21 साल बाद भी आरोपी को नहीं किया पेश, बगहा कोर्ट ने जेल अधीक्षक का वेतन रोकने का दिया आदेश
बगहा की अदालत ने 21 साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में लगातार देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने बेतिया मंडल कारा अधीक्षक ...और पढ़ें
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21 साल पुराने मामले में कोर्ट का सख्त आदेश। सांकेतिक फोटो
HighLights
21 साल पुराने हत्या के प्रयास मामले में देरी पर कोर्ट सख्त।
बेतिया मंडल कारा अधीक्षक का वेतन रोकने का आदेश जारी।
बगहा पुलिस अधीक्षक कार्यालय की लापरवाही पर डीजीपी को निर्देश।
जागरण संवाददाता, बगहा। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने मंगलवार को 21 वर्ष पुराने हत्या के प्रयास के मामले की सुनवाई में लगातार हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है।
अदालत ने जिला पदाधिकारी, बेतिया को निर्देश दिया है कि वे बेतिया मंडल कारा अधीक्षक के वेतन को जीवन निर्वाह भत्ता छोड़कर न्यायिक आदेश के अनुपालन तक रोक दें और 15 दिनों के भीतर की गई कार्रवाई से न्यायालय को अवगत कराएं।
साथ ही, बगहा पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में बरती गई लापरवाही को गंभीर मानते हुए अदालत ने आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक, पटना को भेजने का निर्देश दिया है।
ताकि संबंधित अधिकारियों पर विधि-सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 मार्च को निर्धारित करते हुए उस दिन अभियुक्त की हर हाल में उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है।
तीन वर्षों से पेशी लंबित
मामला वर्ष 2005 के सेमरा थाना कांड संख्या 50/2005 से जुड़ा है, जिसमें हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप दर्ज हैं। सूचक यूसुफ मियां, पिता गनु मियां, निवासी कटकोइया, थाना सेमरा के आवेदन पर 17 नवंबर 2005 को यह मामला दर्ज किया गया था।
अदालत के अनुसार, 22 मार्च 2023 को अभियुक्त राजू मियां उर्फ राजू बैठा की पेशी के लिए प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक उसे न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया जा सका।
कोर्ट के आदेश का नहीं हुआ पालन
रिकॉर्ड के मुताबिक, अभियुक्त को बगहा जेल से स्थानांतरित कर बेतिया मंडल कारा भेजा गया था। इसके बाद कई बार जेल अधीक्षक बेतिया द्वारा पुलिस अधीक्षक बगहा को पत्र भेजकर सशस्त्र पुलिस बल और वाहन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया, लेकिन आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं हो सके।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पिछले लगभग तीन वर्षों से केवल पत्राचार होता रहा, लेकिन न्यायिक आदेश का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया। अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी के कारण न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
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कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 309 का हवाला देते हुए कहा कि अनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदार पक्षों पर कार्रवाई की जा सकती है।
अभियोजन पदाधिकारी ने भी स्वीकार किया कि 22 मार्च 2023 से यह मामला अभियुक्त की उपस्थिति के लिए लंबित है। कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद अभियुक्त की पेशी नहीं हो सकी। ऐसे में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।