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    सुपौल जिले में आंधी-बारिश से तबाह हुईं फसलें, किसानों पर टूटा कहर; मुआवजे की मांग

    Updated: Mon, 27 Apr 2026 03:52 PM (IST)

    छातापुर प्रखंड में रविवार रात आई तेज आंधी और बारिश ने किसानों की खड़ी फसलें तबाह कर दीं, जिससे मक्का और सब्जियों को भारी नुकसान हुआ है। ...और पढ़ें

    सुपौल जिले में आंधी-बारिश से तबाह हुई फसलें, किसानों पर टूटा कहर

    सुपौल जिले में आंधी-बारिश से तबाह हुई फसलें, किसानों पर टूटा कहर

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    संवाद सूत्र, छातापुर (सुपौल)। छातापुर प्रखंड क्षेत्र में रविवार की रात आई तेज आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। अचानक बदले मौसम ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    तेज हवा और बारिश के कारण कई जगहों पर मक्का और विभिन्न सब्जियों की फसलें जमीन पर बिछ गईं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    स्थानीय किसानों के अनुसार देर शाम से ही मौसम का मिजाज बिगड़ने लगा था। देखते ही देखते तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई, जो देर रात तक जारी रही। आंधी की रफ्तार इतनी तेज थी कि खेतों में खड़ी फसलें टिक नहीं सकीं और बड़े पैमाने पर गिरकर बर्बाद हो गईं। कुछ इलाकों में पेड़ भी गिरे।

    किसानों का कहना है कि इस बार फसल की स्थिति काफी अच्छी थी और बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी लेकिन आंधी ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। कई किसानों ने कर्ज लेकर खेती की थी, ऐसे में फसल बर्बाद होने से उनकी आर्थिक स्थिति और भी कमजोर हो गई है।

    ग्रामीणों ने बताया कि सब्जी उत्पादकों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है, क्योंकि सब्जियों की फसलें नाजुक होती हैं और तेज हवा व बारिश को सहन नहीं कर पातीं। खेतों में पानी भर जाने से फसल सड़ने की भी आशंका बढ़ गई है, जिससे नुकसान और अधिक हो सकता है। इस आपदा के बाद किसानों ने प्रशासन से तत्काल क्षति का आकलन कराने और उचित मुआवजा देने की मांग की है।

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    उनका कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट गहरा सकता है। कई किसानों ने यह भी मांग की है कि फसल बीमा योजना के तहत उन्हें जल्द से जल्द लाभ दिलाया जाए। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति का जायजा लेने की बात कही है।

    अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर नुकसान का आकलन किया जाएगा और सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

    ग्रामीणों ने सरकार से अपील की है कि इस प्राकृतिक आपदा को गंभीरता से लेते हुए त्वरित राहत पहुंचाई जाए, ताकि प्रभावित किसानों को कुछ हद तक आर्थिक सहारा मिल सके और वे दोबारा खेती के लिए खुद को तैयार कर सकें।