पश्चिम चंपारण में हत्या के प्रयास के मामले में पिता-पुत्र को उम्रकैद, पहले से काट रहे आजीवन कारावास
बगहा व्यवहार न्यायालय ने हत्या के प्रयास के एक मामले में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पहले से ही एक अन्य हत्या के मामले में आजीव ...और पढ़ें

धारा 307 के तहत आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
HighLights
पिता-पुत्र को हत्या के प्रयास में आजीवन कारावास।
दोनों पहले से ही हत्या के एक मामले में दोषी।
आयुध अधिनियम के तहत पिता को अतिरिक्त सजा।
जागरण संवाददाता, बगहा (पश्चिम चंपारण)। West Champaran Court Verdict: बगहा व्यवहार न्यायालय ने हत्या के प्रयास के एक मामले में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों दोषी पहले से ही हत्या के एक अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं।
अपर सत्र न्यायाधीश-चतुर्थ मानवेन्द्र मिश्र की अदालत ने चौतरवा थाना कांड संख्या 100/2016 में दोषी पाए गए प्रमोद प्रसाद और उनके पुत्र बिल्लू प्रसाद उर्फ राहुल कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत आजीवन कारावास और एक-एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
पहले से जेल में बंद
अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि दोनों अभियुक्त चौतरवा थाना कांड संख्या 345/2019 के हत्या मामले में पहले ही आजीवन कारावास की सजा पा चुके हैं और वर्तमान में जेल में बंद हैं। न्यायालय ने इसे गंभीर आपराधिक प्रवृत्ति मानते हुए कठोर दंड को उचित माना।
आयुध अधिनियम में भी सजा
अपर लोक अभियोजक जितेंद्र भारती ने बताया कि प्रमोद प्रसाद को भारतीय आयुध अधिनियम की धारा 27 के तहत तीन वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की अतिरिक्त सजा भी सुनाई गई।
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अर्थदंड जमा नहीं करने पर दोनों अभियुक्तों को छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा, जबकि आयुध अधिनियम के जुर्माने का भुगतान नहीं करने पर प्रमोद प्रसाद को तीन माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
अलग सजा नहीं
न्यायालय ने कहा कि धारा 307 के तहत आजीवन कारावास दिए जाने के कारण भारतीय दंड संहिता की अन्य धाराओं 323, 324, 447 और 504 में अलग से दंडादेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। साथ ही, न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश भी दिया गया।
2016 का है मामला
चौतरवा थाना क्षेत्र में वर्ष 2016 में आठ वर्षीय अंकित यादव की गोली मारकर हत्या का प्रयास किया गया था। इसी मामले में अदालत ने बीते गुरुवार को पिता-पुत्र को दोषी करार दिया था।
साक्ष्य के अभाव में दो महिलाओं समेत तीन अन्य आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाहों की गवाही कराई गई, जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं सुनील मिश्र और मृत्युंजय सिंह ने कम से कम सजा देने की मांग की थी।