बगहा में पत्नी की हत्या में दोषी पति को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया 1 लाख रुपये जुर्माना
बगहा कोर्ट ने पत्नी रीना देवी की हत्या के मामले में दोषी पति सुभाष यादव को आजीवन कारावास और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
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आरोपी को मिली सजा। (जागरण)
HighLights
बगहा कोर्ट ने पति सुभाष यादव को आजीवन कारावास सुनाया।
पत्नी रीना देवी की हत्या और साक्ष्य छिपाने का मामला।
अदालत ने बच्चों को सरकारी योजना का लाभ देने का निर्देश दिया।
जागरण संवाददाता, बगहा। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने मंगलवार को धनहा थाना कांड संख्या 182/2020 से जुड़े पत्नी की हत्या मामले में दोषी पति सुभाष यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। वहीं, साक्ष्य छिपाने के मामले में धारा 201 के तहत सात वर्ष के कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
सत्र वाद संख्या 73/2021 में 18 अगस्त को सजा के बिंदु पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायालय ने अभिलेख में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाया।
अभियोजन अधिकारी मन्नू राव ने दोषी को कठोर सजा देने की मांग करते हुए कहा कि सुभाष यादव ने पति-पत्नी के विश्वास के रिश्ते को कलंकित किया। पत्नी रीना देवी की हत्या के बाद शव को छिपाने और साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया।
शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके शरीर के हिस्सों को अलग कर बोरी में बंद कर चौर में फेंका गया तथा शेष हिस्से को जलाने का प्रयास किया गया।
अभियोजन ने इसे जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि दोषी ने साक्ष्य मिटाने के हर संभव प्रयास किए और मामले में मुख्य भूमिका निभाई।
वहीं, बचाव पक्ष ने दोषी के परिवार का मुख्य सहारा होने, उसके दो छोटे बच्चों तथा पूर्व में न्यायिक हिरासत में बिताई अवधि का हवाला देते हुए कम सजा देने की मांग की।
न्यायालय ने अपराध की प्रकृति और दोषी की भूमिका को देखते हुए सुभाष यादव को भादंवि की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड तथा धारा 201 के तहत सात वर्ष के कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
अर्थदंड नहीं देने पर दोनों धाराओं में अलग-अलग छह माह का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा। जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।
दो बच्चों को सरकारी योजना का लाभ दिलाने का निर्देश
अदालत ने दोषी सुभाष यादव और मृतका रीना देवी के दो छोटे बच्चों के भविष्य को देखते हुए जिला बाल संरक्षण इकाई को निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि मां की हत्या हो चुकी है और पिता के जेल में रहने के कारण बच्चों के पालन-पोषण पर असर पड़ सकता है।
अदालत ने जिला बाल संरक्षण इकाई, पश्चिम चंपारण को निर्देश दिया कि दोनों बच्चों को एक महीने के भीतर बिहार सरकार की स्पॉन्सरशिप अथवा परवरिश योजना से जोड़कर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। आदेश की प्रति जिला पदाधिकारी, पश्चिम चंपारण और जिला विधिक सेवा प्राधिकार, बेतिया को भी भेजने का निर्देश दिया गया है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार को दोनों बच्चों के राहत एवं पुनर्वास के लिए प्रतिकर राशि निर्धारित कर भुगतान की कार्रवाई करने को कहा गया है। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर बच्चों को योजना का लाभ मिलना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
