सिवान में राम-जानकी पथ की भेंट चढ़े 7227 पेड़, 10599 को उखाड़कर दूसरी जगह लगाएगा वन विभाग
सिवान में राम-जानकी पथ परियोजना के निर्माण से 17,826 पेड़ प्रभावित होंगे, जिनमें से 10,599 पेड़ों को वन विभाग वैज्ञानिक तरीके से पुनर्स्थापित करेगा। प ...और पढ़ें

पेड़ हटाती हुई वन विभाग की टीम। फोटो जागरण
HighLights
राम-जानकी पथ से 17,826 पेड़ प्रभावित होंगे।
वन विभाग 10,599 पेड़ों को वैज्ञानिक विधि से पुनर्स्थापित करेगा।
7,227 कटे पेड़ों की जगह नए पौधे लगाए जाएंगे।
जागरण संवाददाता, सिवान। यूपी के अयोध्या धाम को माता सीता की जन्मभूमि जनकपुर (नेपाल) से जोड़ने वाले महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड हाईवे प्रोजेक्ट राम-जानकी पथ परियोजना के निर्माण के दौरान करीब 17 हजार 826 वृक्ष प्रभावित होंगे।
जिले के पर्यावरण संरक्षण को लेकर यह बड़ा झटका है, लेकिन राहत की बात यह है कि इनमें से 10 हजार 599 वृक्षों को विभाग वैज्ञानिक तरीके से पुनर्स्थापन करेगा।
परियोजना के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए संबंधित विभागों द्वारा पौधों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी वन विभाग के अधिकारी कर रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक पौधों को सुरक्षित बचाया जा सके।
इस संबंध में प्रभारी जिला वन पदाधिकारी मेघा यादव ने बताया कि रामजानकी पथ के निर्माण कार्य के दौरान सड़क चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों की जद में आने वाले पेड़ों की पहचान कर सूची तैयार की गई है।
इनमें गैर वन क्षेत्र में कुल 11 हजार 312 पौधों को चिह्नित किया गया था। इसमें से 8 हजार 892 ऐसे पौधे शामिल थे, जिन्हें तकनीकी मानकों के अनुरूप दूसरी जगह सफलतापूर्वक प्रतिरोपित किया जा सकता है, जबकि 2 हजार 420 पौधों की कटाई की गई है।
वहीं, दूसरी ओर वन क्षेत्र में 6514 पौधे चिह्नित किए गए थे, इनमें से 1707 को पुनर्स्थापित और 4 हजार 807 पौधों की कटाई के लिए चिह्नित किया गया है।
ली जा रही विशेषज्ञों की मदद
डीएफओ ने बताया कि पौधों को पुनर्स्थापित करने के लिए विशेषज्ञों की भी मदद ली जा रही है। मौसम के अनुकूल समय पर इन पौधों के पुनर्स्थापन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
परियोजना के विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिन पौधों का पुनर्स्थापन संभव नहीं है, यानी जितने पौधों की कटाई की जा रही उनके स्थान पर निर्धारित मानकों के अनुसार नए पौधे भी लगाए जाएंगे, ताकि हरित क्षेत्र पर न्यूनतम प्रभाव पड़े।