4 जिलों के मरीजों का सहारा पर खुद 'बीमार', शेखपुरा सदर अस्पताल में कई विभागों में नहीं हैं डॉक्टर
शेखपुरा सदर अस्पताल में चिकित्सकों की भारी कमी है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए निजी क्लीनिक या दूसरे शहरों का रुख करना पड़ रहा है। ...और पढ़ें

शेखपुरा सदर अस्पताल में कई विभागों में नहां हैं डॉक्टर
HighLights
शेखपुरा सदर अस्पताल में चिकित्सकों के एक-तिहाई पद खाली।
35 स्वीकृत पदों में से केवल 22 चिकित्सक कार्यरत, विशेषज्ञ नहीं।
चार जिलों के मरीजों को इलाज में भारी परेशानी हो रही।
अरविंद कुमार, शेखपुरा। शेखपुरा सदर अस्पताल के शुरू हुए डेढ़ दशक से अधिक का समय हो गया,मगर सरकार अभी तक यहां स्वीकृत पदों के अनुरूप चिकित्सकों की तैनाती नहीं कर पाई है।
चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को सुलभ और सरल इलाज नहीं मिल पाता है,फलतः मरीजों को लाचारी में निजी क्लीनिक या फिर बिहारशरीफ या पटना जाना पड़ता है।
एक-तिहाई पद खाली
सदर अस्पताल शेखपुरा में चिकित्सक के जीतने पद स्वीकृत हैं,उसमें एक-तिहाई पद खाली पड़ी हैं। सदर अस्पताल में जो चिकित्सक पदस्थापित हैं,उसमें भी कई लंबी छुट्टी पर लंबे समय से अनुपस्थित हैं। सबसे बड़ी बात है शेखपुरा का सदर अस्पताल चार जिलों के मरीजों को सुविधा प्रदान करता है।
शेखपुरा के अलावे पड़ोसी जिलों नवादा,जमुई तथा लखीसराय जिलों के बड़े क्षेत्र के मरीज निकट रहने के कारण इलाज कराने (ओपीडी और इमरजेंसी) कराने यहीं आते हैं।
30 प्रतिशत मरीज पड़ोसी जिलों के
सदर अस्पताल के प्रबंधक धीरज कुमार कहते हैं यहां ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 400 मरीजों का इलाज होता है,जिसमें 30 प्रतिशत मरीज पड़ोसी जिलों के रहते हैं। यहां साफ-सफाई और बेहतर चिकित्सा सुविधा देखकर पड़ोसी जिलों के मरीज पहुंचते हैं।
चिकित्सकों की प्रयाप्त संख्या नहीं रहने के कारण अतिरिक्त बोझ झेलना पड़ता है। सदर अस्पताल में चिकित्सकों का 35 पद स्वीकृत हैं,जिसमें अभी 22 पदस्थापित हैं। मगर विशेषज्ञ चिकित्सक एक भी नहीं हैं।
कई महत्वपूर्ण पद खाली
विशेषज्ञ चिकित्सकों में हड्डी,शिशु,चर्म,जेनरल सर्जन,मूर्छक जैसे महत्वपूर्ण पद खाली हैं। इसके कारण ओपीडी के साथ इमरजेंसी वाले मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।
बताया गया सदर अस्पताल के लिए सरकार ने 30 वर्ष पहले की जरूरत के अनुरूप चिकित्सकों का पद स्वीकृत किया था। अब जनसंख्या बढ्ने से रोगियों की संख्या भी बढ़ी है,जिससे सदर अस्पताल पर बोझ बढ़ा है,मगर पदों की संख्या वहीं पर स्थिर बनी हुई है।
चिकित्सक की कमी से ओपीडी में एक चिकित्सक को प्रतिदिन 100 से अधिक मरीजों को देखना पड़ता है,जिसके कारण वे मरीजों पर उचित समय नहीं दे पाते हैं। चिकित्सकों की कमी का यह हाल जिला के सभी सरकारी अस्पतालों में है।
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सदर अस्पताल सहित जिला के सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के साथ पारा मेडिकल स्टाफ की कमी है। सदर अस्पताल में कई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। इसके लिए सरकार के उच्चधिकारी का ध्यान लिखित और मौखिक दोनों माध्यमों से आकृष्ट कराया गया है। इस समस्या का शीघ्र हल निकलने की आशा है। – डॉ अशोक कुमार सिंह,एसीएमओ।