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    सुपौल में जमीन खरीदने वालों को राहत, अब रजिस्ट्री से पहले 10 दिन में CO देंगे भूमि की पूरी 'कुंडली'

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 03:05 PM (IST)

    सुपौल में जमीन खरीद-बिक्री को पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसके तहत अब अंचलाधिकारी 10 दिनों के भीतर जमीन की अद्यतन जानकारी देंगे। ...और पढ़ें

    अब रजिस्ट्री से पहले 10 दिन में CO देंगे भूमि की पूरी 'कुंडली' (AI Generated Image)

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    जागरण संवाददाता, सुपौल। जिले में जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विवादमुक्त बनाने के उद्देश्य से शनिवार से नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब कोई भी व्यक्ति जमीन खरीदने से पहले उसकी अद्यतन (अपडेटेड) एवं आधिकारिक जानकारी प्राप्त करने के लिए संबंधित अंचलाधिकारी के समक्ष आवेदन दे सकता है।

    आवेदन मिलने के बाद संबंधित सीओ या राजस्व अधिकारी को 10 दिनों के भीतर भूमि का पूरा ब्यौरा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

    नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जिला अवर निबंधक उप निबंधन निरीक्षक ने सभी अंचलाधिकारियों एवं राजस्व अधिकारियों को पत्र जारी कर समयबद्ध तरीके से आवेदनों के निष्पादन का निर्देश दिया है।

    पत्र में स्पष्ट किया गया है कि दस्तावेज निबंधन से पूर्व अंतरित की जाने वाली भूमि के संबंध में पक्षकार को आधिकारिक एवं अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लागू किया गया है।

    निर्देश के अनुसार, पक्षकार द्वारा आवेदन में दर्ज की गई सूचनाओं के आधार पर संबंधित अंचलाधिकारी अथवा राजस्व अधिकारी को आवेदन प्राप्त होने के 10 दिनों के भीतर भूमि की अद्यतन स्थिति उपलब्ध करानी होगी।

    विवाद, सरकारी दावा, कानूनी अड़चन या अन्य समस्या का होगा समाधान

    नई व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन खरीदने वाले लोगों को रजिस्ट्री से पहले ही यह आधिकारिक जानकारी मिल जाएगी कि संबंधित भूमि पर कोई विवाद, सरकारी दावा, कानूनी अड़चन या अन्य समस्या तो नहीं है। इससे भविष्य में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया भी आसान होगी और अनावश्यक विवादों की आशंका कम होगी।

    अब तक आम लोगों के लिए रजिस्ट्री से पहले जमीन की वास्तविक और कानूनी स्थिति की जानकारी जुटाना आसान नहीं था। अधिकांश लोग बिचौलियों या अन्य अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर रहते थे, जिनकी जानकारी की प्रामाणिकता की कोई गारंटी नहीं होती थी। ऐसे में कई बार खरीदारों को रजिस्ट्री के बाद विवादों का सामना करना पड़ता था।

    राजस्व विभाग की इस नई पहल से जमीन खरीद-बिक्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी और खरीदारों को सरकारी स्तर पर प्रमाणित जानकारी मिलने से धोखाधड़ी एवं विवाद की संभावनाओं पर काफी हद तक अंकुश लगने की उम्मीद है।

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