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    आखिर बेटियां क्यों नहीं उठातीं अर्थी? इससे जुड़ी 5 मान्यताएं, वैशाली की 5 बेटियों ने बदली सोच

    Updated: Tue, 12 May 2026 08:00 PM (IST)

    हिंदू रीति-रिवाजों में महिलाओं के श्मशान घाट न जाने की पुरानी परंपरा रही है, जिसके पीछे कई मान्यताएं थीं। हालांकि, वैशाली में पांच बेटियों ने अपने पित ...और पढ़ें

    महिलाएं श्मशान घाट नहीं जातीं

    महिलाएं श्मशान घाट नहीं जातीं

    HighLights

    1. महिलाओं का श्मशान न जाने की पुरानी परंपरा, कई मान्यताएं।

    2. वैशाली की पांच बेटियों ने पिता की अर्थी उठाई, अंतिम संस्कार किया।

    3. नकारात्मक ऊर्जा, भावुकता, संक्रमण जैसी थीं श्मशान से जुड़ी मान्यताएं।

    जागरण संवाददाता, वैशाली। हिंदू रीति-रिवाजों में लंबे समय से यह परंपरा चली आ रही है कि महिलाएं श्मशान घाट नहीं जातीं और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में पुरुष ही शामिल होते हैं।

    मान्यता है कि श्मशान घाट की नकारात्मक ऊर्जा महिलाओं पर जल्दी असर डाल सकती है, इसलिए उन्हें वहां जाने से रोका जाता था। इसी वजह से घर की चौखट तक महिलाओं की भूमिका सीमित मानी जाती रही है।

    कोमल स्वभाव को भी माना गया बड़ा कारण

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महिलाओं का स्वभाव अधिक भावुक और कोमल माना जाता है। ऐसा कहा जाता रहा कि अंतिम संस्कार के दौरान अधिक रोने-बिलखने से मृत आत्मा की शांति प्रभावित हो सकती है। इसी सोच के कारण महिलाओं को श्मशान जाने से दूर रखा गया।

    श्मशान की प्रक्रिया और स्वास्थ्य से जुड़ी मान्यता

    पुरानी मान्यताओं के मुताबिक शव दाह के दौरान वातावरण में कई तरह के संक्रमण और नकारात्मक प्रभाव फैलते हैं।

    अंतिम संस्कार के बाद पुरुषों द्वारा स्नान और मुंडन की परंपरा भी इसी से जुड़ी मानी जाती है।

    क्योंकि महिलाओं का मुंडन अशुभ माना जाता था, इसलिए उन्हें श्मशान ले जाने से परहेज किया गया।

    आत्माओं और धार्मिक मान्यताओं का डर

    कुछ धार्मिक मान्यताओं में यह भी कहा गया कि श्मशान घाट पर भटकती आत्माओं का प्रभाव महिलाओं पर अधिक पड़ सकता है।

    इसी डर और परंपरा के कारण सदियों तक महिलाओं को अंतिम संस्कार से दूर रखा गया।

    हालांकि आधुनिक दौर में इन मान्यताओं पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

    अब बदल रही समाज की सोच

    समय के साथ समाज की सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब बेटियां भी अपने माता-पिता को मुखाग्नि देने और अंतिम संस्कार में शामिल होने लगी हैं।

    कई परिवारों में बेटियों ने पुत्र धर्म निभाकर समाज को नई दिशा देने का काम किया है।

    श्मशान और महिलाओं को लेकर ये हैं 5 बड़ी मान्यताएं

    1. श्मशान घाट को नकारात्मक ऊर्जा वाला स्थान माना जाता है।
    2. महिलाओं का स्वभाव अधिक भावुक होने की वजह से उन्हें अंतिम संस्कार से दूर रखा गया।
    3. शव दाह के दौरान संक्रमण और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी बताए जाते रहे हैं।
    4. अंतिम संस्कार के बाद मुंडन की परंपरा महिलाओं पर लागू नहीं होती।
    5. धार्मिक मान्यताओं में आत्माओं के प्रभाव का डर भी एक वजह माना गया।

    वैशाली की 5 बेटियों ने पेश की मिसाल

    वैशाली जिले के नया टोला गांव में किसान तारिणी प्रसाद सिंह के निधन के बाद उनकी पांच बेटियां आगे आईं।

    Poonam Singh, Neelam Singh, माधुरी, माला और चांदनी ने पिता की अर्थी को कंधा दिया और पूरे रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया।

    इस भावुक दृश्य ने न सिर्फ गांव बल्कि पूरे इलाके में बेटियों को लेकर बनी पुरानी सोच पर नई बहस छेड़ दी।

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