सीतापुरम टाउनशिप: जमीन खरीद-बिक्री की राह खुली, मगर सख्त नियमों से उड़ी किसानों की नींद!
सीतामढ़ी में सीतापुरम टाउनशिप के लिए चिह्नित जमीन की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटा दी गई है, जिससे किसानों को तात्कालिक राहत मिली है। ...और पढ़ें

जमीन खरीद-बिक्री की राह खुली, मगर सख्त नियमों से उड़ी किसानों की नींद! (AI Generated Image)

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जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी। सीतापुरम टाउनशिप को लेकर जिले में चिह्नित की गई जमीन की खरीद-बिक्री पर लगे प्रतिबंध में भले ही छूट दी गई हो, लेकिन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा अधिसूचित 'बिहार रैयती भूमि क्रय-विक्रय नीति 2026' के प्रावधानों के अनुरूप ही खरीद-बिक्री अथवा लीज संबंधी शर्तों को लेकर रैयतों में असंतोष व्याप्त है।
सीतापुरम टाउनशिप विकसित करने को लेकर जिले के 32 राजस्व गांवों को चिह्नित किया गया है। कोर क्षेत्र में 532 एकड़ जमीन एवं विशेष क्षेत्र में दस हजार एकड़ जमीन को शामिल किया गया है।
हालांकि, चिह्नित जमीन पर क्रय-विक्रय व लीज संबंधी लगाए गए तत्काल प्रतिबंध में दी गई ढील के बाद ग्रामीणों द्वारा जारी आंदोलन थम गया है (या आंदोलन पर ब्रेक लग गया है), लेकिन ग्रामीणों में अब भी असंतोष व्याप्त है।
नई बिहार रैयती भूमि क्रय-विक्रय नीति 2026 के मानकों का पालन करने में होने वाली कठिनाई को लेकर ग्रामीणों में ऊहापोह की स्थिति है।
हालांकि, बिहार सरकार द्वारा सीतामढ़ी में प्रस्तावित सीतापुरम सैटेलाइट टाउनशिप क्षेत्र में जमीनों की खरीद-बिक्री पर लगी रोक को हटाए जाने से रैयतों ने राहत की सांस जरूर ली है। इससे वे विशेष परिस्थिति में अपनी जमीन की खरीद-बिक्री कर सकेंगे।
नियम व शर्तों का पालन करने में होगी परेशानी:
बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के अंतर्गत सीतापुरम टाउनशिप को लेकर चिह्नित जमीन की खरीद-बिक्री हो सकेगी। इसके तहत किसान व रैयत अपनी तात्कालिक वित्तीय जरूरतों जैसे- शादी, शिक्षा, इलाज आदि के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बाद जमीन बेच सकेंगे।
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नरेश राम, देवेंद्र सिंह, पूर्व सरपंच नवीन सिंह आदि बताते हैं कि आंदोलन के दौरान भारी प्रदर्शन और समाहरणालय का घेराव किया गया था।
सांसद देवेश चंद्र ठाकुर और जिला प्रशासन द्वारा किसान प्रतिनिधियों को उचित मुआवजे और वार्ता का आश्वासन दिया गया था। सरकार ने सशर्त ढील तो दी है लेकिन, नियम व शर्तों का अनुपालन करने की प्रक्रिया जटिल है। इसे पूरा करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
सरकार की नई नीति के मुताबिक, किसानों को शहरी क्षेत्र के लिए बाज़ार मूल्य या सर्कल रेट (जो भी अधिक हो) उसका दो गुना और ग्रामीण भूमि के लिए चार गुना मुआवजा व 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
क्या है अधिसूचित बिहार रैयती भूमि क्रय नीति?
बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026, राज्य सरकार द्वारा केंद्र और राज्य की लोकहित परियोजनाओं के लिए निजी जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए अधिसूचित की गई एक महत्वपूर्ण नीति है।
इसके तहत जिला पदाधिकारी को 100 करोड़ रुपये तक की रैयती भूमि की खरीद को सीधे मंजूरी देने का पूर्ण अधिकार दिया गया है। इसमें किसानों और भू-स्वामियों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा देने के लिए जमीन की कुल कीमत पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
पूर्व में भी दिया गया था आश्वासन:
आंदोलनरत रैयतों व किसानों को पूर्व में भी जिलाधिकारी रिची पांडेय ने बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के प्रावधान के तहत जमीन खरीद-बिक्री को लेकर आश्वासन दिया था।
अब सरकार ने भी फैसला लिया है कि यह जमीन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के स्तर से अधिसूचित बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के अंतर्गत बेची जा सकेगी।
साथ ही, राज्य निवेश प्रोत्साहन परिषद के स्तर से अनुमोदित निवेश परियोजनाओं के लिए संबंधित निवेशक को जमीन की खरीद-बिक्री करने की अनुमति प्रदान करने की भी स्वीकृति दी गई है। इसके तहत भू-स्वामियों की तात्कालिक वित्तीय आवश्यकताएं पूरी की जा सकेंगी।