क्या आपके बच्चों के शिक्षकों को कक्षा प्रबंधन की जानकारी है? सीतामढ़ी में कौशल विकास पर काम शुरू
Bihar Education Department: सीतामढ़ी के डुमरा स्थित डायट में 13 से 17 जुलाई तक पांच दिवसीय आवासीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ है। इसका उद्देश् ...और पढ़ें

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन प्रभारी प्राचार्य कुमानी नेहा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। फोटो: जागरण
HighLights
सीतामढ़ी में पांच दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू।
कक्षा प्रबंधन, गतिविधि आधारित शिक्षण पर मुख्य फोकस।
प्राथमिक व मॉडल स्कूल के शिक्षक ले रहे भाग।
जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी। Teacher Training Classroom Management: सरकारी विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और शिक्षकों के शैक्षणिक कौशल को निखारने के लिए एक बड़ी पहल की गई है।
डुमरा स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में सोमवार से पांच दिवसीय आवासीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है।
13 से 17 जुलाई तक चलने वाले इस विशेष शिविर में सरस्वती विद्या निकेतन के कक्षा 9 से 12 (माडल स्कूल) और विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों के कक्षा 3 से 5 के शिक्षक मुख्य रूप से भाग ले रहे हैं।
इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन डायट की प्रभारी प्राचार्य कुमानी नेहा ने अन्य वरिष्ठ व्याख्याताओं के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई शिक्षक कितना भी विद्वान क्यों न हो, अगर उसका कक्षा प्रबंधन (क्लासूम मैनेजमेंट) सही नहीं है, तो उसकी विद्वता बच्चों के काम नहीं आ पाती।
शिक्षक का संवेदनशील होना जरूरी
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्रभारी प्राचार्य कुमानी नेहा ने कहा कि शिक्षकों की क्षमता, दक्षता और उनके भीतर उत्तरदायित्व बोध को मजबूत बनाने के लिए ही इस गहन प्रशिक्षण का खाका तैयार किया गया है।
इससे शिक्षकों की कार्यकुशलता बढ़ेगी, जिसका सीधा और सकारात्मक असर विद्यार्थियों के सीखने के स्तर (लर्निंग आउटकम) पर दिखाई देगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कक्षा 3 से 5 की अवधि बच्चों की पूरी शैक्षणिक यात्रा का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण चरण होती है।
इसी उम्र में बच्चों के भीतर बुनियादी साक्षरता, गणितीय समझ (न्यूमरेसी) और जीवन भर सीखने की आदत विकसित होती है। इसलिए इन कक्षाओं को संभालने वाले शिक्षकों का आधुनिक तकनीकों से प्रशिक्षित और संवेदनशील होना बेहद आवश्यक है।
इन पद्धतियों पर रहेगा मुख्य फोकस
इस पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को पारंपरिक ढर्रे से अलग हटकर आधुनिक और व्यावहारिक पद्धतियों की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- गतिविधि आधारित शिक्षण (Activity Based Learning): बच्चों को खेल-खेल में और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से कठिन विषय समझाना।
- बाल-केंद्रित शिक्षा: शिक्षा को पूरी तरह बच्चों की मानसिक क्षमता और रुचि के अनुरूप ढालना।
- प्रभावी कक्षा प्रबंधन: क्लास के भीतर अनुशासन बनाए रखते हुए हर बच्चे पर व्यक्तिगत ध्यान केंद्रित करना।
- नवाचार और एनईपी (NEP): नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण में नए प्रयोगों, आधुनिक मूल्यांकन प्रणालियों और प्रभावी कक्षा संचालन के व्यावहारिक पहलुओं को लागू करना।
माडल स्कूलों के लिए विशेष सत्र
प्राथमिक शिक्षकों के साथ-साथ माडल विद्यालयों (कक्षा 9 से 12) के शिक्षकों के लिए भी डायट में विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
इन सत्रों में मुख्य रूप से शिक्षकों के भीतर नेतृत्व क्षमता (लीडरशिप क्वालिटी) का विकास करने, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा सुनिश्चित करने, परीक्षा परिणामों में सुधार लाने और किशोरवय विद्यार्थियों की मानसिक व शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप प्रभावी शिक्षण रणनीतियां बनाने पर फोकस किया जा रहा है।
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डायट के ये विशेषज्ञ दे रहे प्रशिक्षण
इस पांच दिवसीय कार्यक्रम को सफल बनाने और शिक्षकों को विषयगत बारीकियां समझाने के लिए डायट के व्याख्याताओं की पूरी टीम जुटी हुई है।
प्रशिक्षण सत्रों में मुख्य रूप से व्याख्याता जमाल अहमद, गणेश राम, अकील अख्तर, मनोज कुमार, नंद किशोर सिंह, विनय कुमार, निर्मल कुमार, अवध किशोर, डॉ. राणा प्रताप, राजीव नयन, सीमी एजार, हरेंद्र राम, अनुनय कुमार, संतोष कुमार, संजीव कुमार झा, मनीष कुमार और नरेंद्र कुमार विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण दे रहे हैं।