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    बिहार में फर्जी हस्ताक्षर से मदरसे में लाखों रुपये की निकासी, रिटायर्ड और मृत शिक्षकों के नाम पर हुआ 'खेल'

    Updated: Thu, 09 Apr 2026 04:27 PM (GMT+05:30)

    सुपौल के छातापुर स्थित मदरसा हासिमिया में फर्जी हस्ताक्षर से लाखों रुपये की निकासी का मामला सामने आया है। आरोप है कि सेवानिवृत्त और मृत शिक्षकों के एर ...और पढ़ें

    बिहार में फर्जी हस्ताक्षर से मदरसे में लाखों रुपये की निकासी

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    संवाद सूत्र, छातापुर (सुपौल)। प्रखंड की लक्ष्मीनियां पंचायत स्थित एक मदरसा से जुड़ा फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। बताया जा रहा है कि बरमोतरा गांव में संचालित मदरसा हासिमिया में सचिव और हेडमास्टर के कथित फर्जी हस्ताक्षर कर एरियर मद में लाखों रुपये की निकासी कर ली गई।

    जिस एरियर की राशि निकाली गई, वह उन शिक्षकों के नाम पर बताई जा रही है जो वर्षों पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि इनमें से कुछ की मृत्यु भी हो चुकी है। मामले में मदरसा के पूर्व प्रधानाध्यापक सह वर्तमान सहायक शिक्षक मु. नाजिम अली पर फर्जीवाड़े का आरोप लगाया गया है।

    बताया जाता है कि एरियर भुगतान को लेकर हेडमास्टर मु. अरशद और नाजिम अली के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद मामला मदरसा के सचिव मु. कासिम तक पहुंच गया। आपसी स्तर पर समाधान नहीं निकलने पर सचिव ने गत 06 अप्रैल को कलेक्ट्रेट में आयोजित प्रमंडलीय आयुक्त की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज करा दी।

    शिकायत के बाद वरीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए। इसके तहत मंगलवार को डीपीओ स्थापना आलोक शेखर तथा प्रभारी बीईओ सह बीपीआरओ छातापुर देश कुमार मदरसा हासिमिया पहुंचकर जांच की।

    मौके पर दोनों पक्षों को बुलाकर कथित फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई। हालांकि, सचिव मु. कासिम का कहना है कि मौके पर हस्ताक्षर का मिलान नहीं हो सका।

    रिटायर्ड शिक्षकों के नाम पर लाखों की निकासी का आरोप

    मदरसा के सचिव मु. कासिम ने बताया कि मदरसा की स्थापना वर्ष 1977-78 में हुई थी और उस समय पांच शिक्षक कार्यरत थे। उनके अनुसार, कई वर्षों से लंबित एरियर के नाम पर प्रत्येक शिक्षक के खाते से करीब 15 से 20 लाख रुपये तक की निकासी किए जाने की बात सामने आ रही है।

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    आरोप है कि यह निकासी फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से की गई। उन्होंने कहा कि मदरसा में वर्तमान में मात्र दो शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि अन्य सभी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

    जिन शिक्षकों के नाम पर राशि निकाली गई, उनमें से एक शिक्षक की करीब सात वर्ष पहले ही मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में मृत व्यक्ति के नाम से बैंक खाते का संचालन और उसमें राशि हस्तांतरित होना भी सवाल खड़ा करता है। सचिव ने यह भी आरोप लगाया कि मदरसा में मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में भी अनियमितता की जा रही है।

    सचिव के अनुसार यदि प्रत्येक शिक्षक के नाम पर 15-20 लाख रुपये की निकासी हुई है तो कुल राशि 50 लाख रुपये से अधिक तक पहुंच सकती है। मंगलवार को अधिकारियों की जांच के बाद से पूरे इलाके में मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

    क्या कहते हैं अधिकारी?

    प्रभारी बीईओ सह बीपीआरओ देश कुमार ने बताया कि हेडमास्टर और पूर्व हेडमास्टर के बीच फर्जी हस्ताक्षर को लेकर विवाद सामने आया है, जिसकी जांच की जा रही है। पुराने अभिलेखों से हस्ताक्षर का मिलान किया जाएगा और इसके लिए संबंधित कागजात उपलब्ध कराने को कहा गया है।

    जांच के लिए पहुंचे डीपीओ

    वहीं, जांच के लिए पहुंचे डीपीओ स्थापना आलोक शेखर ने बताया कि प्रमंडलीय आयुक्त की जनसुनवाई में प्राप्त आवेदन के आलोक में मदरसा हासिमिया में जांच की गई है। जांच जारी है और आवश्यक अभिलेखों की मांग की गई है। नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।