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    सिवान के 133 मौजों का कैडस्ट्रल खतियान का रिकॉर्ड गायब, राजस्व विभाग ने जनता से मांगी मदद

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 04:01 PM (GMT+05:30)

    सिवान जिले के 133 मौजा के कैडस्ट्रल खतियान गायब होने से भूमि संबंधी मामलों के निपटारे में भारी परेशानी हो रही है। राजस्व विभाग ने आम लोगों से पुराने ख ...और पढ़ें

    सिवान के 133 मौजों का कैडस्ट्रल खतियान का रिकॉर्ड गायब (AI Generated Image)

    सिवान के 133 मौजों का कैडस्ट्रल खतियान का रिकॉर्ड गायब (AI Generated Image)

    HighLights

    1. सिवान जिले में 133 मौजा के कैडस्ट्रल खतियान गायब।

    2. भूमि विवाद, सीमांकन, बंटवारे के निपटारे में कठिनाई।

    3. राजस्व विभाग ने पुराने खतियान जमा करने की अपील की।

    जागरण संवाददाता, सिवान। जिले के करीब 133 मौजा का कैडस्ट्रल सर्वे खतियान उपलब्ध नहीं होने से भूमि से जुड़े मामलों के निपटारे में परेशानी बढ़ रही है। जमीन की वंशावली, पुराने स्वामित्व, सीमांकन, बंटवारा और म्यूटेशन जैसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माने जाने वाले खतियान के अभाव में आम रैयतों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    स्थिति को देखते हुए राजस्व विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि जिन रैयतों के पास पुराने कैडस्ट्रल खतियान की प्रति उपलब्ध है, वे उसकी छायाप्रति संबंधित अंचल कार्यालय या जिला अभिलेखागार में जमा कराएं।

    विभाग ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि प्राप्त खतियानों को सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जाए। साथ ही इन पुराने अभिलेखों की डिजिटल कॉपी तैयार कर सुरक्षित रखने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में भूमि विवादों के समाधान में सहायता मिल सके।

    जिला राजस्व शाखा से मिली जानकारी के अनुसार, सबसे अधिक मौजा के खतियान रघुनाथपुर अंचल के अनुपलब्ध हैं। यहां 17 मौजा का कैडस्ट्रल सर्वे खतियान विभाग के पास नहीं है। इसके बाद भगवानपुर हाट अंचल के 16, दारौंदा और महाराजगंज अंचल के 15-15 मौजा के अभिलेख नहीं मिल रहे हैं।

    इसी तरह सिसवन अंचल के 10, दरौली के नौ, आंदर और गोरेयाकोठी के आठ-आठ, गुठनी के सात, मैरवा और नौतन के पांच-पांच, बड़हरिया और जीरादेई के चार-चार, हसनपुरा के तीन, पचरूखी और सिवान सदर के दो-दो तथा बसंतपुर, हुसैनगंज और लकड़ी नबीगंज अंचल के एक-एक मौजा का खतियान उपलब्ध नहीं है।

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    भूमि स्वामित्व का आधार है कैडस्ट्रल खतियान:

    एडीएम राजस्व प्रमोद कुमार ने बताया कि कैडस्ट्रल खतियान को जमीन के मूल स्वामित्व का सबसे पुराना और महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। पुराने समय में किए गए सर्वे के आधार पर तैयार इस रिकार्ड में भूमि मालिक का नाम, जमीन का क्षेत्रफल और अन्य जरूरी विवरण दर्ज होते हैं।

    न्यायालय में चल रहे कई भूमि विवादों, सीमांकन, बंटवारा और स्वामित्व संबंधी मामलों में इसी रिकार्ड को आधार बनाया जाता है।

    अभिलेख उपलब्ध नहीं रहने से भूमि विवादों के निपटारे में देरी होती है और रैयतों को अपने अधिकार साबित करने में परेशानी आती है। इसी को देखते हुए प्रशासन पुराने खतियानों को जुटाने और उन्हें डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने की दिशा में कदम उठा रहा है।