हरिहरनाथपुरम सैटेलाइट टाउनशिप: सम्राट सरकार का बड़ा फैसला, मुआवजा बढ़ाया और रजिस्ट्री में भी राहत
सरकार ने हरिहरनाथपुरम सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के लिए किसानों के विरोध के बाद मुआवजा नीति में बदलाव और रजिस्ट्री नियमों में राहत दी है। ...और पढ़ें

हरिहरनाथपुरम पर सरकार का नया दांव, मुआवजा बढ़ाया, रजिस्ट्री में भी दी राहत

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अवध किशोर शर्मा, हाजीपुर। उत्तर बिहार के आर्थिक और शहरी परिदृश्य को नई दिशा देने वाली महत्वाकांक्षी हरिहरनाथपुरम सैटेलाइट टाउनशिप और ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना को लेकर पिछले एक महीने से जारी गतिरोध के बीच राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
बीते 17 जून को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक ओर उत्तर बिहार को सिंगापुर की तर्ज पर विकसित करने का रोडमैप प्रस्तुत किया गया, वहीं दूसरी ओर आंदोलनरत किसानों की चिंताओं को दूर करने के लिए मुआवजा नीति में बदलाव और रजिस्ट्री नियमों में राहत देने का निर्णय लिया गया।
गौरतलब हो कि सोनपुर, दिघवारा, दरियापुर और परसा प्रखंड के 26 मौजों की उपजाऊ जमीन पर प्रस्तावित इस परियोजना को लेकर किसानों में असंतोष बना हुआ था। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सब्जी उत्पादन, पशुपालन और मत्स्य पालन होता है।
विवाद तब गहराया, जब जमीन की रजिस्ट्री पर रोक की चर्चा फैल गई। इससे उन किसानों की चिंता बढ़ गई, जिन्होंने विवाह, इलाज या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अपनी जमीन की बिक्री का बयाना ले रखा था।
किसान महासंघ और विभिन्न राजनीतिक दलों, विशेषकर राजद के नेतृत्व में बीते 9 जून को अनुमंडल कार्यालय मार्च सहित कई विरोध प्रदर्शन हुए। किसानों की प्रमुख मांग उचित व्यावसायिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की थी।
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कैबिनेट ने दिए तीन बड़े तोहफे
बढ़ते विरोध के बीच राज्य कैबिनेट ने बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 के तहत कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में सर्किल रेट अथवा बाजार मूल्य का दोगुना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है।
बीमारी, विवाह जैसी आकस्मिक परिस्थितियों में पूर्ण प्रतिबंध के बजाय विशेष अनुमति के साथ जमीन की खरीद-बिक्री और लीज की व्यवस्था भी की गई है। बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने के लिए बिहार राज्य आवास बोर्ड को सीधे भूमि क्रय के लिए अधिकृत किया गया है।
मानक संचालन प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव प्राप्त होने के सात दिनों के भीतर जांच तथा अगले सात दिनों में भुगतान और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही इस खरीद पर स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा।
सिंगापुर की तर्ज पर विकसित होगा हरिहरनाथपुरम
सारण सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य सोनपुर को वैश्विक स्तर के आधुनिक शहर के रूप में विकसित करना है। लगभग 680 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित हरिहरनाथपुरम का स्वरूप सिंगापुर की तर्ज पर विकसित करने की योजना है।
गंगा और गंडक नदियों के किनारे बसने वाले इस शहर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, चौड़ी सड़कें, आधुनिक सीवरेज और ड्रेनेज जैसी अत्याधुनिक नागरिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। दावा किया गया है कि यह परियोजना रायपुर, ढोलेरा और अमरावती जैसे नए शहरों से भी अधिक व्यापक होगी।
राहत के बावजूद कई सवाल कायम
कैबिनेट के निर्णयों से तत्काल राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन कई महत्वपूर्ण सवाल अब भी बने हुए हैं। किसानों का कहना है कि कई स्थानों पर सर्किल रेट वास्तविक बाजार मूल्य से काफी कम है। यदि मुआवजा केवल सर्किल रेट के आधार पर मिला तो असंतोष दोबारा बढ़ सकता है।
इसके अलावा मूल निवासियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किफायती आवास की व्यवस्था, वेटलैंड संरक्षण तथा गंगा-गंडक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निर्माण से बाढ़ और जलजमाव जैसी संभावित चुनौतियों पर भी स्पष्ट नीति सामने आना बाकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हरिहरनाथपुरम की सफलता केवल आधुनिक आधारभूत संरचना से नहीं, बल्कि इस बात से तय होगी कि जिन किसानों ने अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़ी है, उन्हें विकास में कितनी भागीदारी और सम्मानजनक पुनर्वास मिलता है। सरकार और किसानों के बीच पारदर्शी एवं निरंतर संवाद ही इस परियोजना की सफलता की कुंजी माना जा रहा है।
क्या कहते हैं लोग?
सैटेलाइट सिटी क्षेत्र में रजिस्ट्री की अनुमति तो दी गई है, लेकिन जमीन केवल बिहार आवास बोर्ड को बेचने की बाध्यता किसानों के हित में नहीं है। यदि निजी व्यक्तियों को भी जमीन बेचने की अनुमति मिले तो किसानों को अधिक मूल्य मिल सकेगा। - सुनील सिंह, गोपालपुर, नयागांव, सोनपुर
नयागांव के सुरेश सिंह बताते हैं कि बिहार के विकास के लिए हरिहरनाथ सैटेलाइट टाउनशिप आवश्यक है, लेकिन किसानों की सहमति और उन्हें विश्वास में लिए बिना भूमि अधिग्रहण उचित नहीं होगा। भूमि अधिग्रहण के एवज में उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
लाड़नपुर डुमरी के अनमोल राज ने कहा कि रजिस्ट्री में दी गई छूट स्वागतयोग्य है और इससे जरूरतमंद परिवारों को राहत मिलेगी। हालांकि बाजार मूल्य, मुआवजा और वेटलैंड जैसे मुद्दों का समाधान किए बिना किसानों की चिंता पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।
मंत्रिमंडल द्वारा भूमि रजिस्ट्री पर दी गई छूट सकारात्मक है, लेकिन किसानों को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। अनसर्वे एवं टोपो लैंड का उचित मुआवजा देने के साथ-साथ उसका शीघ्र सर्वे कराने की भी पहल करनी चाहिए। - जितेंद्र सिंह, उपाध्यक्ष, सारण जिला कांग्रेस कमेटी