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    सीतामढ़ी में 834 साल पुराने श्रीराम जानकी मंदिर का होगा जीर्णोद्धार, CM सम्राट चौधरी करेंगे भूमि पूजन

    Updated: Mon, 20 Apr 2026 01:00 PM (IST)

    सीतामढ़ी के राघोपुर बखरी स्थित 834 वर्ष पुराने श्रीराम जानकी मंदिर के जीर्णोद्धार का मार्ग प्रशस्त हो गया है। रामायण रिसर्च काउंसिल मंदिर का जीर्णोद्ध ...और पढ़ें

    श्रीराम जानकी मंदिर। (जागरण)

    श्रीराम जानकी मंदिर। (जागरण)

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    संवाद सहयोगी, सीतामढ़ी। मां जानकी जन्मभूमि सीतामढ़ी के राघोपुर बखरी स्थित 834 वर्ष पुराने प्रसिद्ध श्रीराम जानकी मंदिर के अस्तित्व रक्षा का मार्ग प्रशस्त हो गया हैं।

    देश के सांस्कृतिक मूल्यों की विरासतों की हिफाजत के लिए संकल्पित रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा इस मंदिर के जीर्णोद्धार के साथ ही मंदिर की करीब 12 एकड़ भूखंड पर दिव्य अलौकिक शक्तिपीठ व श्री जानकी शोध संस्थान की स्थापना कराई जाएगी।

    प्रथम चरण में जानकी नवमी के अवसर पर आगामी 25 अप्रैल को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा प्रस्तावित जीर्णोद्धार व निर्माण कार्य को लेकर विधिवत भूमि पूजन व शिलान्यास किया जाएगा।

    इसके बाद दूसरे चरण में 12 एकड़ भूमि पर 51 शक्ति पीठ से ज्योत लाकर महाशक्ति ज्योत की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही भारत के विभिन्न राज्यों के प्रमुख मंदिरों से भी मिट्टी व जल लाकर तथा नलखेड़ा मध्यप्रदेश माता बगलामुखी सिद्धपीठ से ज्योत लाकर माता सीता को श्री भगवती रूप में स्थापित किया जाएगा।

    रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से सीतामढ़ी के राघोपुर बखरी गांव में भव्य सीता मंदिर बनाने का प्रयास 2018 से ही किया जा रहा है।

    राममंदिर बनाने वाले वास्तुकार ने किया निरीक्षण

    अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर के वास्तुकार रहे सोमपुरा 2022 में सीतामढ़ी आए थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जगहों का निरीक्षण किया था। मंंदिर निर्माण को लेकर रामायण रिसर्च काउंसिल की ओर से पहले ही 51 शक्तिपीठों से ज्योत लाकर सीतामढ़ी में महाशक्ति ज्योत की स्थापना का निर्णय लिया जा चुका है।

    51 शक्ति-पीठों, इंडोनेशिया, बाली, अशोक वाटिका से मिट्टी एवं जल लाकर तथा नलखेड़ा (मध्य प्रदेश) में माता बगलामुखी सिद्ध पीठ से ज्योत लाकर माता सीताजी को श्रीभगवती के रूप में स्थापित किया जाएगा।

    प्रमुख मंदिरों से लाया जाएगा जल और मिट्टी

    इसके साथ ही भारत के विभिन्न राज्यों के प्रमुख मंदिरों से भी मिट्टी एवं जल लाकर माताजी के गर्भ-गृह को विकसित किया जाएगा। रामायण रिसर्च काउंसिल के अंंतर्गत पहले ही श्रीभगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति का गठन हो चुका है।

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    मंदिर निर्माण स्थल का रामायण रिसर्च काउंसिल के अध्यक्ष रहे चंद्रशेखर मिश्र, अंतर राष्ट्रीय महासचिव कुमार सुशांत के साथ जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर हिमायन योगी स्वामी विरेंद्रानंद जी महाराज, ज्योतिषाचार्य आचार्य संतोष पांडेय, उत्तर प्रदेश व्यापारिक कल्याण बोर्ड के चेयरमैन रविकांत गर्ग, कौंसिल की सीता सखी समिति की संयोजक स्वामी अराध्या सरस्वती, रामायण कथा वाचिका साध्वी लक्ष्मी माता वर्ष 2022 में तत्कालीन सांसद व श्री भगवती सीता तीर्थ क्षेत्र समिति के अध्यक्ष सुनील कुमार पिंटू के साथ निरीक्षण कर चुकी हैं।

    नहीं आ पाए मुख्य सचिव

    काउंसिल के जिला संगठन प्रभारी नीरज कुमार गोयनका ने बताया कि शनिवार को बिहार सरकार के मुख्य सचिव द्वारा राघोपुर बखरी मन्दिर व प्रस्तावित निर्माण स्थल का मुआयना किया जाना प्रस्तावित था, परंतु समयाभाव के कारण यह संभव नहीं हो सका।

    काउंसिल द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर आवश्यक तैयारी शुरू कर दी गई हैं। कार्यक्रम स्थल पर पंडाल निर्माण कार्य शुरू किया जा चुका हैं। सदस्य दीपक मस्करा व रौनक हिसारिया की देखरेख में कार्य कराया जा रहा हैं। वहीं अन्य सदस्य भी अपने जिम्मेदारियों में लगे हैं।

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