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    शीतलहर और कोहरे से आलू की फसल पर मंडराया झुलसा रोग का खतरा, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

    Updated: Sat, 03 Jan 2026 03:29 PM (IST)

    रघुनाथपुर, सिवान में शीतलहर और कोहरे के कारण आलू की फसल पर झुलसा रोग का खतरा मंडरा रहा है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि तापमान में गिरावट ...और पढ़ें

    आलू की फसल पर मंडराया झुलसा रोग का खतरा

    आलू की फसल पर मंडराया झुलसा रोग का खतरा

    HighLights

    1. शीतलहर और कोहरे से आलू पर झुलसा रोग का खतरा।

    2. जल निकासी और सही समय पर सिंचाई महत्वपूर्ण उपाय।

    3. मैन्कोजेब जैसी दवाएं छिड़कने की कृषि विशेषज्ञ की सलाह।

    संवाद सूत्र, रघुनाथपुर (सिवान)। प्रखंड के दियरा व चंवरी इलाके में इन दिनों शीतलहर और लगातार पड़ रही ठंड का असर आलू की फसल पर पड़ने लगा है। तापमान में गिरावट, कोहरा और अधिक नमी के कारण झुलसा रोग फैलने की आशंका बढ़ गई है। यदि समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। 

    रघुनाथपुर कृषि विशेषज्ञ बीटीएम डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि ठंड और नमी के कारण आलू की पत्तियों पर पहले छोटे भूरे धब्बे दिखाई देते हैं, जो धीरे-धीरे काले पड़ जाते हैं। यही लक्षण आगे चलकर पछेती झुलसा रोग का रूप ले लेता है। इस स्थिति में पत्तियां सूखने लगती हैं और कंदों का विकास रुक जाता है। 

    खेत में जल निकासी की व्यवस्था रखने की सलाह

    डॉ. कुमार ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेत में जल निकासी की समुचित व्यवस्था रखें, ताकि खेत में पानी जमा न हो। शीतलहर के दौरान सुबह और देर शाम सिंचाई करने से बचें तथा धूप निकलने पर ही हल्की सिंचाई करें। 

    रोग के प्रारंभिक लक्षण दिखते ही मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यूपी दवा 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। यदि रोग का प्रकोप अधिक हो तो मेटालेक्सिल मैन्कोजेब मिश्रित दवा दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर सात से 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना लाभकारी रहेगा।

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    खेत की मेड़ों पर हल्का धुआं करने की सलाह

    उन्होंने बताया कि छिड़काव साफ स्प्रे पंप से करें और पत्तियों के ऊपर व नीचे दोनों सतहों पर दवा का समान रूप से छिड़काव होना चाहिए। ठंड से फसल को बचाने के लिए रात के समय खेत की मेड़ों पर हल्का धुआं करना भी उपयोगी उपाय है। 

    कृषि विभाग ने रघुनाथपुर प्रखंड के किसानों से अपील की है कि वे मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और समय पर उचित दवा व कृषि सलाह अपनाकर आलू की फसल को झुलसा रोग और शीतलहर के प्रभाव से सुरक्षित करें