Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पश्चिम चंपारण में सूअर का शिकार कर ‘आराम मोड’ में बाघ, मक्के के खेतों में छिपा, गांवों में अलर्ट

    By Pankaj Kumar Edited By: Dharmendra Singh
    Updated: Thu, 26 Mar 2026 05:20 PM (IST)

    पश्चिम चंपारण में एक बाघ ने जंगली सूअर का शिकार करने के बाद मक्के के खेतों में डेरा डाल लिया है। यह बाघ गांव से तीन किलोमीटर दूर छिपा है, जिससे ग्रामी ...और पढ़ें

    पश्चिम चंपारण में मक्का के खेत के पास ग्रामीण। जागरण

    पश्चिम चंपारण में मक्का के खेत के पास ग्रामीण। जागरण 

    HighLights

    1. बाघ ने जंगली सूअर का शिकार कर मक्के के खेतों में छिपा.

    2. वन विभाग बाघ की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहा है.

    3. ग्रामीणों को अकेले खेतों में न जाने की सख्त हिदायत.

    संवाद सूत्र,मैनाटांड़ ( पश्चिम चंपारण ) । पश्चिम चंपारण में बाघ ने शिकार के बाद जैसे ‘आराम मोड’ ऑन कर लिया है। जंगली सूअर को मारने के बाद वह अब मक्के के घने खेतों को अपना ठिकाना बनाकर आराम फरमा रहा है, लेकिन उसकी मौजूदगी ने आसपास के गांवों की नींद उड़ा दी है।

    गांव से महज तीन किलोमीटर दूर छिपे इस शिकारी की हर हलचल पर वन विभाग की नजर है, जबकि ग्रामीणों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। खेतों की हर सरसराहट अब लोगों के लिए डर का संकेत बन गई है।

    बीते 24 मार्च की रात में मानपुर थाना क्षेत्र के बिरंची तीन गांव के समीप बाघ ने जंगली सूअर का शिकार किया था। ग्रामीण तपन दास के घर से 100 मीटर की दूरी पर मुन्ना मल्लिक के मक्के के खेत में बाघ का पगमार्क और खून के छींटे का निशान मिला था।

    अब बाघ का लोकेशन गांव से तीन किमी दूर शीतलापुर फार्म के पास मिला है। मानपुर वन क्षेत्र के फॉरेसटर हिमांशु कुमार ने बताया कि बिरंची तीन गांव और शीतलापुर फार्म के बीच लगभग तीन किलोमीटर के दूरी है। खेतों में ज्यादा मक्का की खेती हुई है। इन्हीं मक्का के खेतों में बाघ छुपा हुआ है।

    खबरें और भी

    बाघ अगर जंगली सूअर का अगर शिकार किया है तो बाघ की प्रवृति होती है, वह शिकार के बाद दो दिनों तक आराम करता है। दोनों गांवों के बीच दो नाले भी है। जिसमें बाघ पानी पीने के लिए जा सकता है।

    ऐसे में वनकर्मियों को अलर्ट किया गया है। बाघ को जंगल की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बाघ की गतिविधियों पर वन विभाग की पैनी नजर है।वन कर्मी लगातार बाघ की गतिविधि पर नजर बनाये हुए हैं। ग्रामीणों को जागरूक किया जा है कि अभी फिलहाल किसान व मजदूर सरेह में अकेले नहीं जाएं।