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राघोपुर में बाढ़ से हाहाकार: पानी में डूबे 76 गांव, बिजली और नेटवर्क ठप; ट्रैक्टर से आवाजाही को लोग मजबूर

Published: Sat, 05 Sep 2026 04:41 PM (IST)

राघोपुर प्रखंड के 76 गांव गंगा की बाढ़ से जलमग्न हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है और आवागमन के लिए नाव-ट्रैक्टर ही सहारा हैं।

ट्रैक्टर से घाट जाते लोग। (जागरण)

ट्रैक्टर से घाट जाते लोग। (जागरण)

HighLights

  1. राघोपुर के 76 गांव गंगा बाढ़ से पूरी तरह जलमग्न।

  2. बिजली आपूर्ति ठप, मोबाइल नेटवर्क भी बाधित, संचार मुश्किल।

  3. ग्रामीणों को पर्याप्त सरकारी सहायता न मिलने से आक्रोश।

संवाद सूत्र, राघोपुर। राघोपुर प्रखंड के सभी गांव पिछले कई दिनों से गंगा के पानी से लबालब हैं। मुख्य और ग्रामीण सड़कों पर कई फीट तक पानी भरा है।

घरों के अंदर और चारों तरफ पानी रहने से लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है। आवागमन के लिए नाव और ट्रैक्टर ही लोगों का एकमात्र सहारा बचा है।

जरूरी काम से लोग रुस्तमपुर, जेठली सहित अन्य घाटों तक ट्रैक्टर से पहुंच रहे हैं और वहां से नाव के सहारे कच्ची दरगाह, पटना सहित अन्य जगहों पर जा रहे हैं। विभिन्न गांवों से घाट तक पहुंचने के लिए ट्रैक्टर चालक प्रति व्यक्ति 50 रुपये किराया ले रहे हैं।

फतेहपुर निवासी जय प्रकाश उर्फ छोटू और राघोपुर निवासी प्रभात कुमार व अतुल कुमार सिंह ने बताया कि रुस्तमपुर समेत अन्य घाटों तक जाने के लिए ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ रहा है। सड़क पर कहीं चार फीट तो कहीं पांच फीट से अधिक पानी होने के कारण आवागमन में भारी परेशानी हो रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार की ओर से पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है। अंचल स्तर पर विभिन्न पंचायतों में नाव चलने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है।

raghopur flood news

ग्रामीणों का कहना है कि कागज पर नाव का परिचालन दिखाया जा रहा है। कुछ नावें जनप्रतिनिधियों को दी गई हैं, जिन्हें वे अपने हिसाब से चलवा रहे हैं।

नाव नहीं मिलने के कारण लोग जान जोखिम में डालकर दैनिक उपयोग का सामान और पशुचारा लाने के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान जा रहे हैं। कई दिनों से घरों में पानी भरा होने के कारण खाद्य सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुएं खत्म होने के कगार पर हैं।

20 पंचायतों के 76 गांवों में 142 नाव चलने का दावा

राघोपुर अंचल कार्यालय के अनुसार, 4 सितंबर को बाढ़ प्रभावित 20 पंचायतों के 76 गांवों में 142 नावों का संचालन किया जा रहा है। इसमें सरकारी नावों की संख्या छह है।

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अब तक 1100 पालीथीन शीट वितरित किए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं, सामुदायिक किचन की संख्या शून्य और सूखा राशन वितरण की संख्या भी शून्य बताई गई है।

अब तक शुरू नहीं हुआ सामुदायिक किचन

कई दिनों से बाढ़ की चपेट में रहने के बावजूद राघोपुर की किसी भी पंचायत में सामुदायिक किचन शुरू नहीं होने को लेकर लोगों में आक्रोश है।

ग्रामीणों का कहना है कि सूखा राशन, पालीथीन शीट और तिरपाल का भी पर्याप्त वितरण नहीं किया गया है। इसे लेकर लोग इंटरनेट मीडिया पर सरकार और अपने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भड़ास निकाल रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि आपदा की इस घड़ी में न तो सरकार साथ दे रही है और न ही जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि। चुनाव के दौरान तरह-तरह के वादे करने और घर-घर दस्तक देने वाले नेता अब सिर्फ निरीक्षण कर खानापूर्ति कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने प्रत्येक पंचायत के अलग-अलग ऊंचे स्थानों पर तुरंत सामुदायिक किचन शुरू कराने की मांग की है। इसके साथ ही जरूरतमंदों को पालीथीन शीट, तिरपाल, सूखा राशन, मवेशियों के लिए चारा, दवा और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सरायपुर पंचायत में सैकड़ों लोगों के बीच पालीथीन शीट और सूखा राशन का वितरण किया था। वहीं, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया था।

बिजली गुल, मोबाइल नेटवर्क भी ठप

राघोपुर के 76 गांवों में पिछले कई दिनों से बिजली आपूर्ति ठप है। बिजली नहीं रहने से लोग अंधेरे में रहने और मोबाइल चार्ज करने के लिए परेशान हैं। कई कंपनियों के मोबाइल टावर भी काम नहीं कर रहे हैं, जिससे संचार व्यवस्था प्रभावित है।

स्थानीय लोगों के अनुसार रात में घरों में पानी रहने से सांप-बिच्छू का डर बना रहता है। ऐसे में बिजली और मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से इमरजेंसी में किसी को सूचना देना भी मुश्किल हो रहा है।

लोगों ने पंचायतों के ऊंचे स्थानों पर मोबाइल चार्जिंग की वैकल्पिक व्यवस्था कराने की मांग की है। इस संबंध में जेई रूपेश कुमार यादव ने बताया कि वरीय अधिकारियों के निर्देश पर सुरक्षा कारणों से राघोपुर प्रखंड में बिजली आपूर्ति बंद की गई है।

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