नेपाल सीमा से सटे भारतीय इलाकों में 135 की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें, ₹4079.5 करोड़ होंगे खर्च
भारतीय रेलवे नेपाल सीमा से सटे भारतीय इलाकों से गुजरने वाली ट्रेनों की रफ्तार 135 किमी प्रति घंटा करने की तैयारी में है। ...और पढ़ें

नेपाल सीमा से सटे रेलखंड पर 135 KM प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें (AI Generated Image)

समय कम है?
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संवाद सहयोगी, सीतामढ़ी। नेपाल सीमा से सटे भारतीय इलाकों से गुजरने वाली ट्रेनें शीघ्र ही 135 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगी। इसके लिए भारतीय रेलवे ने आवश्यक कवायद तेज कर दी है। रेल लाइन दोहरीकरण का काम शीघ्र शुरू होने वाला है।
मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-दरभंगा-रक्सौल-नरकटियागंज रेलखंड दोहरीकरण राज्य की सबसे बड़ी रेल परियोजना है, जिसे जमीन पर उतारने के लिए विभाग ने पहल शुरू कर दी है।
255 किमी लंबी रेल दोहरीकरण परियोजना की डीपीआर तैयार कर ली गई है। सामरिक और पर्यटकीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इस परियोजना को इमरजेंसी वर्क में शामिल किया है।
वर्तमान में उत्तर बिहार में ट्रेनों की अधिकतम स्वीकृत रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा है। रेल लाइन दोहरीकरण और सुदृढ़ीकरण से इस नए ट्रैक को मजबूत कर ट्रेनों की रफ्तार 135 किलोमीटर प्रतिघंटा की जाएगी। इस पूरी परियोजना पर 4079.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
रेलवे बोर्ड ने राशि की मंजूरी दे दी है। रेल दोहरीकरण काम की जिम्मेदारी अम्बेला वर्क सैंक्शन नामक कंपनी को दी गई है। ट्रेनों की उच्च गति और लोड सहने के लिए 60 किलोग्राम वाले रेल लाइन यानी भारी पटरी का इस्तेमाल किया जाएगा।
दिल्ली की एजेंसी ने पूरा किया लोकेशन सर्वे का काम
यह रेलखंड सीधे तौर पर भारत-नेपाल सीमा के संवेदनशील इलाकों को जोड़ता है। इससे सीमा पर सेना और रसद की आवाजाही तेज होगी। देश की सामरिक शक्ति को मजबूत करने वाली इस रेल परियोजना से नेपाल से सटे सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण के अलावा दरभंगा व मुजफ्फरपुर में रेल कनेक्टिविटी में सुधार होगा।
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दिल्ली की एजेंसी मैत्रीक्स जियो सल्यूशन ने फाइनल लोकेशन सर्वे का काम पूरा कर लिया है। वर्तमान में इस लाइन की क्षमता का 91.36 प्रतिशत इस्तेमाल हो रहा है, जो मेंटेनेंस ब्लॉक के दौरान 107.48 प्रतिशत तक पहुंच जाता है।
अनुमान है कि 2029 तक इस लाइन की क्षमता 242.85 प्रतिशत हो जाएगी। यानी जरूरत से ढाई गुणा ज्यादा दबाव बढ़ेगा।
सिंगल लाइन होने के कारण रोजाना औसतन 13 मालगाड़ियों को 120 मिनट तक खड़े रहना पड़ता है। 11 जोड़ी पैसेंजर व एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ 23 से 25 मालगाड़ी इस लाइन से होकर प्रतिदिन गुजरती है। दोहरीकरण के बाद पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों की संख्या बढ़ जाएगी जो प्रतिदिन बिना रोके चल सकती हैं।
17 नदियों पर बनेंगे 307 पुल-पुलिया
इस परियोजना के तहत 17 नदियों व 288 नालों पर 307 पुल व पुलियों का निर्माण कराया जाएगा। यह रेल लाइन मुजफ्फरपुर, नरकाटियागंज, रक्सौल, सीतामढ़ी व दराभंगा समेत पांच जंक्शन, 24 स्टेशन व 17 हाल्ट से होकर गुजरेगी।