सीतामढ़ी में MDM घोटाला: पत्नी को बनाया वेंडर, कागजों पर खिलाया ज्यादा बच्चों को खाना; हेडमास्टर नपे
सीतामढ़ी के सोनबरसा प्रखंड के एक मध्य विद्यालय में मध्याह्न भोजन योजना में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। प्रधानाध्यापक पर अपनी पत्नी को एमडीएम वेंडर ...और पढ़ें

सीतामढ़ी में MDM घोटाला, पत्नी को बनाया वेंडर; कागजों पर खिलाया ज्यादा बच्चों को खाना (AI Generated Image)
HighLights
प्रधानाध्यापक पर पत्नी को एमडीएम वेंडर बनाने का आरोप।
विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति में बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई।
वित्तीय अनियमितताओं पर शिक्षा विभाग ने मांगा स्पष्टीकरण।
जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी। मध्याह्न भोजन योजना (Mid-Day Meal Yojana) में अनियमितताओं को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। सोनबरसा प्रखंड की मध्य विद्यालय बसहिया हिंदी में निरीक्षण के दौरान वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों के कई मामले सामने आए हैं।
जांच में प्रधानाध्यापक पर अपनी पत्नी को एमडीएम का वेंडर बनाकर भुगतान कराने, वास्तविक उपस्थिति से अधिक बच्चों की हाजिरी दर्ज करने और ई-शिक्षा कोष के आंकड़ों में विसंगति रखने के आरोप लगे हैं।
मामले को गंभीर मानते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मध्याह्न भोजन योजना सुजीत कुमार दास ने प्रधानाध्यापक से 24 घंटे के भीतर साक्ष्य सहित स्पष्टीकरण मांगा है।
विभागीय पत्र के अनुसार, नौ जुलाई को जिला लेखापाल ने विद्यालय का निरीक्षण किया था। जांच में पाया गया कि निरीक्षण के समय विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक 88 तथा कक्षा छह से आठ तक 104, यानी कुल 192 छात्र मौजूद थे, जबकि पिछले छह दिनों की औसत उपस्थिति 283 छात्र दर्ज की गई थी।
इससे वास्तविक उपस्थिति और एमडीएम लाभार्थियों की संख्या में बड़ा अंतर सामने आया। निरीक्षण में ई-शिक्षा कोष पोर्टल और विद्यालय के अभिलेखों के आंकड़े भी मेल नहीं खाए।
विभाग के अनुसार, अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच ऑनलाइन नामांकन और विद्यालय के रिकार्ड में लाभान्वित छात्रों की संख्या में अंतर पाया गया। विभाग ने इस पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। सबसे गंभीर आरोप एमडीएम वेंडर के चयन को लेकर है।
जांच में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर विभाग ने पाया कि रितु देवी, जिन्हें एमडीएम का वेंडर बनाया गया है, वे प्रधानाध्यापक की पत्नी हैं। उनके माध्यम से एक माह में 53,873 रुपये का भुगतान किया गया। इसके अलावा राहुल किराना स्टोर्स के नाम से प्रस्तुत बिलों की भी जांच की जा रही है।
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विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 एवं 2026-27 में प्राप्त राशि के उपयोग का पूरा ब्यौरा, बैंक स्टेटमेंट, कैशबुक, व्यय विवरणी और अन्य वित्तीय अभिलेख तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।
हालांकि, निरीक्षण के दौरान छात्रों और सहायक शिक्षकों ने बताया कि विद्यालय में मेन्यू के अनुसार भोजन, अंडा और फल नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाता है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने प्रधानाध्यापक को 24 घंटे के भीतर सभी आरोपों पर साक्ष्य सहित जवाब देने का निर्देश दिया है। साथ ही बैंक स्टेटमेंट, कैशबुक, पोषाहार पंजी, चखना पंजी, वेंडर भुगतान से संबंधित पीपीए, बच्चों की उपस्थिति पंजी तथा एमडीएम योजना से जुड़े सभी अभिलेख कार्यालय में जमा करने को कहा गया है। समय पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मध्याह्न भोजन योजना सुजीत कुमार दास ने कहा, निरीक्षण में सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लिया गया है।
प्रधानाध्यापक से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण और सभी वित्तीय दस्तावेज मांगे गए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सरकारी राशि के उपयोग में पारदर्शिता और बच्चों के हितों की रक्षा विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।