मामलों का निष्पादन
एसडीओ व एसडीपीओ को मिला निर्देश
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आसान भाषा में कैथी लिपि के बारे में जानें
कैथी लिपि में खतियान होने से इसे पढ़ पाना कठिन हो रहा है। ऐतिहासिक ब्राह्मी लिपि कैथी को कायथी या कायस्थी भी कहा जाता है। इसका उपयोग 600 साल पूर्व से शुरू होने का अनुमान है। देश में मुस्लिम शासकों के काल में कायस्थ समुदाय के लोग कैथी में ही जमीन से जुड़े दस्तावेज लिखते थे।
इनके अलावा, मुस्लिम उर्दू-फारसी में लिखते थे। इस तरह अंग्रेज शासनकाल से लेकर आजादी के बाद भी जमीनी दस्तावेज लेखन कैथी में चलता रहा। कैथी लिपि में अक्षरों के ऊपर शिरोरेखा नहीं होती है। इसमें सभी अक्षर एक साथ लिखे जाते हैं। इसमें हर्स्व ''इ'' और दीर्घ ''ऊ'' की मात्रा भी नहीं लगाई जाती। इसमें संयुक्त अक्षर जैसे– ऋ, क्ष, त्र, ज्ञ, श्र आदि का प्रयोग नहीं किया जाता है। इतना ही नहीं, शब्द या वाक्य भी नहीं बनाया जाता है, इसीलिए आज इसे पढ़ने में कठिनाई आती है।